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बागपत में खनन ठेकेदारों ने जमा नहीं कराए 60 लाख
Updated Wed, 11 Apr 2018 01:16 AM IST
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बागपत। ई-टेंडरिंग से बागपत में तीन जगह रेत खनन कर रहे ठेकेदार प्रशासन के करीब 60 लाख रुपये दबाए बैठे हैं। कुल रायल्टी की 10 प्रतिशत धनराशि जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) में जमा कराने का प्रावधान है, लेकिन अभी तक यह धनराशि जमा नहीं कराई गई। डीएम ने धनराशि जमा कराने के लिए ठेकेदारों को नोटिस जारी किए हैं। इस नोटिस के बाद ठेकेदारों ने न तो कोई जवाब दिया और न ही धनराशि जमा कराई है।
भाजपा की योगी सरकार ने खनन की नई नीति और नई व्यवस्था लागू की। ई-टेंडरिंग के जरिये पहली बार खनन के ठेके छोड़े गए। बागपत में खेकड़ा के नजदीक सुभानपुर, बागपत में गौरीपुर निवाड़ा और बड़ौत के निकट बदरखा में प्रशासन की अनुमति के बाद रेत खनन चल रहा है। प्रावधान है कि ठेकेदार ने पट्टे की जितनी रॉयल्टी जमा की है, उसका 10 फीसदी जिला खनन फाउंडेशन (डीएमएफ) में जमा कराया जाना चाहिए। डीएमएफ के लिए प्रशासन की ओर से एक कमेटी का गठन किया जाता है, लेकिन तीनों ही ठेकेदारों ने अभी तक यह धनराशि जमा नहीं कराई है। अब जिला प्रशासन सख्ती की तैयारी कर रहा है।
क्या है खनिज फाउंडेशन?
बागपत। जिला खनिज फाउंडेशन से खनन क्षेत्र में विकास कार्य कराए जाते हैं। खनन शुरू होते ही डीएमएफ कमेटी का गठन किया जाता है। जो रुपये ठेकेदार डीएमएफ में जमा कराते हैं, उनसे कमेटी की संस्तुति पर खनन क्षेत्र में ही विकास कार्य कराए जाते हैं।
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छह करोड़ से अधिक के तीन ठेके
बागपत। सुभानपुर के ठेके की रॉयल्टी 3.56 करोड़, गौरीपुर के ठेके की रॉयल्टी 2.91 करोड़ और बदरखा के ठेके की रॉयल्टी 1.04 करोड़ रुपये जमा कराई गई है। इस हिसाब से डीएमएफ की बकाया धनराशि 60 लाख रुपये से अधिक है।
गौरीपुर में खनन पर हो चुका बवाल
बागपत। गौरीपुर में खनन को लेकर बवाल हो चुका है। ठेकेदार पक्ष और ग्रामीणों के बीच पथराव और फायरिंग हुई। बाद में डीएम की मौजूदगी में दोनों पक्षों में समझौता हुआ था।
किसकी इजाजत से चल रहा कच्चा पुल
बागपत। गौरीपुर खनन प्वाइंट के निकट यमुना में कच्चा पुल बना दिया गया। सिंचाई विभाग ने कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया। इसकी जांच चल रही है। इस पुल से भी रेत लदे वाहनों को गुजारा जाता है।
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भाजपा की योगी सरकार ने खनन की नई नीति और नई व्यवस्था लागू की। ई-टेंडरिंग के जरिये पहली बार खनन के ठेके छोड़े गए। बागपत में खेकड़ा के नजदीक सुभानपुर, बागपत में गौरीपुर निवाड़ा और बड़ौत के निकट बदरखा में प्रशासन की अनुमति के बाद रेत खनन चल रहा है। प्रावधान है कि ठेकेदार ने पट्टे की जितनी रॉयल्टी जमा की है, उसका 10 फीसदी जिला खनन फाउंडेशन (डीएमएफ) में जमा कराया जाना चाहिए। डीएमएफ के लिए प्रशासन की ओर से एक कमेटी का गठन किया जाता है, लेकिन तीनों ही ठेकेदारों ने अभी तक यह धनराशि जमा नहीं कराई है। अब जिला प्रशासन सख्ती की तैयारी कर रहा है।
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क्या है खनिज फाउंडेशन?
बागपत। जिला खनिज फाउंडेशन से खनन क्षेत्र में विकास कार्य कराए जाते हैं। खनन शुरू होते ही डीएमएफ कमेटी का गठन किया जाता है। जो रुपये ठेकेदार डीएमएफ में जमा कराते हैं, उनसे कमेटी की संस्तुति पर खनन क्षेत्र में ही विकास कार्य कराए जाते हैं।
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छह करोड़ से अधिक के तीन ठेके
बागपत। सुभानपुर के ठेके की रॉयल्टी 3.56 करोड़, गौरीपुर के ठेके की रॉयल्टी 2.91 करोड़ और बदरखा के ठेके की रॉयल्टी 1.04 करोड़ रुपये जमा कराई गई है। इस हिसाब से डीएमएफ की बकाया धनराशि 60 लाख रुपये से अधिक है।
गौरीपुर में खनन पर हो चुका बवाल
बागपत। गौरीपुर में खनन को लेकर बवाल हो चुका है। ठेकेदार पक्ष और ग्रामीणों के बीच पथराव और फायरिंग हुई। बाद में डीएम की मौजूदगी में दोनों पक्षों में समझौता हुआ था।
किसकी इजाजत से चल रहा कच्चा पुल
बागपत। गौरीपुर खनन प्वाइंट के निकट यमुना में कच्चा पुल बना दिया गया। सिंचाई विभाग ने कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया। इसकी जांच चल रही है। इस पुल से भी रेत लदे वाहनों को गुजारा जाता है।