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Baghpat: 16 साल की लड़की को ले गया युवक, 18 की होने पर कर ली शादी, अब कोर्ट ने दी ये सजा
Wed, 20 May 2026 12:14 AM IST
Mohd Mustakim
अमर उजाला नेटवर्क, बागपत
अमर उजाला नेटवर्क, बागपत
Published by: Mohd Mustakim
Updated Wed, 20 May 2026 12:14 AM IST
सार
दोघट में साल 2020 में ये घटना हुई थी। बालिग होने पर पीड़िता ने आरोपी से शादी कर ली थी। फिर न्यायालय में बयान भी बदल दिए थे। कोर्ट ने अपहरण, दुष्कर्म व पॉक्सो में तो दोषमुक्त कर दिया, मगर नाबालिग को ले जाने का दोषी मानते हुए सजा सुना दी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
विस्तार
अपर जिला एवं सत्र न्यायालय विशेष पॉक्सो एक्ट के न्यायाधीश संजीव कुमार सिंह ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने का दोषी मानते हुए युवक को आठ महीने की सजा सुनाई। जब युवक पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी, तब पीड़िता नाबालिग थी और उसने बालिग होने पर आरोपी से शादी कर ली थी। शादी के बाद पीड़िता ने न्यायालय में बयान बदल दिए, मगर इसके बाद भी न्यायालय में दोषसिद्ध होने पर उसके पति को सजा सुनाई गई।
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एक व्यक्ति ने वर्ष 2020 में दोघट थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बताया था कि पड़ोसी युवक उसके घर पर आता रहता था, जो उसकी नाबालिग बेटी को अपहरण करके ले गया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद किशोरी को तलाश करके न्यायालय में बयान दर्ज कराए। किशोरी ने तब पुलिस को बयान दिया था कि युवक उसे जबरन कार में डालकर ले गया और उसे नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ दुष्कर्म भी किया। उसने धमकी देने का आरोप भी युवक पर लगाया था।
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पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और किशोरी के बयान के आधार पर दुष्कर्म व धमकी देने की धारा बढ़ाकर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। तब पीड़िता की उम्र 16 साल थी। छह महीने जेल में रहने पर युवक को जमानत मिल गई और दो साल बाद पीड़िता बालिग हुई तो परिजनों ने दोनों की शादी कर दी।
इसके बाद न्यायालय में केस चला तो पीड़िता बयान से मुकर गई और उसने अपनी मर्जी से जाने व दुष्कर्म नहीं किए जाने की बात कही। अब इस मामले में सुनवाई पूरी हुई तो न्यायालय ने आरोपी को अपहरण, दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट में दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने पीड़िता को तब नाबालिग होने के कारण उसे बहला-फुसलाकर ले जाने का उसके पति को दोषी माना।
इसलिए न्यायाधीश संजीव कुमार सिंह ने उसके पति को आठ महीने की सजा सुनाई और दो हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड जमा नहीं करने पर 15 दिन की सजा बढ़ाई जाएगी। वह पहले जितने दिन जेल में रह चुका है, उसको इस सजा में शामिल किया जाएगा। सजा सुनाए जाने के बाद न्यायालय ने पीड़िता के पति को जेल भेज दिया।
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