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सजा के फैसले को रखा बरकरार

Wed, 23 Aug 2017 01:11 AM IST
Updated Wed, 23 Aug 2017 01:11 AM IST
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सजा के फैसले को रखा बरकरार
बागपत। दसवीं के छात्र से कुकर्म करने के मामले में पांच साल की सजा के फैसले को एडीजे प्रथम ने बरकरार रखा। बचाव पक्ष ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी।
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छपरौली क्षेत्र के किशोर ने 23 जनवरी 2002 को थाने में दी तहरीर में बताया वह दसवीं का छात्र है। वह 21 जुलाई को गांव में ही अपनी मौसी के घर गया। उनके पड़ोस के दो युवक उसको बहाने से अपने साथ ले गए। उसको एक दुकान में ले गए। वहां पर आरोपियों ने सामूहिक रूप से कुकर्म किया। आरोपी अजहर खान और रिजवान के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ । अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 21 मई 2012 को दोनों आरोपियों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई । आरोपियों ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देकर जिला जज की अदालत में अपील की। मामले की सुनवाई एडीजे प्रथम रमेश चंद दिवाकर ने की। एडीजीसी सुरेंद्र यादव ने बताया निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा गया है।
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