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भावनाओं को निर्मल और सरल बनाएं
Updated Sun, 23 Sep 2018 01:05 AM IST
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बागपत। जैन मंदिर में जलाभिषेक के बाद शांति धारा की क्रियाएं प्रारंभ हुई। नित्य नियम से दस लक्षण पूजन से उत्तम अकिंचन धर्म की पूजा के बाद सम्यक दर्शन की विशेष रूप से पूजा की।
शनिवार को बोली प्रदीप जैन और हंसराज जैन ने प्राप्त की। श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान के लिए क्रियाएं हुई। इसमें 350 अर्घ्य अर्पित किए। विधान के दौरान मधु भक्तिमय भजनों पर विधान में शामिल इंद्र इंद्रणी ने भक्ति नृत्य किया। पंडित अशोक शास्त्री ने कहा कि अकिंचन धर्म को अपनाने से घर और परिवार में सुख शांति का वातावरण होता है। सम्यक दर्शन में हमें देव दर्शन करते समय अपने भावनाओं को इतना निर्मल और सरल बनाना है कि हम अपने अरहंत भगवान की आराधना करें तो हमें ऐसे विचार उत्पन्न हो कि अरहंत भगवान के सिद्धांतों पर चलकर हम भी मोक्ष की प्राप्ति कर सकें। शाम के सामूहिक आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम में बच्चों को धार्मिक कवि सम्मेलन हुआ, इसमें बच्चों ने कविताएं सुनाई। इसमें आनंद जैन, मयंक जैन, सुधीर कुमार, बिजेंद्र कुमार, पीयूष, अतुल, पंकज, रूबी, कामिनी, नीलम, आस्था, अंतिम, पलक उपस्थित रहे।
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शनिवार को बोली प्रदीप जैन और हंसराज जैन ने प्राप्त की। श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान के लिए क्रियाएं हुई। इसमें 350 अर्घ्य अर्पित किए। विधान के दौरान मधु भक्तिमय भजनों पर विधान में शामिल इंद्र इंद्रणी ने भक्ति नृत्य किया। पंडित अशोक शास्त्री ने कहा कि अकिंचन धर्म को अपनाने से घर और परिवार में सुख शांति का वातावरण होता है। सम्यक दर्शन में हमें देव दर्शन करते समय अपने भावनाओं को इतना निर्मल और सरल बनाना है कि हम अपने अरहंत भगवान की आराधना करें तो हमें ऐसे विचार उत्पन्न हो कि अरहंत भगवान के सिद्धांतों पर चलकर हम भी मोक्ष की प्राप्ति कर सकें। शाम के सामूहिक आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम में बच्चों को धार्मिक कवि सम्मेलन हुआ, इसमें बच्चों ने कविताएं सुनाई। इसमें आनंद जैन, मयंक जैन, सुधीर कुमार, बिजेंद्र कुमार, पीयूष, अतुल, पंकज, रूबी, कामिनी, नीलम, आस्था, अंतिम, पलक उपस्थित रहे।
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