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Kaithal News: उमस भरी गर्मी से लोग बेहाल, खांसी, जुकाम और बुखार के बढ़े मरीज
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जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों की भीड़। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। उमस भरी गर्मी और मौसम में लगातार हो रहे बदलाव ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है, जिसका असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। मौसम में बदलाव के बाद सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ रही है। एक सप्ताह पहले जहां अस्पतालों में रोजाना करीब 400 मरीज पहुंच रहे थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 900 तक पहुंच गई है। इनमें सबसे ज्यादा मरीज खांसी, जुकाम और बुखार की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिनभर उमस रहने से लोगों को तापमान सामान्य होने के बावजूद गर्मी अधिक महसूस हो रही है। मौसम में नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण बच्चों और बुजुर्गों में मौसमी बीमारियों का असर अधिक देखने को मिल रहा है। चिकित्सकों के पास गले में खराश, खांसी, नाक बहना, सिरदर्द और बुखार की शिकायत वाले मरीज लगातार पहुंच रहे हैं।
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एक सप्ताह मौसम साफ रहने का अनुमान
मौसम वैज्ञानिकों डॉ. हरमीत सिंह के अनुसार, आने वाले दिनों में फिलहाल बारिश के कोई आसार नहीं हैं। अगले करीब एक सप्ताह तक मौसम मुख्य रूप से साफ रहने का अनुमान है। हालांकि उमस और तापमान में विशेष गिरावट नहीं होने से लोगों को गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है।
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धान की फसल में बीमारी का खतरा
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य समन्वयक रमेश चंद्र ने बताया कि मौसम में बदलाव का असर खेतों में खड़ी धान की फसल पर भी पड़ सकता है। उनके अनुसार लगातार उमस और नमी रहने से धान की फसल में पत्ता लपेट सहित विभिन्न रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है। किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। पत्तियों पर किसी तरह के धब्बे, रंग में बदलाव या बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेने को कहा गया है।
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पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह
डॉ. जितेंद्र गिल ने लोगों को मौसम के अनुरूप सावधानी बरतने की सलाह दी है। उमस में शरीर में पानी की कमी न होने दें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। बाहर से आने के तुरंत बाद ठंडा पानी पीने से बचें। खांसी, जुकाम या बुखार होने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से जांच करवाएं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों की तबीयत खराब होने पर लापरवाही न बरतने की सलाह दी गई है।
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कैथल। उमस भरी गर्मी और मौसम में लगातार हो रहे बदलाव ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है, जिसका असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। मौसम में बदलाव के बाद सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ रही है। एक सप्ताह पहले जहां अस्पतालों में रोजाना करीब 400 मरीज पहुंच रहे थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 900 तक पहुंच गई है। इनमें सबसे ज्यादा मरीज खांसी, जुकाम और बुखार की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिनभर उमस रहने से लोगों को तापमान सामान्य होने के बावजूद गर्मी अधिक महसूस हो रही है। मौसम में नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण बच्चों और बुजुर्गों में मौसमी बीमारियों का असर अधिक देखने को मिल रहा है। चिकित्सकों के पास गले में खराश, खांसी, नाक बहना, सिरदर्द और बुखार की शिकायत वाले मरीज लगातार पहुंच रहे हैं।
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एक सप्ताह मौसम साफ रहने का अनुमान
मौसम वैज्ञानिकों डॉ. हरमीत सिंह के अनुसार, आने वाले दिनों में फिलहाल बारिश के कोई आसार नहीं हैं। अगले करीब एक सप्ताह तक मौसम मुख्य रूप से साफ रहने का अनुमान है। हालांकि उमस और तापमान में विशेष गिरावट नहीं होने से लोगों को गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है।
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धान की फसल में बीमारी का खतरा
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य समन्वयक रमेश चंद्र ने बताया कि मौसम में बदलाव का असर खेतों में खड़ी धान की फसल पर भी पड़ सकता है। उनके अनुसार लगातार उमस और नमी रहने से धान की फसल में पत्ता लपेट सहित विभिन्न रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है। किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। पत्तियों पर किसी तरह के धब्बे, रंग में बदलाव या बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेने को कहा गया है।
पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह
डॉ. जितेंद्र गिल ने लोगों को मौसम के अनुरूप सावधानी बरतने की सलाह दी है। उमस में शरीर में पानी की कमी न होने दें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। बाहर से आने के तुरंत बाद ठंडा पानी पीने से बचें। खांसी, जुकाम या बुखार होने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से जांच करवाएं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों की तबीयत खराब होने पर लापरवाही न बरतने की सलाह दी गई है।