{"_id":"60b91a418ebc3e2e364608ea","slug":"salute-to-the-brave-martyrs-of-the-revolution-of-june-3-1857-azamgarh-news-vns592892357","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन जून 1857 की क्रांति के वीर शहीदों को किया नमन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीन जून 1857 की क्रांति के वीर शहीदों को किया नमन
विज्ञापन
जनवादी लोकमंच की ओर से सामयिक कारवां के कार्यालय में बृहस्पतिवार को तीन जून 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक भूमिका को किस प्रकार अक्षुण बनाया जाए, इस पर अनिल चतुर्वेदी की अध्यक्षता में गोष्ठी हुई। इसमें लोगों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान जिला प्रशासन से वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा कुंवर सिंह उद्यान में लगाने की मांग की गई।
गोष्ठी की शुरूआत डा. रवींद्र नाथ राय ने जिस वक्त हम लिखेंगे शहीदों की दास्तां, तारीख की रगों में लहू दौड़ जाएगा से किया। कहा कि तीन जून 1857 की रात नौ बजे के आसपास ड्रम बजा, दो गोलियों की आवाज कलेक्ट्रेट कचहरी में सुनाई दी। पता चला कि बगावत हो गई। यह बगावत स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गई। प्रमुख इतिहासकारों ने जिले के इस विद्रोह को पूर्वांचल के लिए मशाल की भूमिका के तौर पर लिखा है। उन्होंने बताया कि 10 मई 1857 को मेरठ की छावनी से प्रारंभ प्रथम स्वाधीनता संग्राम की ज्वाला तीन जून 1857 को जिले में पहुंची। कांतिकारियों ने कलेक्ट्री कचहरी, पुलिस लाइन और ट्रेजरी आफिस पर कब्जा कर जेल के फाटक को तोड़ कैदियों को आजाद किया। ब्रिटिश काल में तीन जून 1857 को पहली बार जिला आजाद हुआ था।इसी क्रम में गोष्ठी को इंद्रासन सिंह, महताब आलम, अजीत यादव आदि ने संबोधित किया। कहा कि अंग्रेजों का कांतिक्रारियों ने सात लाख रुपये का खजाना लूटा और उनके स्वजन को सुरक्षित गाजीपुर व वाराणसी भेजा। इस दौरान लेफ्टिनेंट हचिग्सन मारा गया। विद्रोह का प्रभाव पूरे पूर्वांचल पर पड़ा और विद्रोह शुरू हो गया। वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में बोधू सिंह यादव, रामटहल सिंह, माधव सिंह,परगना सिंह, गंगा सिंह, हरनाम सिंह, जालिम सिंह, रज्जब अली, जगबंधन सिंह, पृथ्वीपाल सिंह, इरादत जहां, मुजफ्फर जहां, गोगा साहू, भीखू साहू और वीर कुंवर सिंह के नाम प्रसिद्ध हैं। इस अवसर पर संदीप ने अजीमुल्ला खां रचित प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के राष्ट्र गीत %हम है इसके मालिक, ये हिदुस्तां हमारा% और राहुल ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अजीजन बाई के गीत %जागो, उठो अब हुआ विहान% प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में ताहा कौसर, अजीत यादव, मृत्युंजय, कन्हैया लाल आदि थे। गोष्ठी का संचालन करते हुए समापन राहुल ने सभी का आभार प्रकट किया।
विज्ञापन
गोष्ठी की शुरूआत डा. रवींद्र नाथ राय ने जिस वक्त हम लिखेंगे शहीदों की दास्तां, तारीख की रगों में लहू दौड़ जाएगा से किया। कहा कि तीन जून 1857 की रात नौ बजे के आसपास ड्रम बजा, दो गोलियों की आवाज कलेक्ट्रेट कचहरी में सुनाई दी। पता चला कि बगावत हो गई। यह बगावत स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गई। प्रमुख इतिहासकारों ने जिले के इस विद्रोह को पूर्वांचल के लिए मशाल की भूमिका के तौर पर लिखा है। उन्होंने बताया कि 10 मई 1857 को मेरठ की छावनी से प्रारंभ प्रथम स्वाधीनता संग्राम की ज्वाला तीन जून 1857 को जिले में पहुंची। कांतिकारियों ने कलेक्ट्री कचहरी, पुलिस लाइन और ट्रेजरी आफिस पर कब्जा कर जेल के फाटक को तोड़ कैदियों को आजाद किया। ब्रिटिश काल में तीन जून 1857 को पहली बार जिला आजाद हुआ था।इसी क्रम में गोष्ठी को इंद्रासन सिंह, महताब आलम, अजीत यादव आदि ने संबोधित किया। कहा कि अंग्रेजों का कांतिक्रारियों ने सात लाख रुपये का खजाना लूटा और उनके स्वजन को सुरक्षित गाजीपुर व वाराणसी भेजा। इस दौरान लेफ्टिनेंट हचिग्सन मारा गया। विद्रोह का प्रभाव पूरे पूर्वांचल पर पड़ा और विद्रोह शुरू हो गया। वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में बोधू सिंह यादव, रामटहल सिंह, माधव सिंह,परगना सिंह, गंगा सिंह, हरनाम सिंह, जालिम सिंह, रज्जब अली, जगबंधन सिंह, पृथ्वीपाल सिंह, इरादत जहां, मुजफ्फर जहां, गोगा साहू, भीखू साहू और वीर कुंवर सिंह के नाम प्रसिद्ध हैं। इस अवसर पर संदीप ने अजीमुल्ला खां रचित प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के राष्ट्र गीत %हम है इसके मालिक, ये हिदुस्तां हमारा% और राहुल ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अजीजन बाई के गीत %जागो, उठो अब हुआ विहान% प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में ताहा कौसर, अजीत यादव, मृत्युंजय, कन्हैया लाल आदि थे। गोष्ठी का संचालन करते हुए समापन राहुल ने सभी का आभार प्रकट किया।
विज्ञापन