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आंगन में बैठे बालक पर तेंदुए ने किया हमला, मां ने संघर्ष कर जबड़े से छीना
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बहराइच। कतर्नियाघाट रेंज के कुरकुरी कुंआ चहलवा गांव निवासी एक ग्रामीण के घर के आंगन में उसका बेटा शाम को खेल रहा था। तभी तेंदुए ने घर में घुसकर बालक पर झपट्टा मारा। बच्चे की चीख सुनकर दौड़ी मां तेंदुए से भिड़ गई। उसने संघर्ष करते हुए बेटे को तेंदुए के जबड़े से छीन लिया। इसी बीच गांव के लोग भी हांका लगाते हुए मौके पर पहुंच गये। इस पर तेंदुआ जंगल की ओर भाग गया। घायल बालक का पीएचसी में भर्ती कराया गया है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के कतर्नियाघाट रेंज अंतर्गत कुरकुरी कुंआ चहलवा गांव निवासी अच्छेलाल का सात वर्षीय पुत्र अंकुर शुक्रवार शाम को साढ़े सात बजे के आसपास आंगन में खेल रहा था। तभी जंगल से निकलकर एक तेंदुआ दबे पांव घर के अंदर घुस गया। कुछ दूरी पर बरामदे में अंकुर की मां सावित्री खाना बना रही थी। इसी दौरान तेंदुए ने बालक पर हमला कर उसे जबड़े में कसने की कोशिश की।
बालक की चीख सुनकर मां आंगन की ओर दौड़ी लेकिन तेंदुआ देखकर पल भर के लिए सहम गई। लेकिन दूसरे ही क्षण उसने बहादुरी दिखाते हुए पास ही पड़े डंडे से तेंदुए पर ताबड़तोड़ हमला बोल दिया। कड़े संघर्ष के बाद उसने अपने बेटे को तेंदुए के जबड़े से छीन लिया। अंकुर के सिर और गले में जख्म हैं। मां की चीख पुकार सुनकर आस-पड़ोस व गांव के लोग हांका लगाते हुए दौड़े।
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शोर सुनकर तेंदुआ उल्टे पांव जंगल की ओर भाग निकला। तत्काल घटना की सूचना रेंज कार्यालय को दी गई। वन दरोगा मयंक पांडेय ने टीम के साथ मौके पर पहुंचकर तेंदुए के हमले की पुष्टि की है। सावित्री ने जिस तरह की बहादुरी दिखाकर अपने बेटे को बचाया उसकी पूरे क्षेत्र में चर्चा है। इस बीच क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है और ग्रामीणों को सजग रहने के निर्देश दिए गये हैं।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के कतर्नियाघाट रेंज अंतर्गत कुरकुरी कुंआ चहलवा गांव निवासी अच्छेलाल का सात वर्षीय पुत्र अंकुर शुक्रवार शाम को साढ़े सात बजे के आसपास आंगन में खेल रहा था। तभी जंगल से निकलकर एक तेंदुआ दबे पांव घर के अंदर घुस गया। कुछ दूरी पर बरामदे में अंकुर की मां सावित्री खाना बना रही थी। इसी दौरान तेंदुए ने बालक पर हमला कर उसे जबड़े में कसने की कोशिश की।
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बालक की चीख सुनकर मां आंगन की ओर दौड़ी लेकिन तेंदुआ देखकर पल भर के लिए सहम गई। लेकिन दूसरे ही क्षण उसने बहादुरी दिखाते हुए पास ही पड़े डंडे से तेंदुए पर ताबड़तोड़ हमला बोल दिया। कड़े संघर्ष के बाद उसने अपने बेटे को तेंदुए के जबड़े से छीन लिया। अंकुर के सिर और गले में जख्म हैं। मां की चीख पुकार सुनकर आस-पड़ोस व गांव के लोग हांका लगाते हुए दौड़े।
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शोर सुनकर तेंदुआ उल्टे पांव जंगल की ओर भाग निकला। तत्काल घटना की सूचना रेंज कार्यालय को दी गई। वन दरोगा मयंक पांडेय ने टीम के साथ मौके पर पहुंचकर तेंदुए के हमले की पुष्टि की है। सावित्री ने जिस तरह की बहादुरी दिखाकर अपने बेटे को बचाया उसकी पूरे क्षेत्र में चर्चा है। इस बीच क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है और ग्रामीणों को सजग रहने के निर्देश दिए गये हैं।