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68 गांव में नीर निर्मल परियोजना से पेयजल आपूर्ति की तैयारी
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बागपत। एनजीटी की सख्ती के बाद पश्चिम यूपी के छह जिलों की स्थिति की शासन ने समीक्षा की। जल निगम ने माना है कि पश्चिम के 148 गांव के 1088 हैंडपंप का पानी प्रदूषित है। प्रभावित 68 गांव में विश्व बैंक की नीर निर्मल परियोजना के लिए डीपीआर तैयार की गई है। वित्तीय सहायता के लिए यह योजना विचाराधीन है। छह विभागों के अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में मेडिकल कैंप लगाने, लोगों को जागरूक करने और निगरानी रखने के निर्देश शासन ने दिए हैं।
बागपत की दोआबा पर्यावरण समिति ने एनजीटी में प्रदूषित जल का प्रकरण उठाया। 15 मार्च को एनजीटी ने सुनवाई करते हुए सख्ती दिखाई। इसके बाद शासन ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों की लखनऊ में मीटिंग ली। जल निगम के मुख्य अभियंता ने पश्चिम के छह जिलों के 148 प्रभावित गांव की रिपोर्ट रखी है। बताया कि कुल 148 गांव प्रभावित हैं, इनमें 9915 हैंडपंप है। इनमें 8782 हैंडपंप की गुणवत्ता की जांच की, इनमें से 1088 का पानी दूषित पाया गया। इसके बाद विभाग ने 866 हैंडपंप उखाड़ दिए। जल निगम के अफसरों ने कहा 222 हैंडपंप प्रयोग नहीं किए जा रहे हैं। 41 गांव पाइप पेयजल योजना से आच्छादित हैं, चार जगह कार्य प्रगति पर है। 68 गांव में विश्व बैंक की नीर निर्मल परियोजना की डीपीआर तैयार की गई है, वित्तीय सहायता के लिए विचाराधीन है। दावा किया कि 22 गांव के लिए पाइप पेयजल योजना तैयार है, जबकि 13 गांव के लिए अभी योजना तैयार की जा रही है। शासन ने प्रत्येक जिले के सीएमओ, अधिशासी अभियंता जल निगम, जिला विद्यालय निरीक्षक, बीएसए, डीपीआरओ और प्रदूषण अधिकारी को निगरानी, मेडिकल कैंप और पेयजल आपूर्ति के निर्देश दिए हैं।
बागपत में लगेंगे मेडिकल कैंप
बागपत। सीडीओ पीसी जायसवाल ने बताया कि संबंधित गांव में मेडिकल कैंप लगवाए जाएंगे, जहां लोगों की सभी जांच कराई जाएगी। सीएमओ को निर्देश दिए हैं।
बागपत के 55 गांव प्रभावित
बागपत। प्रदूषित जल से बागपत के करीब 55 गांव प्रभावित है। हैंडपंप यहां से उखाड़े गए हैं, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि इनकी जगह दूसरे हैंडपंप नहीं लगाए।
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103 गांव के लिए यह है योजना
बागपत। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि 103 गांव में पाइप पेयजल योजना को राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना में शिफ्ट कर स्वीकृत कर वित्तीय वर्ष 2019-20 तक प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण कराया जाना चाहिए।
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बागपत की दोआबा पर्यावरण समिति ने एनजीटी में प्रदूषित जल का प्रकरण उठाया। 15 मार्च को एनजीटी ने सुनवाई करते हुए सख्ती दिखाई। इसके बाद शासन ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों की लखनऊ में मीटिंग ली। जल निगम के मुख्य अभियंता ने पश्चिम के छह जिलों के 148 प्रभावित गांव की रिपोर्ट रखी है। बताया कि कुल 148 गांव प्रभावित हैं, इनमें 9915 हैंडपंप है। इनमें 8782 हैंडपंप की गुणवत्ता की जांच की, इनमें से 1088 का पानी दूषित पाया गया। इसके बाद विभाग ने 866 हैंडपंप उखाड़ दिए। जल निगम के अफसरों ने कहा 222 हैंडपंप प्रयोग नहीं किए जा रहे हैं। 41 गांव पाइप पेयजल योजना से आच्छादित हैं, चार जगह कार्य प्रगति पर है। 68 गांव में विश्व बैंक की नीर निर्मल परियोजना की डीपीआर तैयार की गई है, वित्तीय सहायता के लिए विचाराधीन है। दावा किया कि 22 गांव के लिए पाइप पेयजल योजना तैयार है, जबकि 13 गांव के लिए अभी योजना तैयार की जा रही है। शासन ने प्रत्येक जिले के सीएमओ, अधिशासी अभियंता जल निगम, जिला विद्यालय निरीक्षक, बीएसए, डीपीआरओ और प्रदूषण अधिकारी को निगरानी, मेडिकल कैंप और पेयजल आपूर्ति के निर्देश दिए हैं।
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बागपत में लगेंगे मेडिकल कैंप
बागपत। सीडीओ पीसी जायसवाल ने बताया कि संबंधित गांव में मेडिकल कैंप लगवाए जाएंगे, जहां लोगों की सभी जांच कराई जाएगी। सीएमओ को निर्देश दिए हैं।
बागपत के 55 गांव प्रभावित
बागपत। प्रदूषित जल से बागपत के करीब 55 गांव प्रभावित है। हैंडपंप यहां से उखाड़े गए हैं, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि इनकी जगह दूसरे हैंडपंप नहीं लगाए।
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103 गांव के लिए यह है योजना
बागपत। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि 103 गांव में पाइप पेयजल योजना को राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना में शिफ्ट कर स्वीकृत कर वित्तीय वर्ष 2019-20 तक प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण कराया जाना चाहिए।
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