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Baghpat: माता महाकाली के दरबार में पहुंचकर होते हैं कष्ट दूर, अष्टमी को आहूति देने उमड़ती है भीड़

Sun, 15 Oct 2023 12:05 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 15 Oct 2023 12:05 AM IST
सार

बागपत जनपद का शालीग्राम मंदिर दूर-दूर विख्यात है। मन्नतें पूरी होने पर लोग मंदिर में भजन, कीर्तन कराते हैं। प्राचीन शालीग्राम मंदिर में माता महाकाली विराजमान हैं।

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Baghpat: Sufferings go away after reaching the court of Mother Mahakali
शालीग्राम मंदिर बागपत - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

बागपत शहर का शालीग्राम मंदिर दूर-दूर विख्यात है। इस मंदिर में माता महाकली की विशाल प्रतिमा है। मन्नतें पूरी होने पर लोग मंदिर में भजन, कीर्तन कराते हैं। नवरात्र में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती है। अष्टमी में बड़ा यज्ञ होता है, जिसमें आहुतियां देने के लिए भीड़ उमड़ती है।

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शहर में प्राचीन शालीग्राम मंदिर है। इसमें माता महाकाली विराजमान हैं। मंदिर का इतिहास कई सौ साल पुराना है। पहले कच्चे घाट से प्रसिद्ध था। मंदिर से सटकर यमुना बहती थी। इसमें साधु-संत स्नान करने के बाद पूजा-अर्चना करते थे। जैसे-जैसे दौर बदला, वैसे ही मंदिर का जीर्णोद्धार होता गया। 

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मंदिर के संरक्षकों ने माता महाकाली को स्थापित कराया। इसके बाद से मंदिर की दशा बदलनी शुरू हो गई। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती चली गई। सच्चे मन से मन्नते मांगने पर मां ने उसे पूरी कि तो भक्तों ने भजन और कीर्तनों करने शुरू कर दिए। अब आए दिन मंदिर में कीर्तन होते रहते हैं। नवरात्रों की अष्टमी में कई वर्षों से विशाल हवन होता है। इसमें श्रद्धालु भारी संख्या में पहुंचते हैं और माता की आराधना की जाती है।

मंदिर समिति के विशंबर दयाल बताते हैं कि मंदिर का इतिहास तो 600-700 साल पुराना है। पहले मंदिर को कच्चा घाट से जाना जाता था। यमुना मंदिर के पीछे ही बहती थी। साधु तपस्या और योग साधना करते थे। अब शालीग्राम मंदिर के साथ-साथ काली मंदिर से भी विख्यात है। दूर दराज से लोग पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं। अष्टमी पर विशेष पूजा और हवन होता है, जिसका अलग ही महत्व है।

भगवान विष्णु का रूप है शालीग्राम
मंदिर के पुजारी हर्ष शास्त्री बताते हैं कि शालीग्राम भगवान विष्णु का एक रूप है, जिनकी उत्पत्ति एक नदी से हुई थी। प्राचीन कथाओं के अनुसार वृंदा ने भगवान शालीग्राम को श्राप दिया था।

 

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