{"_id":"5e31cbb58ebc3e4b5b6f5593","slug":"dharm-baraut-news-mrt4662487192","type":"story","status":"publish","title_hn":"दरवाजे पर आए भूखे प्राणी को कभी दुत्कारना नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दरवाजे पर आए भूखे प्राणी को कभी दुत्कारना नहीं
विज्ञापन
दरवाजे पर आए भूखे प्राणी को कभी दुत्कारना नहीं
बड़ौत। परम पुज्य उपाध्याय श्री 108 गुप्ति सागर जी महा मुनिराज ने कहा यदि कभी कोई तुम्हारे दरवाजे पर भूखा प्राणी आए तो कभी उसको दुतकाराना नहीं, बल्कि उसको आदर से भोजन कराना, ऐसा करने से आपके घर में कभी भोजन की कमी नहीं होगी। जो प्राणि साधु संतों को आहार देता है, वह पूरे जीवन कभी भूखा नहीं रहता है।
बुधवार को पंच कल्याणक महोत्सव में आयोजित धर्मसभा में उपाध्याय श्री ने कहा कर्म की सत्ता धर्म की सत्ता से बड़ी होती है। कर्म सिद्धांत पर भरोसा करो, क्योंकि कर्म ही ईमानदार होते हैं। आपके अच्छे बुरे कर्मों का एक एक पल का हिसाब होता है। जब समय तुम्हारे अनुकूल होगा तो गहरी रात में भी उजाला दिखेगा। पाप का उदय होगा तो दिन में भी तारे नजर आएंगे। समय का खेल निराला है, इसीलिए पाओ तो गुमान मत करो, खाओ तो गम मत करो। मुनि श्री ने कहा संतोष रखना सीखो, प्राप्त को पर्याप्त मानो, प्रकृति ने पेट भरने के लिए भरपूर क्षमता मनुष्य के लिए की है। मनुष्य उससे संतुष्ट नही है। आज हर मनुष्य पेट नहीं पेटी पर लगा है। पेटी भरने के चक्कर में खुद भूखा प्यासा रहता है। मनुष्य को आज संतोष रहा ही नहीं। वर्तमान में मनुष्य उसके पीछा भाग रहा है, जो उसके पास नहीं है। अतीत की स्मृति में भविष्य की कल्पना में जी रहा है। वर्तमान में जीना भूलता जा रहा है, इसीलिए आज मनुष्य दुखी होता जा रहा है।
मुनि श्री ने सुखी रहने के मंत्र बताते हुए कहा कि भूतकाल को डस्टबिन, भविष्य को नोटिस बोर्ड और वर्तमान को टेबल समझो। अगर ऐसा सोचकर चलोगे तो जीवन आबाद रहेगा, धर्म सभा में सुख माल चंद जैन, अनिल कमल, आनंद, अमित, पवन, वीरेंद्र, पिंटी, प्रवीण, गौरव, अजय, सुनील, सिद्धार्थ, कृष्णा, अंजू, दीप, शालिनी, अलका, सुमन, नेहा, सुरभि आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
बड़ौत। परम पुज्य उपाध्याय श्री 108 गुप्ति सागर जी महा मुनिराज ने कहा यदि कभी कोई तुम्हारे दरवाजे पर भूखा प्राणी आए तो कभी उसको दुतकाराना नहीं, बल्कि उसको आदर से भोजन कराना, ऐसा करने से आपके घर में कभी भोजन की कमी नहीं होगी। जो प्राणि साधु संतों को आहार देता है, वह पूरे जीवन कभी भूखा नहीं रहता है।
बुधवार को पंच कल्याणक महोत्सव में आयोजित धर्मसभा में उपाध्याय श्री ने कहा कर्म की सत्ता धर्म की सत्ता से बड़ी होती है। कर्म सिद्धांत पर भरोसा करो, क्योंकि कर्म ही ईमानदार होते हैं। आपके अच्छे बुरे कर्मों का एक एक पल का हिसाब होता है। जब समय तुम्हारे अनुकूल होगा तो गहरी रात में भी उजाला दिखेगा। पाप का उदय होगा तो दिन में भी तारे नजर आएंगे। समय का खेल निराला है, इसीलिए पाओ तो गुमान मत करो, खाओ तो गम मत करो। मुनि श्री ने कहा संतोष रखना सीखो, प्राप्त को पर्याप्त मानो, प्रकृति ने पेट भरने के लिए भरपूर क्षमता मनुष्य के लिए की है। मनुष्य उससे संतुष्ट नही है। आज हर मनुष्य पेट नहीं पेटी पर लगा है। पेटी भरने के चक्कर में खुद भूखा प्यासा रहता है। मनुष्य को आज संतोष रहा ही नहीं। वर्तमान में मनुष्य उसके पीछा भाग रहा है, जो उसके पास नहीं है। अतीत की स्मृति में भविष्य की कल्पना में जी रहा है। वर्तमान में जीना भूलता जा रहा है, इसीलिए आज मनुष्य दुखी होता जा रहा है।
विज्ञापन
मुनि श्री ने सुखी रहने के मंत्र बताते हुए कहा कि भूतकाल को डस्टबिन, भविष्य को नोटिस बोर्ड और वर्तमान को टेबल समझो। अगर ऐसा सोचकर चलोगे तो जीवन आबाद रहेगा, धर्म सभा में सुख माल चंद जैन, अनिल कमल, आनंद, अमित, पवन, वीरेंद्र, पिंटी, प्रवीण, गौरव, अजय, सुनील, सिद्धार्थ, कृष्णा, अंजू, दीप, शालिनी, अलका, सुमन, नेहा, सुरभि आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
विज्ञापन