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Bahraich News: फिर तपने लगी जेठ की दोपहरी, घरों से निकलना दूभर
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- विगत दिनों हुई बारिश के बाद धान की नर्सरी डालने में जुटे किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। विगत दिनों हुई बारिश के बाद निकलने वाली चिलचिलाती धूप ने उमस बढ़ा दी है। वहीं जेठ की तपती दोपहरी में घरों से निकलना दूभर हो गया है। इनसे बेपरवाह किसान विगत दिनों हुई बारिश के बाद धान की नर्सरी डालने में जुट गए हैं।
विगत दिनों हुई बारिश के बाद जगह-जगह कीचड़ व जलभराव के कारण लोगों को भीषण उमस भरी गर्मी से जूझना पड़ रहा है। वहीं सुबह चिलचिलाती धूप ने लोगों को घरों में दुबकने को मजबूर कर दिया है। वहीं सहालग के दौर में मांगलिक आयोजनों की तैयारियों में भी बाधा आ रही हैं। ऐसे में गर्मी से बेहाल लोग राहत तलाश रहे हैं। इन सबके बीच मौसम से बेपरवाह किसान विगत दिनों हुई बारिश के बाद धान की नर्सरी डालने में जुट गए हैं। किसान चिलचिलाती धूप व उमस के बीच खेत की जोताई व सिंचाई करने के साथ ही धान की बेरन डालने में जुटा है। उसे उम्मीद है कि धान की नर्सरी तैयार हुई तो आषाढ़ में बरसात शुरू होने के साथ ही वह धान की रोपाई कर बेहतर पैदावार ले सकेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। विगत दिनों हुई बारिश के बाद निकलने वाली चिलचिलाती धूप ने उमस बढ़ा दी है। वहीं जेठ की तपती दोपहरी में घरों से निकलना दूभर हो गया है। इनसे बेपरवाह किसान विगत दिनों हुई बारिश के बाद धान की नर्सरी डालने में जुट गए हैं।
विगत दिनों हुई बारिश के बाद जगह-जगह कीचड़ व जलभराव के कारण लोगों को भीषण उमस भरी गर्मी से जूझना पड़ रहा है। वहीं सुबह चिलचिलाती धूप ने लोगों को घरों में दुबकने को मजबूर कर दिया है। वहीं सहालग के दौर में मांगलिक आयोजनों की तैयारियों में भी बाधा आ रही हैं। ऐसे में गर्मी से बेहाल लोग राहत तलाश रहे हैं। इन सबके बीच मौसम से बेपरवाह किसान विगत दिनों हुई बारिश के बाद धान की नर्सरी डालने में जुट गए हैं। किसान चिलचिलाती धूप व उमस के बीच खेत की जोताई व सिंचाई करने के साथ ही धान की बेरन डालने में जुटा है। उसे उम्मीद है कि धान की नर्सरी तैयार हुई तो आषाढ़ में बरसात शुरू होने के साथ ही वह धान की रोपाई कर बेहतर पैदावार ले सकेगा।
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