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Baghpat News: बागपत में कभी चेहरों को तरजीह तो अब पार्टियों पर भरोसा ज्यादा

Wed, 20 Mar 2024 01:34 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 20 Mar 2024 01:34 AM IST
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In Baghpat, once there was preference for faces, now there is more trust in parties.
अंकित चौहान
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बागपत। यहां वोटरों का मिजाज पिछले कई चुनाव से बदलता जा रहा है। यही कारण है कि बागपत लोकसभा सीट पर वोटर कभी चेहरों को तरजीह देते थे। मगर अब चेहरों से ज्यादा पार्टी पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं। यहां पिछले कई लोकसभा व विधानसभा चुनावों में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है।
बागपत सीट से पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह पहली बार 1977 में जनता पार्टी से चुनाव लड़े थे और उनको 62 प्रतिशत वोट देकर लोगों ने जीत दिलाई थी। इसके बाद वर्ष 1980 में चेहरा वही चौधरी चरण सिंह रहे, मगर उनकी पार्टी लोकदल हो गई। तब भी उनको वोटरों ने 64 प्रतिशत वोट देकर जीत दिलाई। वह 1984 में भी लोकदल से चुनाव लड़कर 53 प्रतिशत वोट लेकर जीते जबकि अन्य वोट प्रतिशत में करीब 15 प्रत्याशी रहे।
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इसके बाद बागपत सीट पर 1989 में उनके बेटे चौधरी अजित सिंह ने जनता दल से किस्मत आजमाई और उनको 69 प्रतिशत वोट मिले। वह 1991 में भी जनता दल से चुनाव में उतरकर करीब 60 प्रतिशत वोट लेकर जीते। 1996 में कांग्रेस से अजित सिंह ने चुनाव लड़ा और 52 प्रतिशत वोट मिलने पर जीते तो बाकी वोट अन्य 29 प्रत्याशियों के पास गया।
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इस तरह अधिकतर बार चौधरी चरण सिंह व चौधरी अजित सिंह की पार्टी बदलती रही और उनके सामने हमेशा कांग्रेस के टिकट पर प्रत्याशियों के चेहरे बदलते रहे। इसके बावजूद वोटरों ने चरण सिंह और अजित सिंह का चेहरा देखकर वोट दिया। इसके बाद भी 1999 से 2009 तक यहां अपनी पार्टी बनाकर चुनावी मैदान में उतरने पर अजित सिंह को जीत मिलती रही।
पिछले कई चुनावों में वोटरों का बदला मिजाज
बागपत में 2012 के विधानसभा चुनाव से वोटरों का मिजाज बदलना शुरू हो गया था। मतदाताओं पहले अधिकतर तीनों विधानसभा सीटों पर रालोद के विधायक बनाए, मगर 2012 में पहली बार दो सीटों बागपत व बड़ौत पर बसपा के विधायक बनाए तो रालोद एक सीट छपरौली तक सिमट गया।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भी चेहरे की जगह पार्टी को तरजीह देते हुए भाजपा को बंपर वोट मिले और डॉ. सत्यपाल सिंह सांसद बने। इस तरह ही 2017 के विधानसभा चुनाव में दो सीटों बागपत व बड़ौत पर भाजपा के विधायक बने और रालोद फिर छपरौली तक सिमट गया। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा के नाम पर डॉ. सत्यपाल सिंह को वोट मिला।
बागपत लोकसभा सीट से अभी तक बने सांसद
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वर्ष नाम पार्टी
1967 रघुवीर सिंह शास्त्री जनसंघ
1971 रामचंद्र विकल कांग्रेस
1977 चौधरी चरण सिंह जनता पार्टी
1980 चौधरी चरण सिंह लोकदल
1984 चौधरी चरण सिंह लोकदल
1989 चौधरी अजित सिंह जनता दल
1991 चौधरी अजित सिंह जनता दल
1996 चौधरी अजित सिंह कांग्रेस
1997 चौधरी अजित सिंह निर्दलीय
1998 सोमपाल शास्त्री भाजपा
1999 चौधरी अजित सिंह राष्ट्रीय लोकदल
2004 चौधरी अजित सिंह राष्ट्रीय लोकदल
2009 चौधरी अजित सिंह राष्ट्रीय लोकदल
2014 सत्यपाल सिंह भाजपा
2019 सत्यपाल सिंह भाजपा
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