{"_id":"5a3ff0c24f1c1bd1408bec50","slug":"rupees-of-one-crore-build-streets-drains","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक करोड़ से बनेंगी गलियां, नालियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक करोड़ से बनेंगी गलियां, नालियां
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Sun, 24 Dec 2017 11:54 PM IST
विज्ञापन
money
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आजमगढ़। आजमगढ़ विकास प्राधिकरण की ओर से लगभग एक करोड़ की अवस्थापना निधि से शहर की गलियों और नालियों का गठन के बाद आजमगढ़ विकास प्राधिकरण का कोई स्थायी सचिव न होने से सचिव के पद पर एडीएम वित्त एवं राजस्व की तैनाती होती थी, लेकिन उनकी व्यस्तता के कारण विभाग के एई और जेई ही सारा कार्य देखते थे।
जो भी अधिकारी इन कुर्सियों पर बैठा उसकी ओर से मोटी-मोटी रकम लेकर प्रतिबंधित क्षेत्र में भवनों का निर्माण तो कराया ही गया। 1985 की महायोजना में शहर के विकास का जो खाका खींचा गया था, उसका कबाड़ा कर दिया गया।
शहर की कई गलियां ऐसी हैं, जो महायोजना में 30 से 40 फीट चौड़ी दर्शाई गई थीं, आज मौके पर 12 से 15 फीट ही बची हैं। हालत ये है कि कई गलियां तो ऐसी हो गई हैं कि उनमें चार पहिया वाहनों का प्रवेश भी नहीं हो सकता है।
विज्ञापन
गलियों के क्षतिग्रस्त होने और नाली की भी उचित व्यवस्था न होने के कारण ऐसी कालोनियों में रहना दुश्वार हो गया है। जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने इस समस्या पर विकास प्राधिकरण के सचिव को अवस्थापना निधि से शहर की गलियों और नालियों की समस्याएं दूर कर उसका विकास करने के निर्देश दिए हैं।
प्राधिकरण के सचिव बाबू सिंह ने बताया कि लगभग एक करोड़ की अवस्थापना निधि से शहर की गलियों और नालियों का विकास कराया जाएगा। प्राधिकरण के इंजीनियरों को गलियों और नालियों के सर्वे में लगा दिया गया है। सर्वे के बाद कार्य शुरू कराया जाएगा।
शहरी क्षेत्र की गलियों और नालियों की समस्या को देखते हुए पालिका, डूडा को पहले ही इसका चिह्नीकरण कर विकास कराने के निर्देश दिए गए थे। अब प्राधिकरण को भी अवस्थापना निधि से गलियों और नालियों को दुरुस्त कराने को कहा गया है। -चंद्रभूषण सिंह, जिलाधिकारी
विज्ञापन
जो भी अधिकारी इन कुर्सियों पर बैठा उसकी ओर से मोटी-मोटी रकम लेकर प्रतिबंधित क्षेत्र में भवनों का निर्माण तो कराया ही गया। 1985 की महायोजना में शहर के विकास का जो खाका खींचा गया था, उसका कबाड़ा कर दिया गया।
विज्ञापन
शहर की कई गलियां ऐसी हैं, जो महायोजना में 30 से 40 फीट चौड़ी दर्शाई गई थीं, आज मौके पर 12 से 15 फीट ही बची हैं। हालत ये है कि कई गलियां तो ऐसी हो गई हैं कि उनमें चार पहिया वाहनों का प्रवेश भी नहीं हो सकता है।
विज्ञापन
गलियों के क्षतिग्रस्त होने और नाली की भी उचित व्यवस्था न होने के कारण ऐसी कालोनियों में रहना दुश्वार हो गया है। जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने इस समस्या पर विकास प्राधिकरण के सचिव को अवस्थापना निधि से शहर की गलियों और नालियों की समस्याएं दूर कर उसका विकास करने के निर्देश दिए हैं।
प्राधिकरण के सचिव बाबू सिंह ने बताया कि लगभग एक करोड़ की अवस्थापना निधि से शहर की गलियों और नालियों का विकास कराया जाएगा। प्राधिकरण के इंजीनियरों को गलियों और नालियों के सर्वे में लगा दिया गया है। सर्वे के बाद कार्य शुरू कराया जाएगा।
शहरी क्षेत्र की गलियों और नालियों की समस्या को देखते हुए पालिका, डूडा को पहले ही इसका चिह्नीकरण कर विकास कराने के निर्देश दिए गए थे। अब प्राधिकरण को भी अवस्थापना निधि से गलियों और नालियों को दुरुस्त कराने को कहा गया है। -चंद्रभूषण सिंह, जिलाधिकारी