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पीएनबी का 80 लाख लोन 76 लोगों ने दबाया
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Fri, 01 Jan 2016 09:59 PM IST
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बहराइच। पंजाब नेशनल बैंक की छावनी शाखा से विभिन्न योजनाओं के तहत 76 लोगों ने लोन तो लिया लेकिन लौटाया नहीं। लगभग 80 लाख का ऋण लेकर लोग उसे हजम कर गए।
बैंक ने कई बार बकाएदारों को नोटिस भी दिया लेकिन लोगों ने पैसा नहीं जमा किया। इनमें बेरोजगारों के साथ सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। अब बैंक इन सभी ऋणदाताओं को काली सूची में डालने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
मुख्यालय ने ऋण पत्रावलियों को स्वीकृत करने की प्रक्रिया भी रोक दी है। अब बैंक प्रबंधन ने जिला प्रशासन को सूची सौंपी है।
सरकार की ओर से बेरोजगारों को स्वरोजगारी बनाने की योजनाएं अमली जामा नहीं पहन पा रही हैं। इसके पीछे बैंकों की उदासीनता को अफसर हमेशा जिम्मेदार मानते रहते हैं।
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बैठकों में बैंकों पर शिकंजा कसने का दबाव भी रहता है। इसके इतर योजनाओं का लाभ लेने वाले बैंकों को पैसा देना ही भूल जाते हैं।
पंजाब नेशनल बैंक छावनी बाजार शाखा में नगरीय विकास अभिकरण विभाग की ओर से भेजी गई पत्रावलियों को स्वीकृत करते हुए लगभग दस लाख का ऋण वितरित किया जा चुका था, जिसे लाभार्थियों ने वापस ही नहीं किया है।
इसी तरह सरकार की प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत लगभग 60 लाख के ऋण बैंक बांट चुका है। इसे भी कर्ज लेने वालों ने दबा लिया है। इसी तरह लगभग दस लाख के पर्सनल लोन को भी लोगों ने नहीं लौटाया।
अब बैंक मुख्यालय ने आगे से ऋण पत्रावलियों को स्वीकृत किए जाने पर रोक लगा दी है। बैंक प्रबंधक अनिल रावत ने बताया कि सभी की सूची जिला प्रशासन को भेज दी गई है। इनको काली सूची में भी डाल दिया गया है। राजस्व वसूली की तरह सभी को आरसी जारी होगा।
90 प्रतिशत रिकवरी जरूरी
बैंक प्रबंधक ने बताया कि बैंक मुख्यालय की ओर से ऋण पत्रावलियों की स्वीकृत पर रोक लगा दी गई है। साथ ही निर्देश जारी हुए हैं कि पूर्व में जारी ऋण की धनराशि के सापेक्ष 90 फीसदी वसूली के बाद ही आगे कोई भी ऋण पत्रावली स्वीकृत की जाए।
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बैंक ने कई बार बकाएदारों को नोटिस भी दिया लेकिन लोगों ने पैसा नहीं जमा किया। इनमें बेरोजगारों के साथ सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। अब बैंक इन सभी ऋणदाताओं को काली सूची में डालने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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मुख्यालय ने ऋण पत्रावलियों को स्वीकृत करने की प्रक्रिया भी रोक दी है। अब बैंक प्रबंधन ने जिला प्रशासन को सूची सौंपी है।
सरकार की ओर से बेरोजगारों को स्वरोजगारी बनाने की योजनाएं अमली जामा नहीं पहन पा रही हैं। इसके पीछे बैंकों की उदासीनता को अफसर हमेशा जिम्मेदार मानते रहते हैं।
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बैठकों में बैंकों पर शिकंजा कसने का दबाव भी रहता है। इसके इतर योजनाओं का लाभ लेने वाले बैंकों को पैसा देना ही भूल जाते हैं।
पंजाब नेशनल बैंक छावनी बाजार शाखा में नगरीय विकास अभिकरण विभाग की ओर से भेजी गई पत्रावलियों को स्वीकृत करते हुए लगभग दस लाख का ऋण वितरित किया जा चुका था, जिसे लाभार्थियों ने वापस ही नहीं किया है।
इसी तरह सरकार की प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत लगभग 60 लाख के ऋण बैंक बांट चुका है। इसे भी कर्ज लेने वालों ने दबा लिया है। इसी तरह लगभग दस लाख के पर्सनल लोन को भी लोगों ने नहीं लौटाया।
अब बैंक मुख्यालय ने आगे से ऋण पत्रावलियों को स्वीकृत किए जाने पर रोक लगा दी है। बैंक प्रबंधक अनिल रावत ने बताया कि सभी की सूची जिला प्रशासन को भेज दी गई है। इनको काली सूची में भी डाल दिया गया है। राजस्व वसूली की तरह सभी को आरसी जारी होगा।
90 प्रतिशत रिकवरी जरूरी
बैंक प्रबंधक ने बताया कि बैंक मुख्यालय की ओर से ऋण पत्रावलियों की स्वीकृत पर रोक लगा दी गई है। साथ ही निर्देश जारी हुए हैं कि पूर्व में जारी ऋण की धनराशि के सापेक्ष 90 फीसदी वसूली के बाद ही आगे कोई भी ऋण पत्रावली स्वीकृत की जाए।