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Azamgarh News: उमस और नमी से बढ़ रहे बैक्टीरियल इंफेक्शन के मरीज
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मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर लोगों की त्वचा पर पड़ रहा है। बारिश के बाद वातावरण में नमी और धूप निकलने से उमस बढ़ गई है। इसके कारण जिला अस्पताल में त्वचा संबंधी एलर्जी, खुजली, फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन के मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम कुमारी ने बताया कि त्वचा रोग ओपीडी में प्रतिदिन करीब 150 से 200 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 30 से 40 मरीज फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण से संबंधित समस्याओं वाले होते हैं। मौसम में नमी के कारण त्वचा पर पसीना अधिक देर तक बना रहता है।
इसके बाद धूप निकलने से उमस बढ़ जाती है। ऐसे वातावरण में फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण की समस्या बढ़ने की आशंका रहती है। फंगल संक्रमण में मरीजों की त्वचा पर गोल दाग, चकत्ते और खुजली की समस्या देखने को मिल रही है।
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वहीं, बैक्टीरियल इंफेक्शन में हाथों की त्वचा फटने, सूखापन और जलन जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार, लक्षण दिखाई देने पर बिना सलाह के दवा लगाने के बजाय विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
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ऐसे करें बचाव-
बारिश में भीगने पर तत्काल कपड़े बदलें।
नहाने के बाद शरीर को अच्छी तरह सुखाएं।
सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
अधिक समय तक नमी में न रहें।
फुल और ढीले सूती कपड़े पहनें।
खुजली या चकत्ते होने पर खुजली न करें।
समस्या होने पर चिकित्सक से परामर्श लें।
बिना चिकित्सक के कोई क्रीम या अन्य दवा का प्रयोग न करें।
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चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम कुमारी ने बताया कि त्वचा रोग ओपीडी में प्रतिदिन करीब 150 से 200 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 30 से 40 मरीज फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण से संबंधित समस्याओं वाले होते हैं। मौसम में नमी के कारण त्वचा पर पसीना अधिक देर तक बना रहता है।
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इसके बाद धूप निकलने से उमस बढ़ जाती है। ऐसे वातावरण में फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण की समस्या बढ़ने की आशंका रहती है। फंगल संक्रमण में मरीजों की त्वचा पर गोल दाग, चकत्ते और खुजली की समस्या देखने को मिल रही है।
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वहीं, बैक्टीरियल इंफेक्शन में हाथों की त्वचा फटने, सूखापन और जलन जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार, लक्षण दिखाई देने पर बिना सलाह के दवा लगाने के बजाय विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
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ऐसे करें बचाव-
बारिश में भीगने पर तत्काल कपड़े बदलें।
नहाने के बाद शरीर को अच्छी तरह सुखाएं।
सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
अधिक समय तक नमी में न रहें।
फुल और ढीले सूती कपड़े पहनें।
खुजली या चकत्ते होने पर खुजली न करें।
समस्या होने पर चिकित्सक से परामर्श लें।
बिना चिकित्सक के कोई क्रीम या अन्य दवा का प्रयोग न करें।