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चौपाल पर होती थी चेयरमैन की घोषणा
Updated Mon, 20 Nov 2017 01:14 AM IST
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छपरौली (बागपत)। बुजुर्ग बताते हैं पहले प्रत्याशी को मतदाता तलाश करते थे। उम्मीदवार का कोई खर्चा नहीं होता था। आवभगत करने के लिए खांड़ और दूध का शर्बत पिलाते थे। दावे कच्चे रास्तों को पक्का कराने का होता था। शराब और रुपये का तो कोई चलन हीं नहीं था। कुनबे के मुखिया के कहने पर ही पूरा परिवार वोटिंग करता था। वर्तमान समय में चुनाव में सब बदल गया है।
कस्बे के 68 वर्षीय बुजुर्ग और ग्राम सचिव (सेवानिवृत्त) प्रेम सिंह का कहना था कि उन्होंने पहली बार मतदान करीब पांच दशक पहले किया था। उस समय प्रत्याशी मतदाताओं को तलाश नहीं करते थे। मतदाता ही चेयरमैन का चुनाव लड़ाने के लिए तलाश करते थे। खर्चा भी ज्यादा नहीं होता था। विकास का मुद्दा कच्चे रास्ते को पक्का कराना रहता था, लेकिन अब सब कुछ उलट-पलट हो गया है।
67 वर्षीय सेवानिवृत्त अध्यापक राजपाल सिंह ने बताया कि प्रत्याशी को मतदाता अपने घर पर बुलाकर उनकी आवभगत करते थे। कोई भी खर्च नहीं होता था। जहां पर जाते तो खांड़ और दूध का बना शर्बत पिलाया जाता था। अब युवाओं के सामने शराब परोस दी जाती है।
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62 वर्षीय जगजीत सिंह का कहना था कि चार दशक पहले जब उन्होंने पहला मतदान किया था, तब कोई भी घर-घर नहीं जाता था। कुनबे के मुखिया से ही वोटिंग कराने की अनुमति ले ली जाती थी। अब परिवार के लोग ही अलग-अलग वोट करते हैं। वर्तमान समय में चुनाव पूरा बदल गया है।
58 वर्षीय अनिल का कहना था कि पहले चौपाल में लोगों को एकत्र किया जाता था। इस तरह की चौपाल कस्बे में कई जगह लगती थी। उनमें से चेयरमैन पद का उम्मीदवार को चुना जाता था। चुनाव में पहले शराब या किसी रुपये का लालच नहीं होता था।
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कस्बे के 68 वर्षीय बुजुर्ग और ग्राम सचिव (सेवानिवृत्त) प्रेम सिंह का कहना था कि उन्होंने पहली बार मतदान करीब पांच दशक पहले किया था। उस समय प्रत्याशी मतदाताओं को तलाश नहीं करते थे। मतदाता ही चेयरमैन का चुनाव लड़ाने के लिए तलाश करते थे। खर्चा भी ज्यादा नहीं होता था। विकास का मुद्दा कच्चे रास्ते को पक्का कराना रहता था, लेकिन अब सब कुछ उलट-पलट हो गया है।
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67 वर्षीय सेवानिवृत्त अध्यापक राजपाल सिंह ने बताया कि प्रत्याशी को मतदाता अपने घर पर बुलाकर उनकी आवभगत करते थे। कोई भी खर्च नहीं होता था। जहां पर जाते तो खांड़ और दूध का बना शर्बत पिलाया जाता था। अब युवाओं के सामने शराब परोस दी जाती है।
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62 वर्षीय जगजीत सिंह का कहना था कि चार दशक पहले जब उन्होंने पहला मतदान किया था, तब कोई भी घर-घर नहीं जाता था। कुनबे के मुखिया से ही वोटिंग कराने की अनुमति ले ली जाती थी। अब परिवार के लोग ही अलग-अलग वोट करते हैं। वर्तमान समय में चुनाव पूरा बदल गया है।
58 वर्षीय अनिल का कहना था कि पहले चौपाल में लोगों को एकत्र किया जाता था। इस तरह की चौपाल कस्बे में कई जगह लगती थी। उनमें से चेयरमैन पद का उम्मीदवार को चुना जाता था। चुनाव में पहले शराब या किसी रुपये का लालच नहीं होता था।