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वेस्ली में दुकान लगाने की अनुमति नहीं, मंडी से पुलिस ने भगाया
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शहर के मुख्य चौक स्थित गल्ला मंडी में प्रतिबंध के बाद भी सब्जियों की दुकान लगाने वाले व्यापारियो?
- फोटो : AZAMGARH
बलरामपुर। शहर के मुख्य चौक क्षेत्र स्थित वेस्ली इंटर कालेज में रविवार को सब्जी की दुकान लगाने की अनुमति सब्जी कारोबारियों को नहीं मिली। जिस पर उन्होंने मंडी परिसर में दुकान लगा लिया। कुछ ही देर में पहुंची पुलिस ने मंडी में लगी दुकानों को बंद करा दिया। जिससे कारोबारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। घंटो सब्जी कारोबारियों ने मंडी परिसर में हंगामा किया लेकिन पुलिस के आगे उनकी एक नहीं चलने पाई।
कोरोना संक्रमण की शुरूआत के साथ ही 22 मार्च से देश में लॉकडाउन लग गया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने सब्जी मंडी में होने वाली भीड़ पर नियंत्रण के लिए सब्जी की दुकानों नगर क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर लगवा दिया था। मुख्य चौक स्थित मंडी को पूरी तरह से बंद करा दिया गया था और सब्जी की दुकानें वेस्ली इंटर कालेज मैदान के साथ ही अठवरिया मैदान, कर्बला मैदान, एसकेपी स्कूल मैदान, डीएवी पीजी कालेज मैदान पर लगवाया था। रविवार को वेस्ली स्कूल प्रशासन ने अपने मैदान पर सब्जी की दुकान लगाने से दुकानदारों को रोक दिया। जबकि दुकानदार किसानों से सब्जी की खरीद कर चुके थे। वेस्ली में दुकान न लगने पर दुकानदार किसानों से खरीदी सब्जी लेकर पुरानी मंडी में पहुंच गए और वहीं दुकान लगाने लगे। इस बात की जानकारी होते ही शहर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गई और मंडी में लगी दुकानों को बंद करा दिया। दुकानदारों ने पुलिस की कवायद का विरोध भी किया लेकिन पुलिस के आगे उनकी एक न चली। काफी मात्रा में हरी सब्जियां होने के चलते दुकानदारों को नुकसान उठाना पड़ा। औने-पौने दाम पर सब्जी बेचने वे मजबूर भी हुए।
वेस्ली में दुकान न लगने देने की पहले से सूचना नहीं थी। जिसके चलते हम किसानों से माल खरीद लिए थे। अब न तो वेस्ली में दुकान लगाने को मिला न ही मंडी में ही, जिसके चलते हमारा काफी नुकसान हुआ। - राजू सोनकर, सब्जी कारोबारी।
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हम रोज कमाने व खाने वाले है, इसके बाद भी प्रशासन हमारा ध्यान नहीं दे रहा है। पहले से जानकारी रहीं होती तो हम किसानों से सब्जी नहीं खरीदे होते और किसानों को भी सब्जी लाने से मना कर दिए होते। - सज्जू, सब्जी कारोबारी।
बेलईसा मंडी से रविवार को आलू मंगाया था, उसे चौक मंडी स्थित अपनी दुकान में उतरवा रहा था लेकिन पुलिस ने उसे भी नहीं उतरवाने दिया। चालक को डांट-फटकार कर भगा दिया। जिला प्रशासन को अब मंडी खोल देनी चाहिए। - धर्मेंद्र कुमार, सब्जी कारोबारी।
किसानों से माल तो हम खरीद लिए लेकिन उसे बेच नहीं पाए। ज्यादातर सब्जियां हरी थी, जिसके चलते काफी नुकसान हुआ है। सड़क की पटरी आदि पर औने-पौने दाम पर कुछ सब्जियों को ही हम बेच सके है। - रमेश, सब्जी कारोबारी।
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कोरोना संक्रमण की शुरूआत के साथ ही 22 मार्च से देश में लॉकडाउन लग गया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने सब्जी मंडी में होने वाली भीड़ पर नियंत्रण के लिए सब्जी की दुकानों नगर क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर लगवा दिया था। मुख्य चौक स्थित मंडी को पूरी तरह से बंद करा दिया गया था और सब्जी की दुकानें वेस्ली इंटर कालेज मैदान के साथ ही अठवरिया मैदान, कर्बला मैदान, एसकेपी स्कूल मैदान, डीएवी पीजी कालेज मैदान पर लगवाया था। रविवार को वेस्ली स्कूल प्रशासन ने अपने मैदान पर सब्जी की दुकान लगाने से दुकानदारों को रोक दिया। जबकि दुकानदार किसानों से सब्जी की खरीद कर चुके थे। वेस्ली में दुकान न लगने पर दुकानदार किसानों से खरीदी सब्जी लेकर पुरानी मंडी में पहुंच गए और वहीं दुकान लगाने लगे। इस बात की जानकारी होते ही शहर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गई और मंडी में लगी दुकानों को बंद करा दिया। दुकानदारों ने पुलिस की कवायद का विरोध भी किया लेकिन पुलिस के आगे उनकी एक न चली। काफी मात्रा में हरी सब्जियां होने के चलते दुकानदारों को नुकसान उठाना पड़ा। औने-पौने दाम पर सब्जी बेचने वे मजबूर भी हुए।
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वेस्ली में दुकान न लगने देने की पहले से सूचना नहीं थी। जिसके चलते हम किसानों से माल खरीद लिए थे। अब न तो वेस्ली में दुकान लगाने को मिला न ही मंडी में ही, जिसके चलते हमारा काफी नुकसान हुआ। - राजू सोनकर, सब्जी कारोबारी।
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हम रोज कमाने व खाने वाले है, इसके बाद भी प्रशासन हमारा ध्यान नहीं दे रहा है। पहले से जानकारी रहीं होती तो हम किसानों से सब्जी नहीं खरीदे होते और किसानों को भी सब्जी लाने से मना कर दिए होते। - सज्जू, सब्जी कारोबारी।
बेलईसा मंडी से रविवार को आलू मंगाया था, उसे चौक मंडी स्थित अपनी दुकान में उतरवा रहा था लेकिन पुलिस ने उसे भी नहीं उतरवाने दिया। चालक को डांट-फटकार कर भगा दिया। जिला प्रशासन को अब मंडी खोल देनी चाहिए। - धर्मेंद्र कुमार, सब्जी कारोबारी।
किसानों से माल तो हम खरीद लिए लेकिन उसे बेच नहीं पाए। ज्यादातर सब्जियां हरी थी, जिसके चलते काफी नुकसान हुआ है। सड़क की पटरी आदि पर औने-पौने दाम पर कुछ सब्जियों को ही हम बेच सके है। - रमेश, सब्जी कारोबारी।