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निवाड़ा और गढ़ मिर्रकपुर के किसान आमने-सामने
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Wed, 11 Oct 2017 01:27 AM IST
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हंगामा के दौरान यमुना की ओर से आते निवाड़ा के किसान।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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यमुना खादर की जमीन को लेकर निवाड़ा और गढ़ मिर्रकपुर गांव के किसान मंगलवार को आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों ने मारपीट, फायरिंग करने का आरोप लगाया।
इतना ही नहीं एक पक्ष का पिता-पुत्र के अपहरण करने का भी आरोप है। उनकी पुलिस से नोकझोंक हुई। उनके बीच तनाव बना हुआ है। निवाड़ा गांव के इखलाक का कहना है कि उनके गांव के किसान मंगलवार सुबह यमुना खादर में अपने खेतों में गेहूं की फसल बुआई की तैयारी कर रहे थे।
इसी दौरान गढ़ मिर्रकपुर गांव के 15-20 किसान पुलिस के साथ उनके खेतों में आए और किसान तैमूर, उनके बेटे नाजिम के अलावा उमरा और साबर अली पर हमला कर दिया। आरोपी किसान फायरिंग कर किसान तैमूर, नाजिम और एक ट्रैक्टर जबरन साथ ले गए। शोर शराबा होने पर काफी लोग इकट्ठे हो गए।
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उनको देखकर आरोपियों ने पिता-पुत्र को तो छोड़ दिया, लेकिन अपने साथ उनका ट्रैक्टर लेकर चले गए । उसको निवाड़ा चौकी में खड़ा कर दिया। दूसरी ओर गढ़ मिर्रकपुर गांव के किसान राज कुमार का कहना है कि वह अपने खेत में काम कर रहा था। विपक्षियों ने उसके पास पहुंचकर मारपीट कर फायरिंग की और अपना ट्रैक्टर छोड़कर चले गए।
किसानों की पुलिस के साथ काफी नोकझोंक हुई। पुलिस मामले की जांच में लगी है। निवाड़ा चौकी इंचार्ज निरंजन सिरोही का कहना है कि किसानों में विवाद हुआ है। वहीं एएसपी अजय कुमार सिंह ने मामले की जानकारी होने से इंकार किया है।
हरियाणा पुलिस अपने किसानों का लेती है पक्ष
बागपत। निवाड़ा के किसानों का कहना है कि हरियाणा पुलिस अपने किसानों का पक्ष लेते हैं। इसी का ही विपक्षी फायदा उठा रहे है। पीड़ित किसानों ने हरियाणा पुलिस पर बदसलूकी करने का आरोप लगाया है।
उधर, पुलिसकर्मियों का कहना है कि उन पर लगाए आरोप गलत है। उधर, इखलाक का कहना है कि इस मामले में बागपत के एक अफसर का उसके पास फोन आया । आरोप है कि अधिकारी ने फोन पर उल्टा-सीधा बोला है।
करीब चार दशकों से चल रहा विवाद
बागपत। यूपी-हरियाणा के किसानों के बीच पिछले चार दशक से विवाद चल रहा है। वर्ष 1978 में तत्कालीन गृहमंत्री उमा शंकर दीक्षित ने जमीन की पैमाईश कराई थी और पत्थर लगवाए गए थे। जो दीक्षित अवार्ड के नाम से जानी जाती है। इसके तहत यमुना की धार के साथ किसानों की जमीन नहीं बदलेगी।
पहले भी हो चुका है झगड़ा
बागपत। निवाड़ा गांव के किसानों के साथ यह पहली बार ही विवाद नहीं हुआ। इससे पहले कई बार हरियाणा के किसानों के साथ झगड़ा होता है। अधिकांश झगड़ा गेहूं की फसल बुआई और कटाई के समय होता है।
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इतना ही नहीं एक पक्ष का पिता-पुत्र के अपहरण करने का भी आरोप है। उनकी पुलिस से नोकझोंक हुई। उनके बीच तनाव बना हुआ है। निवाड़ा गांव के इखलाक का कहना है कि उनके गांव के किसान मंगलवार सुबह यमुना खादर में अपने खेतों में गेहूं की फसल बुआई की तैयारी कर रहे थे।
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इसी दौरान गढ़ मिर्रकपुर गांव के 15-20 किसान पुलिस के साथ उनके खेतों में आए और किसान तैमूर, उनके बेटे नाजिम के अलावा उमरा और साबर अली पर हमला कर दिया। आरोपी किसान फायरिंग कर किसान तैमूर, नाजिम और एक ट्रैक्टर जबरन साथ ले गए। शोर शराबा होने पर काफी लोग इकट्ठे हो गए।
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उनको देखकर आरोपियों ने पिता-पुत्र को तो छोड़ दिया, लेकिन अपने साथ उनका ट्रैक्टर लेकर चले गए । उसको निवाड़ा चौकी में खड़ा कर दिया। दूसरी ओर गढ़ मिर्रकपुर गांव के किसान राज कुमार का कहना है कि वह अपने खेत में काम कर रहा था। विपक्षियों ने उसके पास पहुंचकर मारपीट कर फायरिंग की और अपना ट्रैक्टर छोड़कर चले गए।
किसानों की पुलिस के साथ काफी नोकझोंक हुई। पुलिस मामले की जांच में लगी है। निवाड़ा चौकी इंचार्ज निरंजन सिरोही का कहना है कि किसानों में विवाद हुआ है। वहीं एएसपी अजय कुमार सिंह ने मामले की जानकारी होने से इंकार किया है।
हरियाणा पुलिस अपने किसानों का लेती है पक्ष
बागपत। निवाड़ा के किसानों का कहना है कि हरियाणा पुलिस अपने किसानों का पक्ष लेते हैं। इसी का ही विपक्षी फायदा उठा रहे है। पीड़ित किसानों ने हरियाणा पुलिस पर बदसलूकी करने का आरोप लगाया है।
उधर, पुलिसकर्मियों का कहना है कि उन पर लगाए आरोप गलत है। उधर, इखलाक का कहना है कि इस मामले में बागपत के एक अफसर का उसके पास फोन आया । आरोप है कि अधिकारी ने फोन पर उल्टा-सीधा बोला है।
करीब चार दशकों से चल रहा विवाद
बागपत। यूपी-हरियाणा के किसानों के बीच पिछले चार दशक से विवाद चल रहा है। वर्ष 1978 में तत्कालीन गृहमंत्री उमा शंकर दीक्षित ने जमीन की पैमाईश कराई थी और पत्थर लगवाए गए थे। जो दीक्षित अवार्ड के नाम से जानी जाती है। इसके तहत यमुना की धार के साथ किसानों की जमीन नहीं बदलेगी।
पहले भी हो चुका है झगड़ा
बागपत। निवाड़ा गांव के किसानों के साथ यह पहली बार ही विवाद नहीं हुआ। इससे पहले कई बार हरियाणा के किसानों के साथ झगड़ा होता है। अधिकांश झगड़ा गेहूं की फसल बुआई और कटाई के समय होता है।