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पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की
Updated Fri, 23 Mar 2018 01:04 AM IST
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बड़ौत (बागपत) ।
नवरात्रि के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने उपवास रख पांचवीं देवी स्कंदमाता की विशेष पूजा-अर्चना की। मंदिरों में हवन व महिलाओं ने भजन कीर्तनों के आयोजन कि ए।
बृहस्पतिवार को भी मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। पंचवटी मंदिर, रेलवे स्टेशन वैष्णव मंदिर, पंच मुखी मंदिर, ठाकुरद्वारा शिवालय, पट्टी चौधरान शिवालय, विश्वकर्मा मंदिर अन्य मंदिरों में पांचवीं देवी स्कंद माता की विशेष पूजा-अर्चना की और भजन-कीर्तन के आयोजन कि ए । इस अवसर पर रेलवे स्टेशन स्थित वैष्णव मंदिर के पुजारी पंडित आकाश भारद्वाज ने बताया कि देवी का यह स्वरूप नारी शक्ति और मातृ शक्ति का संजीव चरित्र है। स्कंद कुमार की माता होने के कारण इनका नाम स्कंद माता पड़ा। गणेश जी देवी के मानस पुत्र है और कार्तिकेय गर्भ से उत्पन्न हुए। तारकासुर को वरदान था कि वह शंकर जी के शुक्र से पैदा पुत्र द्वारा ही वह मृत्यु को प्राप्त हो सकता है। इसी कारण देवी पार्वती का शंकर जी से मंगल परिणय हुआ। इससे कार्तिकेय पैदा हुए और तारकासुर का वध हुआ।
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नवरात्रि के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने उपवास रख पांचवीं देवी स्कंदमाता की विशेष पूजा-अर्चना की। मंदिरों में हवन व महिलाओं ने भजन कीर्तनों के आयोजन कि ए।
बृहस्पतिवार को भी मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। पंचवटी मंदिर, रेलवे स्टेशन वैष्णव मंदिर, पंच मुखी मंदिर, ठाकुरद्वारा शिवालय, पट्टी चौधरान शिवालय, विश्वकर्मा मंदिर अन्य मंदिरों में पांचवीं देवी स्कंद माता की विशेष पूजा-अर्चना की और भजन-कीर्तन के आयोजन कि ए । इस अवसर पर रेलवे स्टेशन स्थित वैष्णव मंदिर के पुजारी पंडित आकाश भारद्वाज ने बताया कि देवी का यह स्वरूप नारी शक्ति और मातृ शक्ति का संजीव चरित्र है। स्कंद कुमार की माता होने के कारण इनका नाम स्कंद माता पड़ा। गणेश जी देवी के मानस पुत्र है और कार्तिकेय गर्भ से उत्पन्न हुए। तारकासुर को वरदान था कि वह शंकर जी के शुक्र से पैदा पुत्र द्वारा ही वह मृत्यु को प्राप्त हो सकता है। इसी कारण देवी पार्वती का शंकर जी से मंगल परिणय हुआ। इससे कार्तिकेय पैदा हुए और तारकासुर का वध हुआ।
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