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अशरफाबाद थल के लोग जनसुविधाओं से वंचित
Updated Sun, 04 Mar 2018 01:12 AM IST
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रमाला (बागपत)। कृष्णा नदी के किनारे बसा अशरफाबाद थल गांव के लोग सुविधाओं से वंचित हैं। गांव के हैंडपंप दूषित पानी उगल रहे हैं। जिसे पीकर जानलेवा बीमारियां फैल रही है। शिक्षा के अभाव में अधिकतर बेटियों को कक्षा आठ के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। चिकित्सा और परिवहन की भी कोई व्यवस्था नहीं है।
छह हजार से अधिक आबादी वाले गांव अशरफाबाद थल से सटकर कृष्णा नदी बहती है। यहां सबसे बड़ी समस्या दूषित पेयजल की है। नदी में फैक्ट्रियों का केमिकल युक्त पानी बहने के कारण गांव का भूजल भी दूषित हो गया है। गांव में लगे सरकारी हैंडपंपों के माध्यम से यह दूषित पानी लोगों के घरों तक पहुंच रहा है और ग्रामीण इस दूषित पानी को पीकर गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। गांव में कैंसर जैसी प्राण घातक बीमारियां फैल रही है। वहीं गांव में शासन द्वारा आज तक भी कोई सुख सुविध मुहैय्या नहीं कराई । शिक्षा से लेकर चिकित्सा तक की कोई व्यवस्था नहीं है। गांव में कक्षा आठ के बाद छात्रों को पांच-पांच किलोमीटर दूर किशनपुर बराल या दोघट में पैदल ही पढ़ाई के लिए जाना पड़ता है। इस वजह से बेटियों को कक्षा आठ के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। विभागीय अफसर भी गहरी नींद सोए हुए है। गांव में उप स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। इस कारण मरीजों को बड़ौत जाना पड़ता है और प्राइवेट चिकित्सकों से महंगा इलाज कराना पड़ता है। परिवहन की भी कोई सुविधा नहीं है। दिन छिपने के बाद कोई भी गांव में आता-जाता नहीं है। किशरनपुर बराल रेलवे स्टेशन से रात के समय में लोगों को पैदल ही गांव जाना पड़ता है । इस मार्ग पर अधिकांश लूटपाट की वारदात भी होती रहती हैं।
ग्रामीणों ने स्वयं बनवाया पुल
रमाला। अशरफाबाद थल के किसानों की कृष्णा नदी के दूसरी तरफ भी सैकड़ों बीघा जमीन है। वहीं भगवानपुर नांगल गांव के किसानों की नदी के इस पार जमीन है। दोनों गांव के किसानों को खेतों में जाने के लिए काफी परेशानी होती है। सरकार के नदी पर पुल नहीं बनाने से सैकड़ों लोग परेशान हैं। इसलिए दोनों गांव के लोगों ने स्वयं चंदा एकत्र कर कृष्णा नदी पर 20 साल पहले पुल का निर्माण कराया । इसके बनने से उन्हें काफी राहत मिली, लेकिन प्रशासन ने इस पुल पर आज तक सड़क का निर्माण तक नहीं कराया है। इसको लेकर किसानों में आक्रोश व्याप्त है।
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सरकार नहीं दे रही ध्यान
रमाला। अशरफाबाद थल के ग्राम प्रधान जुल्ला चौधरी ने कहा गांव के लोग जन सुविधाओं से वंचित हैं। गांव में आठवीं से आगे कोई स्कूल नहीं है। उप स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। शुद्ध पेयजल के लिए आज तक टंकी का निर्माण नहीं कराया गया। ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर है। आने-जाने के लिए परिवहन की भी कोई सुविधा नहीं है। सरकार का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। कई बार अधिकारियों से भी मिले, लेकिन कोई सुनवाई नहीं है।
समस्याओं से दिलाई जाए निजात
रमाला। अशरफाबाद थल के ग्रामीण अयूब, मुमताज, काले खां, जाकिर आदि ने कहा हम गुलामी वाला जीवन जी रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल नहीं है। बीमार लोगों के अस्पताल नहीं है। नदी में दूषित पानी के कारण गांव में लकवा, चरम रोग, पेट की बीमारी, हैप्पेटाइटिस बी आदि बीमारियां फैल रही है। सड़कें टूटी पड़ी है। सरकार उन पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। उन्हें इन समस्याओं से निजात दिलाई जाए।
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छह हजार से अधिक आबादी वाले गांव अशरफाबाद थल से सटकर कृष्णा नदी बहती है। यहां सबसे बड़ी समस्या दूषित पेयजल की है। नदी में फैक्ट्रियों का केमिकल युक्त पानी बहने के कारण गांव का भूजल भी दूषित हो गया है। गांव में लगे सरकारी हैंडपंपों के माध्यम से यह दूषित पानी लोगों के घरों तक पहुंच रहा है और ग्रामीण इस दूषित पानी को पीकर गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। गांव में कैंसर जैसी प्राण घातक बीमारियां फैल रही है। वहीं गांव में शासन द्वारा आज तक भी कोई सुख सुविध मुहैय्या नहीं कराई । शिक्षा से लेकर चिकित्सा तक की कोई व्यवस्था नहीं है। गांव में कक्षा आठ के बाद छात्रों को पांच-पांच किलोमीटर दूर किशनपुर बराल या दोघट में पैदल ही पढ़ाई के लिए जाना पड़ता है। इस वजह से बेटियों को कक्षा आठ के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। विभागीय अफसर भी गहरी नींद सोए हुए है। गांव में उप स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। इस कारण मरीजों को बड़ौत जाना पड़ता है और प्राइवेट चिकित्सकों से महंगा इलाज कराना पड़ता है। परिवहन की भी कोई सुविधा नहीं है। दिन छिपने के बाद कोई भी गांव में आता-जाता नहीं है। किशरनपुर बराल रेलवे स्टेशन से रात के समय में लोगों को पैदल ही गांव जाना पड़ता है । इस मार्ग पर अधिकांश लूटपाट की वारदात भी होती रहती हैं।
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ग्रामीणों ने स्वयं बनवाया पुल
रमाला। अशरफाबाद थल के किसानों की कृष्णा नदी के दूसरी तरफ भी सैकड़ों बीघा जमीन है। वहीं भगवानपुर नांगल गांव के किसानों की नदी के इस पार जमीन है। दोनों गांव के किसानों को खेतों में जाने के लिए काफी परेशानी होती है। सरकार के नदी पर पुल नहीं बनाने से सैकड़ों लोग परेशान हैं। इसलिए दोनों गांव के लोगों ने स्वयं चंदा एकत्र कर कृष्णा नदी पर 20 साल पहले पुल का निर्माण कराया । इसके बनने से उन्हें काफी राहत मिली, लेकिन प्रशासन ने इस पुल पर आज तक सड़क का निर्माण तक नहीं कराया है। इसको लेकर किसानों में आक्रोश व्याप्त है।
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सरकार नहीं दे रही ध्यान
रमाला। अशरफाबाद थल के ग्राम प्रधान जुल्ला चौधरी ने कहा गांव के लोग जन सुविधाओं से वंचित हैं। गांव में आठवीं से आगे कोई स्कूल नहीं है। उप स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। शुद्ध पेयजल के लिए आज तक टंकी का निर्माण नहीं कराया गया। ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर है। आने-जाने के लिए परिवहन की भी कोई सुविधा नहीं है। सरकार का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। कई बार अधिकारियों से भी मिले, लेकिन कोई सुनवाई नहीं है।
समस्याओं से दिलाई जाए निजात
रमाला। अशरफाबाद थल के ग्रामीण अयूब, मुमताज, काले खां, जाकिर आदि ने कहा हम गुलामी वाला जीवन जी रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल नहीं है। बीमार लोगों के अस्पताल नहीं है। नदी में दूषित पानी के कारण गांव में लकवा, चरम रोग, पेट की बीमारी, हैप्पेटाइटिस बी आदि बीमारियां फैल रही है। सड़कें टूटी पड़ी है। सरकार उन पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। उन्हें इन समस्याओं से निजात दिलाई जाए।