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ऑफिस को ही बनाया घर, बच्चे पूछते हैं पापा कब आओगे

Sat, 18 Apr 2020 10:36 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 18 Apr 2020 10:36 PM IST
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Built the house for office, children ask when father will come
संकट के सिपाही: डॉ विभाष राजपूत, सीएचसी अधिक्षक बागपत। - फोटो : BAGHPAT
बागपत। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए डॉक्टर मोर्चे पर डटे हैं। इनमें कई ऐसे हैं जो सबसे आगे आकर खुद काम कर रहे हैं और अपनी टीम के प्रेरणा बन रहे हैं। सीएचसी बागपत के अधीक्षक डॉ विभाष राजपूत ने नर सेवा को ही नारायण सेवा बना लिया है। हालात यह है कि अब कार्यालय ही उनका घर बना गया है। वह बताते हैं कि उनका परिवार दिल्ली के रोहिणी में रहता है। घर में मां कुमकुम रानी के अलावा पत्नी सीमा व बेटी गौरी (12), बेटा अक्षित (8) है। उनकी पत्नी दिल्ली के आचार्य भिक्षु अस्पताल में कार्यरत हैं। बच्चों के पालन की जिम्मेदारी उनकी मां पर है। पहले सप्ताह में एक बार बच्चों से मिलने के लिए घर जाते थे, मगर जब से कोरोना वायरस की महामारी फैली है, वह घर नहीं गए है। 40 दिन से अपने कार्यालय को ही घर बना लिया है। बच्चों से वीडियो कॉल से बात होती है। कॉल शुरू होते ही बच्चों का पहला सवाल यही होता है कि पापा घर कब आओगे। कहते हैं कि ईश्वर ने उन्हें व अपनी पत्नी को सेवा का अवसर दिया है, वह अपने कर्तव्य और जिम्मेदारी पर खरा उतरना चाहते है।
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