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यमुना नदी में डूबकर मजदूर की मौत, बेटा बचा
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बागपत। पाली गांव के जंगल में यमुना नदी पार कर खेत में मजदूरी करने जा रहे युवक की नदी में डूबकर मौत हो गई जबकि उसके दस साल के बेटे ने बाहर निकलकर जान बचाई। सूचना पर पहुंची पुलिस व गोताखोरों ने गहरे कुंड से मजदूर के शव को बरामद किया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। युवक की मौत से परिवार में कोहराम मचा है।
पाली गांव निवासी बिजेंद्र (34) पुत्र महनती अनुसूचित जाति के परिवार से है। वह मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करता था। शनिवार को दोपहर करीब डेढ़ बजे वह अपने 10 वर्षीय बेटे बादल के साथ यमुना नदी पार खेत में मजदूरी करने के लिए घर से चला । गांव के सामने यमुना नदी पार करने लगा। बेटा उसके पीछे-पीछे चल रहा था। नदी में बीच में जाने के बाद बिजेंद्र अचानक गहरे कुंड में समा गया। पानी में डूबते समय उसने अपने बेटे को वापस भागने को कहा। बेटे ने नदी से बाहर निकल कर जान बचाई और शोर मचा दिया। शोर सुनकर लोगों की भीड़ लग गई। सूचना पर कोतवाली प्रभारी शिव प्रकाश सिंह गोताखोरों को साथ लेकर नदी पर पहुंचे। गोताखोरों ने एक घंटे बाद गहरे कुंड से युवक के शव को बरामद किया। उसकी मौत से परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। सीओ ओमपाल सिंह ने किसानों से अपील की कि जब तक पानी कम नहीं हो जाता, तब तक नदी पार न करें।
बेमौत मर रहे किसान और मजदूर
बागपत। पाली और काठा गांव के किसानों की कई हजार बीघा कृषि भूमि यमुना नदी के पार हरियाणा क्षेत्र में है। हर रोज किसान और मजदूर जान हथेली पर रखकर नदी पार करते हैं। कई बार बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। काठा में नाव पलटने से 19 लोगों की मौत हो गई । पिछले माह काठा में नदी में डूबकर मां और बेटी की मौत हो चुकी है। प्रशासन भी समस्या का समाधान नहीं कर रहा है। क्षेत्र के किसान और मजदूर बेमौत मर रहे हैं।
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काठा में तैयार की जा रही नाव
बागपत। काठा गांव में यमुना नदी किनारे नई नाव तैयार कराई जा रही है। इरशाद ने बताया कि प्रशासन नाव बनवा रहा है, ताकि किसानों को नदी पार पहुंचाया जा सके। जल्दी ही नाव बनकर तैयार हो जाएगा।
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पाली गांव निवासी बिजेंद्र (34) पुत्र महनती अनुसूचित जाति के परिवार से है। वह मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करता था। शनिवार को दोपहर करीब डेढ़ बजे वह अपने 10 वर्षीय बेटे बादल के साथ यमुना नदी पार खेत में मजदूरी करने के लिए घर से चला । गांव के सामने यमुना नदी पार करने लगा। बेटा उसके पीछे-पीछे चल रहा था। नदी में बीच में जाने के बाद बिजेंद्र अचानक गहरे कुंड में समा गया। पानी में डूबते समय उसने अपने बेटे को वापस भागने को कहा। बेटे ने नदी से बाहर निकल कर जान बचाई और शोर मचा दिया। शोर सुनकर लोगों की भीड़ लग गई। सूचना पर कोतवाली प्रभारी शिव प्रकाश सिंह गोताखोरों को साथ लेकर नदी पर पहुंचे। गोताखोरों ने एक घंटे बाद गहरे कुंड से युवक के शव को बरामद किया। उसकी मौत से परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। सीओ ओमपाल सिंह ने किसानों से अपील की कि जब तक पानी कम नहीं हो जाता, तब तक नदी पार न करें।
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बेमौत मर रहे किसान और मजदूर
बागपत। पाली और काठा गांव के किसानों की कई हजार बीघा कृषि भूमि यमुना नदी के पार हरियाणा क्षेत्र में है। हर रोज किसान और मजदूर जान हथेली पर रखकर नदी पार करते हैं। कई बार बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। काठा में नाव पलटने से 19 लोगों की मौत हो गई । पिछले माह काठा में नदी में डूबकर मां और बेटी की मौत हो चुकी है। प्रशासन भी समस्या का समाधान नहीं कर रहा है। क्षेत्र के किसान और मजदूर बेमौत मर रहे हैं।
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काठा में तैयार की जा रही नाव
बागपत। काठा गांव में यमुना नदी किनारे नई नाव तैयार कराई जा रही है। इरशाद ने बताया कि प्रशासन नाव बनवा रहा है, ताकि किसानों को नदी पार पहुंचाया जा सके। जल्दी ही नाव बनकर तैयार हो जाएगा।