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Azamgarh News: जनाधिकार रैली में उमड़ा प्रजापति समाज
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25 : एसकेपी स्कूल परिसर में जन अधिकार रैली को संबोधित करते वक्ता।
- फोटो : 1
आजमगढ़। राष्ट्रीय भागीदारी पार्टी, समता समाज पार्टी और समझदार पार्टी के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को एसकेपी इंटर कॉलेज मैदान में जनाधिकार रैली का आयोजन किया गया। रैली में देश-प्रदेश से बड़ी संख्या में प्रजापति समाज के लोगों ने भाग लिया और अपने हक व अधिकार को लेकर उत्साहपूर्वक एकजुटता दिखाई।
मुख्य अतिथि पूर्व अपर निदेशक ग्राम विकास वरदानी ने कहा कि भारत की प्राचीन संस्कृति में प्रजापति समाज की रचनात्मक भूमिका रही है, लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व और नीति निर्माण में उनकी भागीदारी अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में समाज को संगठित होकर अपनी हिस्सेदारी की मांग करनी होगी। मुख्य वक्ता रामपाल प्रजापति ने कहा कि प्रजापति समाज का एक स्वच्छ और गौरवशाली इतिहास रहा है। समाज को केवल सम्मान नहीं, बल्कि सत्ता में अधिकार चाहिए। उन्होंने कहा कि जो समाज मिट्टी गढ़ता रहा है, वही अब राजनीति के निर्माण में भी निर्णायक भूमिका निभाएगा। वहीं मोहिंदर प्रजापति ने कहा कि संख्या के आधार पर समाज को उसका अधिकार मिलना चाहिए और ईबीसी वर्ग की अगली नेतृत्वकारी शक्ति कुंभकार समाज है। कार्यक्रम की अध्यक्षता संरक्षक एवं पूर्व उप परिवहन उपायुक्त चुन्नीलाल प्रजापति ने की। मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व अपर निदेशक ग्राम विकास वरदानी जी उपस्थित रहे, जबकि मुख्य वक्ता अखिल भारतीय प्रजापति कुम्भकार महासभा फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल प्रजापति रहे। कार्यक्रम का आयोजन प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार प्रजापति द्वारा किया गया। संचालन प्रदेश उपाध्यक्ष मंगेश प्रजापति एवं प्रदेश महामंत्री अम्बिका प्रजापति ने संयुक्त रूप से किया।
इनसेट
प्रजापति समाज की जनसंख्या 5 से 7 प्रतिशत, लेकिन प्रतिनिधित्व मात्र 0.5 प्रतिशत
प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार प्रजापति ने कहा कि समाज में होश और जोश दोनों है। प्रजापति समाज प्राचीन वैज्ञानिक सोच और सभ्यता का प्रतीक रहा है। समाज के लोगों ने देश-विदेश में अपनी कला और हुनर का प्रदर्शन किया है, लेकिन आज उनकी कला की नकल कर अन्य लोग जीविकोपार्जन कर रहे हैं, जबकि मूल समाज उपेक्षित है। चुन्नीलाल प्रजापति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में प्रजापति समाज की जनसंख्या 5 से 7 प्रतिशत है, लेकिन प्रतिनिधित्व मात्र 0.5 प्रतिशत है, जो अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कुंभकार समाज के लिए टिकट अनिवार्य किए जाने, मिट्टी उद्योग को सरकारी संरक्षण देने और गांव से विधानसभा तक प्रजापति बाहुल्य बूथों को निर्णायक बनाने की मांग की। उन्होंने कहा, “वोट हमारा, नेता हमारा—माटी का सम्मान और राजनीति में सम्मान ही हमारा मुख्य उद्देश्य है।”
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मुख्य अतिथि पूर्व अपर निदेशक ग्राम विकास वरदानी ने कहा कि भारत की प्राचीन संस्कृति में प्रजापति समाज की रचनात्मक भूमिका रही है, लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व और नीति निर्माण में उनकी भागीदारी अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में समाज को संगठित होकर अपनी हिस्सेदारी की मांग करनी होगी। मुख्य वक्ता रामपाल प्रजापति ने कहा कि प्रजापति समाज का एक स्वच्छ और गौरवशाली इतिहास रहा है। समाज को केवल सम्मान नहीं, बल्कि सत्ता में अधिकार चाहिए। उन्होंने कहा कि जो समाज मिट्टी गढ़ता रहा है, वही अब राजनीति के निर्माण में भी निर्णायक भूमिका निभाएगा। वहीं मोहिंदर प्रजापति ने कहा कि संख्या के आधार पर समाज को उसका अधिकार मिलना चाहिए और ईबीसी वर्ग की अगली नेतृत्वकारी शक्ति कुंभकार समाज है। कार्यक्रम की अध्यक्षता संरक्षक एवं पूर्व उप परिवहन उपायुक्त चुन्नीलाल प्रजापति ने की। मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व अपर निदेशक ग्राम विकास वरदानी जी उपस्थित रहे, जबकि मुख्य वक्ता अखिल भारतीय प्रजापति कुम्भकार महासभा फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल प्रजापति रहे। कार्यक्रम का आयोजन प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार प्रजापति द्वारा किया गया। संचालन प्रदेश उपाध्यक्ष मंगेश प्रजापति एवं प्रदेश महामंत्री अम्बिका प्रजापति ने संयुक्त रूप से किया।
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इनसेट
प्रजापति समाज की जनसंख्या 5 से 7 प्रतिशत, लेकिन प्रतिनिधित्व मात्र 0.5 प्रतिशत
प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार प्रजापति ने कहा कि समाज में होश और जोश दोनों है। प्रजापति समाज प्राचीन वैज्ञानिक सोच और सभ्यता का प्रतीक रहा है। समाज के लोगों ने देश-विदेश में अपनी कला और हुनर का प्रदर्शन किया है, लेकिन आज उनकी कला की नकल कर अन्य लोग जीविकोपार्जन कर रहे हैं, जबकि मूल समाज उपेक्षित है। चुन्नीलाल प्रजापति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में प्रजापति समाज की जनसंख्या 5 से 7 प्रतिशत है, लेकिन प्रतिनिधित्व मात्र 0.5 प्रतिशत है, जो अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कुंभकार समाज के लिए टिकट अनिवार्य किए जाने, मिट्टी उद्योग को सरकारी संरक्षण देने और गांव से विधानसभा तक प्रजापति बाहुल्य बूथों को निर्णायक बनाने की मांग की। उन्होंने कहा, “वोट हमारा, नेता हमारा—माटी का सम्मान और राजनीति में सम्मान ही हमारा मुख्य उद्देश्य है।”
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