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मेहनत और सच्ची लगन से मिलती है सफलता- डॉ. रामकरण शर्मा

Mon, 24 Dec 2018 12:28 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 24 Dec 2018 12:28 AM IST
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मेहनत और सच्ची लगन से मिलती है सफलता- डॉ. रामकरण शर्मा
बड़ौत (बागपत)। साइंटिस्ट डॉ. रामकरण शर्मा रविवार को अमेरिका से अपने पैतृक गांव ट्यौढ़ी पहुंचे। गांव पहुंचने पर ग्राम प्रधान देवेंद्र शर्मा के नेतृत्व में लोगों ने ढोल, फूल माला और आतिशबाजी के साथ उनका भव्य स्वागत किया।
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रविवार को ट्यौढ़ी गांव के अमेरिका में रहने वाले साइंटिस्ट डॉ. रामकरण शर्मा का दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर ग्रामीणों ने फूल माला से स्वागत किया। उन्हें बैंडबाजों के साथ गांव के प्राइमरी स्कूल में बनाए मंच स्थल तक ले गए। इस बीच राह पड़ने वाले मंदिरों में डॉ. शर्मा ने मत्था टेका। साथ ही गांव के बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। गांव में जगह जगह महिलाओं ने उनकी आरती उतारकर मुंह मीठा कराया।
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ज्ञात हो कि शोध कार्यों के बल पर हाल ही में डॉ. रामकरण शर्मा को इटली में बेस्ट रिसर्च अवार्ड से सम्मानित किया। डॉ. रामकरण शर्मा की प्राथमिक शिक्षा गांव के प्राइमरी विद्यालय में हुई। इसी स्कूल में उनका रविवार को स्वागत किया। उन्होंने सरूरपुर खेड़की कॉलेज से इंटर पास की। इसके बाद उन्होंने जनता वैदिक डिग्री कॉलेज बड़ौत से बीएससी व एमएससी की की। तत्पश्चात नेट की परीक्षा क्वालीफाई की और आईआईटी दिल्ली से पीएचडी की। उन्होंने यहां रहकर आठ शोध पत्र प्राप्त किए। उन्हें कॉलेज की तरफ से भी उत्कृष्ट शोध के लिए भी पुरस्कृत किया। उसके बाद अमेरिका सरकार ने उन्हें फेलोशिप दी, जो एशिया के 48 देशों में किसी एक व्यक्ति को मिलती है। उसके बाद वह अमेरिका चले गए, जहां वह नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. हर गोविंद खुराना के नेतृत्व में पूरक छात्र की प्रयोगशाला में अध्ययन में शामिल हो गए।
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उन्होंने अमेरिका के अटलांटिका में सूक्ष्म जीवों के अध्ययन में बड़ी भूमिका निभाई। हाल ही में इटली की राजधानी रोम में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक कार्यशाला हुई, इसमें दुनिया भर के 340 वैज्ञानिकों ने भाग लिया। सभी वैज्ञानिकों ने अपने शोध प्रस्तुत किए। इसमें डॉ. रामकरण शर्मा को इंटरनेशनल कांफ्रेंस सोसाइटी के प्रेजीडेंट ने बेस्ट रिसर्च अवार्ड से सम्मानित किया। इतना ही नहीं उन्हें रिसर्च पेपर पब्लिशिंग इंडस्ट्रीज के सबसे प्रतिष्ठित पब्लिकेशन स्प्रींगर अवार्ड से भी नवाजा।

हिंदी मीडियम में शिक्षा हासिल करने वाले डॉ. रामकरण शर्मा ने कहा कि उन्हें अपनी मंजिल पाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मारी। अंग्रेजी सीखी और अपने मुकाम को हासिल किया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान हासिल किया। उनकी पत्नी अनुपमा शर्मा ने भी दिल्ली आईआईटी से एमटेक किया। वह यूएसए में फिजिक्स और मैथमेटिक की असिस्टेंट प्रोफेसर रह चुकी हैं। वर्तमान में वह कॉस्ट यूनिवर्सिटी में साइंटिस्ट हैं।
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