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किराये के चंद रुपये बचाने में गंवा दी जान
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Fri, 09 Oct 2015 10:02 PM IST
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जरवलरोड। बहराइच-लखनऊ हाईवे पर शुक्रवार तड़के हुए हादसे से पूरा बहराइच कांप उठा है। घर लौटने के लिए किराये का पैसा बचाने के चक्कर में गिट्टी लदे ट्रक पर सवार हुए और जान से हाथ धो बैठे।
शुक्रवार दोपहर पोस्टमार्टम हाउस में मृतकों के घर वाले पहुंचे तो पूरा इलाका चीत्कारों से सहम उठा। इनके घरों में भी कोहराम मचा है।
मतदान के लिए घर लौटना इतना भारी पड़ जाएगा, ये किसी ने सोचा नहीं था। एनएच 28 पर तपेसिपाह गांव के सामने माह भर से पुलिया का निर्माण हो रहा है, जिसके चलते कच्चा बाईपास मार्ग बनाया गया है। वाहनों के आवागमन के चलते खेत की मिट्टी धीरे-धीरे बैठ रही है।
घायल इंद्रसेन ने बताया कि ट्रक जब बाईपास से गुजर रहा था, तभी तेज का झटका लगा और ट्रक पलट गया। उसके बाद क्या हुआ, नहीं पता। आंख खुली तो अस्पताल में थे। वहीं, परसू अब तक बेहोश है। चैतू भी बदहवास है।
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इंद्रसेन ने कहा कि परिवार काफी गरीब है। खेतीबाड़ी नहीं है, ऐसे में एक-एक पैसा सहेजना पड़ता है। उसने बताया कि लखनऊ से बहराइच आने का किराया 112 रुपये है लेकिन जो ट्रक या भारवाहक वाहन बहराइच की ओर आते हैं, वह सिर्फ 40 से 50 रुपये लेते हैं।
इंद्रसेन ने कहा कि गुरुवार रात 11 बजे के आसपास वह सभी पॉलीटेक्निक चौराहे पर इकट्ठा थे, तभी ट्रक आकर रुका। 50-50 रुपये पर बहराइच पहुंचाने की बात हुई। इस पर सभी ट्रक पर सवार हो गए।
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शुक्रवार दोपहर पोस्टमार्टम हाउस में मृतकों के घर वाले पहुंचे तो पूरा इलाका चीत्कारों से सहम उठा। इनके घरों में भी कोहराम मचा है।
मतदान के लिए घर लौटना इतना भारी पड़ जाएगा, ये किसी ने सोचा नहीं था। एनएच 28 पर तपेसिपाह गांव के सामने माह भर से पुलिया का निर्माण हो रहा है, जिसके चलते कच्चा बाईपास मार्ग बनाया गया है। वाहनों के आवागमन के चलते खेत की मिट्टी धीरे-धीरे बैठ रही है।
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घायल इंद्रसेन ने बताया कि ट्रक जब बाईपास से गुजर रहा था, तभी तेज का झटका लगा और ट्रक पलट गया। उसके बाद क्या हुआ, नहीं पता। आंख खुली तो अस्पताल में थे। वहीं, परसू अब तक बेहोश है। चैतू भी बदहवास है।
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इंद्रसेन ने कहा कि परिवार काफी गरीब है। खेतीबाड़ी नहीं है, ऐसे में एक-एक पैसा सहेजना पड़ता है। उसने बताया कि लखनऊ से बहराइच आने का किराया 112 रुपये है लेकिन जो ट्रक या भारवाहक वाहन बहराइच की ओर आते हैं, वह सिर्फ 40 से 50 रुपये लेते हैं।
इंद्रसेन ने कहा कि गुरुवार रात 11 बजे के आसपास वह सभी पॉलीटेक्निक चौराहे पर इकट्ठा थे, तभी ट्रक आकर रुका। 50-50 रुपये पर बहराइच पहुंचाने की बात हुई। इस पर सभी ट्रक पर सवार हो गए।