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सपा नेता के रूप में है संत कुमार की पहचान
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Thu, 18 Jan 2018 12:27 AM IST
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कानपुर में 96 करोड़ रुपये के पुराने नोटों के साथ पकड़े गए मनी चेंजर गिराह में बुढ़सैनी गांव का संत कुमार यादव भी शामिल है। इलाके में उसकी पहचान सपा नेता के रूप में है। दस साल पहले एक कार्यक्रम पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बुलाकर चर्चाओं में आया था। उस समय अखिलेश यादव कन्नौज से सांसद थे। कानपुर में उसकी गिरफ्तारी के बाद उसके गांव और इलाके में उसी की चर्चा होती रही।
संत कुमार गांव बुढ़सैनी का रहने वाला है और उसके पिता बाबूराम यादव का निधन हो चुका है। घर पर मां भीमकौर और भाई सतीश है, जबकि बड़ा भाई राजेंद्र नोएडा के छजारसी में रहता है। संत खुद अविवाहित है।
करीब 15 साल पहले वह घर से खिलाड़ी बनने के लिए लखनऊ चला गया था। इस दौरान वह सपा दफ्तर पर आने जाने लगा। इस बीच उसकी सपा नेताओं से जान पहचान होने लगी। नेशनल स्तर तक दौड़ में भाग ले चुके संत कुमार की पहचान गांव में अखिलेश यादव के करीबी लोगों में है।
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वर्ष 2007-08 में बालैनी के एक कॉलेज में उसने वेट लिफ्टिंग की प्रतियोगिता कराई थी, इसमें बतौर मुख्य अतिथि कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव को बुलाया था। समारोह के बाद अखिलेश यादव को संत कुमार यादव अपने घर भी ले गया था।
प्रदेश में सपा की सरकार बनने और अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद संत कुमार यादव लखनऊ के सपा कार्यालय पर भी नजर आने लगा और सपा के नेता के तौर पर उसकी पहचान बनती गई।
ग्रामीणों के बीच वह खुद को अखिलेश यादव का बेहद करीबी होने की बातें करता था। सपा जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी का कहना है कि जिले में संत कुमार यादव के पास पार्टी का कोई पद नहीं था, लेकिन वह लखनऊ में वह काफी सक्रिय था। अक्सर पार्टी कार्यालय पर उससे मुलाकात हो जाती थी। बागपत से तो वह पार्टी का साधारण सदस्य भी नहीं था।
क्या है मामला
कानपुर में एनआईए, क्राइम ब्रांच और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते होटल और एक बिल्डर के घर से मनीचेंजर गिरोह के 15 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से करीब 96 करोड़ रुपये के पुराने नोट मिले हैं।
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संत कुमार गांव बुढ़सैनी का रहने वाला है और उसके पिता बाबूराम यादव का निधन हो चुका है। घर पर मां भीमकौर और भाई सतीश है, जबकि बड़ा भाई राजेंद्र नोएडा के छजारसी में रहता है। संत खुद अविवाहित है।
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करीब 15 साल पहले वह घर से खिलाड़ी बनने के लिए लखनऊ चला गया था। इस दौरान वह सपा दफ्तर पर आने जाने लगा। इस बीच उसकी सपा नेताओं से जान पहचान होने लगी। नेशनल स्तर तक दौड़ में भाग ले चुके संत कुमार की पहचान गांव में अखिलेश यादव के करीबी लोगों में है।
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वर्ष 2007-08 में बालैनी के एक कॉलेज में उसने वेट लिफ्टिंग की प्रतियोगिता कराई थी, इसमें बतौर मुख्य अतिथि कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव को बुलाया था। समारोह के बाद अखिलेश यादव को संत कुमार यादव अपने घर भी ले गया था।
प्रदेश में सपा की सरकार बनने और अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद संत कुमार यादव लखनऊ के सपा कार्यालय पर भी नजर आने लगा और सपा के नेता के तौर पर उसकी पहचान बनती गई।
ग्रामीणों के बीच वह खुद को अखिलेश यादव का बेहद करीबी होने की बातें करता था। सपा जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी का कहना है कि जिले में संत कुमार यादव के पास पार्टी का कोई पद नहीं था, लेकिन वह लखनऊ में वह काफी सक्रिय था। अक्सर पार्टी कार्यालय पर उससे मुलाकात हो जाती थी। बागपत से तो वह पार्टी का साधारण सदस्य भी नहीं था।
क्या है मामला
कानपुर में एनआईए, क्राइम ब्रांच और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते होटल और एक बिल्डर के घर से मनीचेंजर गिरोह के 15 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से करीब 96 करोड़ रुपये के पुराने नोट मिले हैं।