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खतरे के निशान पर जलस्तर, किसानों की नींद उड़ी

Fri, 12 Aug 2022 11:36 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 12 Aug 2022 11:36 PM IST
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Water level at danger mark, farmers sleep
यमुना का जलस्तर बढ़ने के बाद बागपत के गौरीपुर जवाहरनगर और निवाड़ा गांव के किसानों की डूबी फसल। - फोटो : BAGHPAT
बागपत। यमुना का जलस्तर बढ़कर खतरे के निशान पर पहुंच गया है, जिससे यमुना किनारे खेती करने वाले किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। बागपत, काठा, खेड़ा इस्लामपुर, फैजपुर निनाना, कोताना आदि गांवों में यमुना खादर में करीब एक हजार बीघा में सब्जी की फसल डूबने से बर्बाद हो गई है। चारे की फसल भी डूब गई है। यमुना में अभी शनिवार तक पानी बढ़ेगा, जिससे वह आबादी के पास तक पहुंच सकता है।
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पहाड़ों पर बारिश के कारण हथिनीकुंड बैराज से बृहस्पतिवार को 15 बार में 26 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इनमें सबसे ज्यादा सवा दो लाख क्यूसेक पानी दोपहर को दो व तीन बजे छोड़ा गया था। यमुना में बृहस्पतिवार सुबह से छोड़ा गया पानी शुक्रवार दोपहर को पहुंचना शुरू हो गया। जिससे यमुना में जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंच गया।
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यमुना खादर में उगाई गई घीया, तोरई, सीताफल, लोभिया, मूली की फसलें डूबने से बर्बाद हो गईं। यमुना खादर में करीब 300 किसानों की एक हजार बीघा से ज्यादा फसल खराब हुई है। इसके अलावा ज्वार व बाजरा की फसल भी डूब गई। किसानों ने बताया कि अगर जल्द पानी कम हो जाता है, तो ज्वार व बाजरा की फसल बर्बाद होने से बच जाएगी।
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यमुना में अभी जिस तरह से जलस्तर बढ़ रहा है, उससे सब्जी की काफी फसल बर्बाद होती दिख रही है। इस कारण ही टांडा, बदरखा, शबगा, जागोस, कोताना, खेड़ा इस्लामपुर, सुल्तानपुर हटाना, नैथला, फैजपुर निनाना, निवाड़ा, सिसाना, बागपत, काठा, पाली, साकरौद में परेशानी बढ़ सकती है।
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इन किसानों की डूबी फसल
यमुना का जलस्तर बढ़ने से बागपत के किसान शकील की बाजरा व ज्वार की 12 बीघा, शौकीन की 10 बीघा सीताफल, लोकी की 10 बीघा, जयकिशन की 10 बीघा में लोकी, हरिकिशन की 15 बीघा में लोकी, हाजी इस्लाम की 30 बीघा में मूली व 40 बीघा में लोभिया, हाजी मोमीन की 15 बीघा में मूली, बिजेंद्र की 10 बीघा में सीताफल, निसार की 12 बीघा में मक्का, इसकी की दस बीघा में लोकी, शौकीन की 10 बीघा में लोकी की फसल डूबने से खराब हो गई। इनके अलावा फैजपुर निनाना में सुभाष कश्यप की छह बीघा में पालक, चैनपाल की पांच बीघा में सरसों, सुभाष जोगी की नौ बीघा में सरसों, जगमाल की चार बीघा में सरसों, नीरज की तीन बीघा में लोकी, राहुल पंडित की नौ बीघा में लोकी, नरेश कश्यप की पांच बीघा में सरसों की फसल डूब गई। इनके अलावा भी अन्य गांवों में एक हजार बीघा में किसानों की फसल डूब गई।
लाखों का हुआ नुकसान
- यमुना नदी में 20 बीघा जमीन पर लोकी व सीताफल की फसल उगाई थी। जिसके डूबने से फसल बर्बाद हो गई है। इससे लाखों रुपये का नुकसान होगा। शौकीन, किसान
फसल के लिए रुपये लिए थे उधार
यमुना खादर में जमीन लेकर 15 बीघा में मूली की फसल उगाई थी। इसके लिए रुपये उधार लिए थे, लेकिन यमुना में पानी आने से फसल बर्बाद हो गई। फसल पूरी डूबने से अब मूली खराब हो जाएगी। हाजी मोमीन, किसान

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कोट...
यमुना का जलस्तर बढ़ रहा है, जिससे बाढ़ चौकियों से नजर रखी जा रही है। इसके लिए अधिकारी भी नियमित यमुना किनारे जाकर निरीक्षण कर रहे हैं। किसानों से कहा जा रहा है कि वह यमुना में फिलहाल नहीं जाए। - राजकमल यादव, जिलाधिकारी
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