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Azamgarh News: 15 सीएचसी में स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं, नर्स कराती हैं प्रसव, गंभीर मरीज करती हैं रेफर
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पवई में लगाया गया बेड। संवाद
आजमगढ़। जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से 23 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) संचालित किए जा रहे हैं। इनमें से आठ सीएचसी को छोड़ दें तो 15 सीएचसी में स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती ही नहीं है।
यहां पर स्टाफ नर्सों के भरोसे गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराया जाता है। गंभीर परिस्थितियों में लोगों को जिला महिला अस्पताल या फिर निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। सामान्य प्रसव की सुविधा होने के बावजूद जटिल मामलों में मरीजों को महिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है।
वहीं, कई सीएचसी पर बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। विभागीय स्तर पर सभी सीएचसी पर 30-30 बेड की व्यवस्था होने का दावा किया जाता है, लेकिन कई केंद्रों पर वास्तविकता इससे अलग है। कहीं 15 तो कहीं 20 बेड ही उपलब्ध हैं।
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ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को नजदीक ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सीएचसी स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर प्रसव, सामान्य सर्जरी, बुखार, संक्रमण समेत विभिन्न बीमारियों के इलाज की व्यवस्था है।
इसके बावजूद कई सीएचसी पर संसाधनों की कमी बनी हुई है। विभाग के दावे के अनुसार 30 बेड की सुविधा है, लेकिन भवन और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर कई जगह बेड की संख्या इससे काफी कम है।
मरीजों की संख्या बढ़ने पर उन्हें भर्ती करने में अस्पताल प्रशासन को परेशानी होती है। गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल या अन्य उच्च चिकित्सा संस्थानों के लिए रेफर करना पड़ता है।
बिजली कटौती के दौरान मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण उपलब्ध संसाधनों का भी पूरा लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
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ठीक नहीं है बेडों की स्थिति
बरदह। सीएचसी बरदह में महज 16 बेड ही उपलब्ध हैं। इनमें भी कई बेड टूटे और जर्जर हालत में हैं। इससे मरीजों को इलाज के दौरान परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां किसी भी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने से महिला मरीजों को भी रेफर किया जाता है। अस्पताल में बड़ा जनरेटर नहीं है, इसलिए बिजली आने पर ही एक्स-रे होता है। संवाद
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30 की जगह लगे हैं मात्र 20 बेड
महराजगंज। सीएचसी महराजगंज में वार्ड में 20 बेड ही लगे हुए हैं। बाकी दस बेड गायब हैं। महिला विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से नर्स नॉर्मल डिलीवरी कराती हैं। गंभीर मामलों को जिले के अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। यहां एक्स-रे मशीन नहीं है। संवाद
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मरीजों की संख्या बढ़ने पर होती है परेशानी
पवई। सीएचसी में 30 बेड की व्यवस्था निर्धारित होने के बावजूद वर्तमान में महज 21 बेड से ही काम चलाया जा रहा है। अस्पताल के पुरुष वार्ड में 11 और महिला वार्ड में नौ और इमरजेंसी में केवल एक बेड उपलब्ध है। ऐसे में मरीजों की संख्या बढ़ने पर भर्ती व्यवस्था प्रभावित होने लगती है। संवाद
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महिला विशेषज्ञ और सर्जन नहीं
लाटघाट। सीएचसी हरैया में 20 बेड ही लगे हुए हैं। यहां महिला विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। नर्स के भरोसे डिलीवरी कराई जाती है। गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। देवारा क्षेत्र से जुड़े इस सीएचसी पर कोई सर्जन भी नहीं है। संवाद
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जहां पर बेडों की कमी है, वहां अगर मरीज बढ़ते हैं तो बेड बढ़ा दिए जाते हैं। आठ सीएचसी पर महिला विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती है। जहां पर नहीं है, वहां नर्स ही नॉर्मल डिलीवरी कराती हैं। इसके लिए इन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाता है। सीएचसी पर महिला डॉक्टरों की तैनाती और 10 बड़े जनरेटरों सहित अन्य सुविधाओं की मांग शासन से की गई है।
-- डॉ. एनआर वर्मा, सीएमओ
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यहां पर स्टाफ नर्सों के भरोसे गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराया जाता है। गंभीर परिस्थितियों में लोगों को जिला महिला अस्पताल या फिर निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। सामान्य प्रसव की सुविधा होने के बावजूद जटिल मामलों में मरीजों को महिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है।
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वहीं, कई सीएचसी पर बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। विभागीय स्तर पर सभी सीएचसी पर 30-30 बेड की व्यवस्था होने का दावा किया जाता है, लेकिन कई केंद्रों पर वास्तविकता इससे अलग है। कहीं 15 तो कहीं 20 बेड ही उपलब्ध हैं।
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ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को नजदीक ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सीएचसी स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर प्रसव, सामान्य सर्जरी, बुखार, संक्रमण समेत विभिन्न बीमारियों के इलाज की व्यवस्था है।
इसके बावजूद कई सीएचसी पर संसाधनों की कमी बनी हुई है। विभाग के दावे के अनुसार 30 बेड की सुविधा है, लेकिन भवन और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर कई जगह बेड की संख्या इससे काफी कम है।
मरीजों की संख्या बढ़ने पर उन्हें भर्ती करने में अस्पताल प्रशासन को परेशानी होती है। गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल या अन्य उच्च चिकित्सा संस्थानों के लिए रेफर करना पड़ता है।
बिजली कटौती के दौरान मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण उपलब्ध संसाधनों का भी पूरा लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
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ठीक नहीं है बेडों की स्थिति
बरदह। सीएचसी बरदह में महज 16 बेड ही उपलब्ध हैं। इनमें भी कई बेड टूटे और जर्जर हालत में हैं। इससे मरीजों को इलाज के दौरान परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां किसी भी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने से महिला मरीजों को भी रेफर किया जाता है। अस्पताल में बड़ा जनरेटर नहीं है, इसलिए बिजली आने पर ही एक्स-रे होता है। संवाद
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30 की जगह लगे हैं मात्र 20 बेड
महराजगंज। सीएचसी महराजगंज में वार्ड में 20 बेड ही लगे हुए हैं। बाकी दस बेड गायब हैं। महिला विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से नर्स नॉर्मल डिलीवरी कराती हैं। गंभीर मामलों को जिले के अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। यहां एक्स-रे मशीन नहीं है। संवाद
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मरीजों की संख्या बढ़ने पर होती है परेशानी
पवई। सीएचसी में 30 बेड की व्यवस्था निर्धारित होने के बावजूद वर्तमान में महज 21 बेड से ही काम चलाया जा रहा है। अस्पताल के पुरुष वार्ड में 11 और महिला वार्ड में नौ और इमरजेंसी में केवल एक बेड उपलब्ध है। ऐसे में मरीजों की संख्या बढ़ने पर भर्ती व्यवस्था प्रभावित होने लगती है। संवाद
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महिला विशेषज्ञ और सर्जन नहीं
लाटघाट। सीएचसी हरैया में 20 बेड ही लगे हुए हैं। यहां महिला विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। नर्स के भरोसे डिलीवरी कराई जाती है। गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। देवारा क्षेत्र से जुड़े इस सीएचसी पर कोई सर्जन भी नहीं है। संवाद
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जहां पर बेडों की कमी है, वहां अगर मरीज बढ़ते हैं तो बेड बढ़ा दिए जाते हैं। आठ सीएचसी पर महिला विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती है। जहां पर नहीं है, वहां नर्स ही नॉर्मल डिलीवरी कराती हैं। इसके लिए इन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाता है। सीएचसी पर महिला डॉक्टरों की तैनाती और 10 बड़े जनरेटरों सहित अन्य सुविधाओं की मांग शासन से की गई है।