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जैन दर्शन का प्राण है अहिंसा : नयन सागर
Updated Tue, 19 Dec 2017 01:06 AM IST
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जैन दर्शन का प्राण है अहिंसा : नयन सागर
बड़ौत (बागपत)। जैन संत उपाध्याय नयन सागर महाराज ने कहा कि अहिंसा जैन दर्शन का प्राण है। जैन दर्शन में अहिंसा की संकल्पना को सर्वोपरि माना गया है।
दिगंबर जैन कालेज में हुई धर्मसभा में उन्होंने कहा कि जैन दर्शन का सौपान अहिंसा की पराकाष्ठा है। वर्तमान समाज में आपसी कटुता ने मानव मस्तिष्क को विकृत बना दिया है। इस विकृत मानसिकता से नकारात्मकता का भाव उत्पन्न होता है। यही नकारात्मकता हिंसा में परिवर्तित हो जाती है। इससे बचने के लिए मन का सरल होना आवश्यक है। अहिंसा मानव मन में करुणा, दयालुता और प्रेम की भावना को उत्पन्न करके मानव जीवन में सरल बनाती है। संसार में सबसे कठिन सरलता ही है। दिगंबर जैन हाईस्कूल एसोसिएशन के संयुक्त सचिव धनेंद्र कुमार जैन ने मंच संचालन किया एवं बारह भावना का पाठ किया।
उन्होंने कहा कि महाराज द्वारा इस पंच कल्याणक के लिए हमारा चयन किये जाने पर हम सभी अभिभूत हैं और हम सभी तन, मन, धन से इस पंचकल्याणक महोत्सव में अपनी महती भूमिका का निर्वाह करते हुए इस आयोजन को सफल बनाने का पूर्ण प्रयास करेंगे। अखिल भारतीय जैन समाज से पधारें विभिन्न संगठनों के राष्ट्रीय पदाधिकारियों का सम्मान दिगंबर जैन हाईस्कूल एसोसिएशन, प्रबंध समिति के पदाधिकारियों और कालेज के प्राचार्य डॉ. वीरेंद्र सिंह द्वारा किया गया। सांय काल गुरू भक्ति के कार्यक्रम हुए।
इस अवसर पर घासीराम जैन, धन कुमार जैन, राकेश कुमार जैन, अरविंद जैन, सुनील कुमार जैन, विमल प्रसाद जैन, सुशील कुमार जैन, रमेश चंद जैन, रविंद कुमार जैन, अजय जैन, प्रदीप जैन, अनुज जैन, सुदेश जैन, पवन जैन, आनंद जैन, कमल जैन, प्रवीण जैन, संजय जैन, मनोज जैन, संदीप जैन, सुभाष चंद जैन, अंजुल जैन, निशा जैन, अंजली जैन, सुुनीता जैन, शिखा जैन, मिनी जैन, डुग्गु जैन, डा. दीपक जैन, डा. अमित जैन, डा. विनोद कश्यप, रूपेन जैन, ऋषभ जैन, सुधीर जैन आदि मौजूद रहे।
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बड़ौत (बागपत)। जैन संत उपाध्याय नयन सागर महाराज ने कहा कि अहिंसा जैन दर्शन का प्राण है। जैन दर्शन में अहिंसा की संकल्पना को सर्वोपरि माना गया है।
दिगंबर जैन कालेज में हुई धर्मसभा में उन्होंने कहा कि जैन दर्शन का सौपान अहिंसा की पराकाष्ठा है। वर्तमान समाज में आपसी कटुता ने मानव मस्तिष्क को विकृत बना दिया है। इस विकृत मानसिकता से नकारात्मकता का भाव उत्पन्न होता है। यही नकारात्मकता हिंसा में परिवर्तित हो जाती है। इससे बचने के लिए मन का सरल होना आवश्यक है। अहिंसा मानव मन में करुणा, दयालुता और प्रेम की भावना को उत्पन्न करके मानव जीवन में सरल बनाती है। संसार में सबसे कठिन सरलता ही है। दिगंबर जैन हाईस्कूल एसोसिएशन के संयुक्त सचिव धनेंद्र कुमार जैन ने मंच संचालन किया एवं बारह भावना का पाठ किया।
उन्होंने कहा कि महाराज द्वारा इस पंच कल्याणक के लिए हमारा चयन किये जाने पर हम सभी अभिभूत हैं और हम सभी तन, मन, धन से इस पंचकल्याणक महोत्सव में अपनी महती भूमिका का निर्वाह करते हुए इस आयोजन को सफल बनाने का पूर्ण प्रयास करेंगे। अखिल भारतीय जैन समाज से पधारें विभिन्न संगठनों के राष्ट्रीय पदाधिकारियों का सम्मान दिगंबर जैन हाईस्कूल एसोसिएशन, प्रबंध समिति के पदाधिकारियों और कालेज के प्राचार्य डॉ. वीरेंद्र सिंह द्वारा किया गया। सांय काल गुरू भक्ति के कार्यक्रम हुए।
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इस अवसर पर घासीराम जैन, धन कुमार जैन, राकेश कुमार जैन, अरविंद जैन, सुनील कुमार जैन, विमल प्रसाद जैन, सुशील कुमार जैन, रमेश चंद जैन, रविंद कुमार जैन, अजय जैन, प्रदीप जैन, अनुज जैन, सुदेश जैन, पवन जैन, आनंद जैन, कमल जैन, प्रवीण जैन, संजय जैन, मनोज जैन, संदीप जैन, सुभाष चंद जैन, अंजुल जैन, निशा जैन, अंजली जैन, सुुनीता जैन, शिखा जैन, मिनी जैन, डुग्गु जैन, डा. दीपक जैन, डा. अमित जैन, डा. विनोद कश्यप, रूपेन जैन, ऋषभ जैन, सुधीर जैन आदि मौजूद रहे।
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