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पानीपत से मेरठ तक बनेंगे 11 रेलवे स्टेशन
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बागपत। अभी तक सर्वे में उलझी मेरठ-पानीपत रेलवे लाइन पर जल्द ही कार्य शुरू होने की संभावना बन रही है। रेलवे ने पुराने सर्वे के हिसाब से पानीपत से मेरठ तक 11 स्टेशन प्रस्तावित किए हैं। यूपी में शामली के तितरवाड़ा से मेरठ के सरधना तक ही सात स्टेशन प्रस्तावित हैं। केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डा. सत्यपाल सिंह ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से दिल्ली में मुलाकात की। जल्द ही कार्य शुरू कराए जाने का भरोसा दिलाया गया।
मेरठ-पानीपत रेल लाइन पिछले करीब छह दशक से मुद्दा बनती रही है। रेलवे अब तक इस लाइन के दो सर्वे करा चुका है। पहले सर्वे में मेरठ के सरधना से बागपत के टीकरी और शामली के एलम से होते हुए पानीपत तक रेल लाइन जानी थी जबकि दूसरे सर्वे में मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना को भी शामिल किया गया था। बुधवार को केंद्रीय राज्यमंत्री डा. सत्यपाल सिंह ने रेलमंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की। सत्यपाल सिंह ने बताया कि मेरठ-पानीपत रेल लाइन को पुराने सर्वे के हिसाब से ही निकाले जाने का भरोसा दिलाया गया है। इस सर्वे के हिसाब से पानीपत से मेरठ तक 11 स्टेशन बनेेंगे और इन स्टेशन के आसपास के 55 गांव के लोग सीधे रेल लाइन से जुड़ेंगे, इसके अलावा 100 से अधिक गांव के लोगों को लाभ हो सकेगा।
यहां प्रस्तावित किए गए हैं स्टेशन
बागपत। मेरठ के सरधना, हरिया खेड़ा, बागपत के दाहा, टीकरी, शामली के एलम, गंगेरू और तितरवाड़ा में स्टेशन बनेंगे। इसके अलावा पानीपत के बापौली, सिमिया गुजरान, डिवाना और पानीपत में रेलवे स्टेशन का प्रस्ताव है।
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बागपत के इन गांवों को होगा सीधा लाभ
बागपत। टीकरी, बिराल, सूजती, निरपुड़ा, गांगनौली, दोघट, दाहा, पलड़ी, आजमपुर मुलसम, भड़ल, धनौरा, खपराना, मिलाना को लाभ होगा। इसके अलावा आसपास के गांव भी लाभांवित होंगे।
दिल्ली-सहारनपुर रेल लाइन का दोहरीकरण
बागपत। दिल्ली-सहारनपुर रेल लाइन के दोहरीकरण और विद्युतीकरण के कार्य को भी शीघ्र शुरू कराने की मांग रखी गई है।
सर्वे पर 32 करोड़ खर्च, नतीजा सिफर
बागपत। मेरठ-पानीपत रेल लाइन के सर्वे पर रेलवे ने करीब 32 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, लेकिन अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। आरटीआई एक्टिविस्ट शिव कुमार राठी बताते हैं कि दो साल पहले बजट में 1100 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य प्रस्तावित किया गया था, लेकिन अभी तक शुरू नहीं हो सका है।
राजनीतिक मुद्दा भी है रेल लाइन
बागपत। मेरठ-पानीपत रेल लाइन राजनीतिक मुद्दा भी बन चुकी है। मुजफ्फरनगर के लोगों ने बुढ़ाना से रेलवे लाइन को निकाले जाने के लिए हंगामा किया था, जबकि बागपत के टीकरी क्षेत्र के लोग इसे पुराने सर्वे के हिसाब से निकाले जाने की मांग करते आ रहे हैं।
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मेरठ-पानीपत रेल लाइन पिछले करीब छह दशक से मुद्दा बनती रही है। रेलवे अब तक इस लाइन के दो सर्वे करा चुका है। पहले सर्वे में मेरठ के सरधना से बागपत के टीकरी और शामली के एलम से होते हुए पानीपत तक रेल लाइन जानी थी जबकि दूसरे सर्वे में मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना को भी शामिल किया गया था। बुधवार को केंद्रीय राज्यमंत्री डा. सत्यपाल सिंह ने रेलमंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की। सत्यपाल सिंह ने बताया कि मेरठ-पानीपत रेल लाइन को पुराने सर्वे के हिसाब से ही निकाले जाने का भरोसा दिलाया गया है। इस सर्वे के हिसाब से पानीपत से मेरठ तक 11 स्टेशन बनेेंगे और इन स्टेशन के आसपास के 55 गांव के लोग सीधे रेल लाइन से जुड़ेंगे, इसके अलावा 100 से अधिक गांव के लोगों को लाभ हो सकेगा।
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यहां प्रस्तावित किए गए हैं स्टेशन
बागपत। मेरठ के सरधना, हरिया खेड़ा, बागपत के दाहा, टीकरी, शामली के एलम, गंगेरू और तितरवाड़ा में स्टेशन बनेंगे। इसके अलावा पानीपत के बापौली, सिमिया गुजरान, डिवाना और पानीपत में रेलवे स्टेशन का प्रस्ताव है।
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बागपत के इन गांवों को होगा सीधा लाभ
बागपत। टीकरी, बिराल, सूजती, निरपुड़ा, गांगनौली, दोघट, दाहा, पलड़ी, आजमपुर मुलसम, भड़ल, धनौरा, खपराना, मिलाना को लाभ होगा। इसके अलावा आसपास के गांव भी लाभांवित होंगे।
दिल्ली-सहारनपुर रेल लाइन का दोहरीकरण
बागपत। दिल्ली-सहारनपुर रेल लाइन के दोहरीकरण और विद्युतीकरण के कार्य को भी शीघ्र शुरू कराने की मांग रखी गई है।
सर्वे पर 32 करोड़ खर्च, नतीजा सिफर
बागपत। मेरठ-पानीपत रेल लाइन के सर्वे पर रेलवे ने करीब 32 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, लेकिन अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। आरटीआई एक्टिविस्ट शिव कुमार राठी बताते हैं कि दो साल पहले बजट में 1100 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य प्रस्तावित किया गया था, लेकिन अभी तक शुरू नहीं हो सका है।
राजनीतिक मुद्दा भी है रेल लाइन
बागपत। मेरठ-पानीपत रेल लाइन राजनीतिक मुद्दा भी बन चुकी है। मुजफ्फरनगर के लोगों ने बुढ़ाना से रेलवे लाइन को निकाले जाने के लिए हंगामा किया था, जबकि बागपत के टीकरी क्षेत्र के लोग इसे पुराने सर्वे के हिसाब से निकाले जाने की मांग करते आ रहे हैं।