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बैंक खातों से लिंक नहीं हुए आधार, लटकी डीबीटी
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बागपत। सरकार की तरफ से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर खेकड़ा तहसील में शुरू की गई डीबीटी (डायरेक्ट बैनेफिट ट्रांसफर) योजना अधर में लटक गई है। सस्ते गल्ले की दुकानों पर ई-पॉश मशीन से राशन उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है। परिवार की महिला मुखिया के खाते आधार से लिंक नहीं होने के कारण परेशानी खड़ी हो रही है। इस कारण योजना को धरातल पर मूर्त रूप नहीं दिया जा सका है।
केंद्र सरकार ने खेकड़ा तहसील को डीबीटी के लिए वर्ष 2017 में चुना गया । योजना के माध्यम से राशन उपभोक्ताओं को सस्ते गल्ले की दुकानों पर राशन की लाइन में न लगकर सीधे उनके खाते में वर्तमान दर पर गेहूं, चावल, मिट्टी का तेल की धनराशि यूनिट के हिसाब धनराशि ट्रांसफार्मर करने की योजना थी। योजना पर दो साल तक काम होता रहा, लेकिन अब योजना अधर में लटकी हुई है। पूर्ति विभाग का कहना है कि बैंकों का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। ऐसी महिला मुखिया बची हैं, जिनके खाते बैंक से लिंक नहीं है या फिर बैंक में खाते नहीं और विभाग में बैंक की पासबुक महिलाओं के पति की जमा हो गई है। यह ही वजह है कि योजना अधर में लटकी हुई है। जिला पूर्ति विभाग में कार्यरत क्लर्क हिमांशु ने बताया कि खेकड़ा तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में 18908 राशन कार्ड है, इसमें 74454 यूनिट है। महिलाओं के खाते बैंक से लिंक न होना सबसे बड़ी दिक्कत है। इसी वजह से योजना शुरू नहीं हो सकी है।
बैंक खाते और आधार लिंक के बिना नहीं चलेगी योजना
बागपत। डीबीटी योजना तभी पूरी तरह चालू होगी, जब तक परिवार की महिला मुखिया के बैंक खाते और आधार से लिंक नहीं होगी तब तक योजना पूरी नहीं होगी।
योजना से 60 सस्ते गल्ले की दुकान होगी बंद
बागपत। खेकड़ा तहसील के ग्रामीण क्षेत्र के लिए डीबीटी योजना का चयन किया गया था। अगर योजना जल्द पूरी हो जाती तो खेकड़ा क्षेत्र से राशन की दुकानें बंद हो जाएंगी।
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इस तरह होगा योजना का संचालन
बागपत। राशन उपभोक्ताओं को योजना के तहत कोटेदारों की दुकानों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्योंकि सरकार से वर्तमान में दर पर गेहूं, चावल, मिट्टी का तेल की धनराशि उनके खाते में पहुंच जाएगी। जिससे उपभोक्ता किसी भी दुकान से सामान खरीदकर अपने जीवन का निर्वहन कर सकता था। कार्ड में जितनी भी यूनिट होती है उसी हिसाब से धनराशि महिला मुखिया के खाते में ट्रांसफर होगी।
आधार कार्ड बनवाएं, लेकिन लिंक नहीं हुए
बागपत। पिछले वर्ष तत्कालीन जिला पूर्ति अधिकारी चमन शर्मा ने आधार कार्ड बनवाने के लिए कैंप लगवाएं। लोगों के आधार कार्ड बनें, लेकिन यह बैंक खातों से लिंक नहीं हो सके, जिस कारण मुसीबत खड़ी हो रही है।
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केंद्र सरकार ने खेकड़ा तहसील को डीबीटी के लिए वर्ष 2017 में चुना गया । योजना के माध्यम से राशन उपभोक्ताओं को सस्ते गल्ले की दुकानों पर राशन की लाइन में न लगकर सीधे उनके खाते में वर्तमान दर पर गेहूं, चावल, मिट्टी का तेल की धनराशि यूनिट के हिसाब धनराशि ट्रांसफार्मर करने की योजना थी। योजना पर दो साल तक काम होता रहा, लेकिन अब योजना अधर में लटकी हुई है। पूर्ति विभाग का कहना है कि बैंकों का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। ऐसी महिला मुखिया बची हैं, जिनके खाते बैंक से लिंक नहीं है या फिर बैंक में खाते नहीं और विभाग में बैंक की पासबुक महिलाओं के पति की जमा हो गई है। यह ही वजह है कि योजना अधर में लटकी हुई है। जिला पूर्ति विभाग में कार्यरत क्लर्क हिमांशु ने बताया कि खेकड़ा तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में 18908 राशन कार्ड है, इसमें 74454 यूनिट है। महिलाओं के खाते बैंक से लिंक न होना सबसे बड़ी दिक्कत है। इसी वजह से योजना शुरू नहीं हो सकी है।
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बैंक खाते और आधार लिंक के बिना नहीं चलेगी योजना
बागपत। डीबीटी योजना तभी पूरी तरह चालू होगी, जब तक परिवार की महिला मुखिया के बैंक खाते और आधार से लिंक नहीं होगी तब तक योजना पूरी नहीं होगी।
योजना से 60 सस्ते गल्ले की दुकान होगी बंद
बागपत। खेकड़ा तहसील के ग्रामीण क्षेत्र के लिए डीबीटी योजना का चयन किया गया था। अगर योजना जल्द पूरी हो जाती तो खेकड़ा क्षेत्र से राशन की दुकानें बंद हो जाएंगी।
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इस तरह होगा योजना का संचालन
बागपत। राशन उपभोक्ताओं को योजना के तहत कोटेदारों की दुकानों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्योंकि सरकार से वर्तमान में दर पर गेहूं, चावल, मिट्टी का तेल की धनराशि उनके खाते में पहुंच जाएगी। जिससे उपभोक्ता किसी भी दुकान से सामान खरीदकर अपने जीवन का निर्वहन कर सकता था। कार्ड में जितनी भी यूनिट होती है उसी हिसाब से धनराशि महिला मुखिया के खाते में ट्रांसफर होगी।
आधार कार्ड बनवाएं, लेकिन लिंक नहीं हुए
बागपत। पिछले वर्ष तत्कालीन जिला पूर्ति अधिकारी चमन शर्मा ने आधार कार्ड बनवाने के लिए कैंप लगवाएं। लोगों के आधार कार्ड बनें, लेकिन यह बैंक खातों से लिंक नहीं हो सके, जिस कारण मुसीबत खड़ी हो रही है।