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मदरसा ‘सब पढ़ें सब बढ़ें’ नीति का अंग
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Fri, 26 Feb 2016 11:28 PM IST
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शुक्रवार को नरायनपुर नेवादा गांव स्थित जामिया फैजे आम के वार्षिक जलसे के मुख्य वक्ता दारुल उलूम देवबंद के मुफ्ती राशिद ने कहा कि मदरसा देश की ‘सब पढे़ं सब बढ़ें’ की नीति का ही अंग है। कुछ लोग मदरसों को बदनाम कर अपना राजनीतिक स्वार्थ चाहते हैं। मदरसा समाज को ऐसे लोग देता है, जो देश और समाज के लिए वफादारी का सही अर्थों में निर्वहन कर सकें।
कहा कि कुछ लोग हिंदू मुसलमानों के बीच दूरियां फैलाकर राजनैतिक रोटियां सेंकने की साजिश कर रहे हैं, जो काफी खतरनाक है। हमें सावधान रहने की आवश्यकता है। इस्लाम पूरी तरह मानवता के लिए गठित है। यह वह धर्म है, जहां भेदभाव, छुआछूत, ऊंचनीच तथा आतंकवाद का कोई स्थान नहीं है। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब ने कभी यह नहीं देखा कि वह कौन हैं, अपितु हर जरूरतमंद की मदद करना उनकी आदत थी। जामिया के प्रबंधक हबीबुर्रहमान कासमी ने कहा कि अगर पड़ोस में कोई गैर मुस्लिम परेशान है तो उसकी हर संभव सहायता करना ही सही मायने में इस्लाम है।
यदि हमारे दिल में दूसरों के प्रति हमदर्दी का जज्बा पैदा न हो तो हमें अपने ईमान का आंकलन करना चाहिए। अरबी के विद्वान जामेअतुर्रशाद के उस्ताद मौलाना अबूजर मदनी तथा गुरैनी के मौलाना अब्दुर्रहीम ने भी मानवता तथा इंसानियत के विषय में अपने-अपने विचार व्यक्त किए। वार्षिक जलसे की शुरुआत बांदा से आए कारी मजहर अली फारूकी के तिलावते कुरआन पाक से हुआ। संचालन तौसीफ खां ने किया। अंत में प्रबंधक हबीबुर्रहमान कासमी ने सभी का आभार प्रकट किया। इस मौके पर मौलाना राशिद कासमी, शादाब, मौलाना साबिर, कारी शमीम आदि मौजूद रहे।
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कहा कि कुछ लोग हिंदू मुसलमानों के बीच दूरियां फैलाकर राजनैतिक रोटियां सेंकने की साजिश कर रहे हैं, जो काफी खतरनाक है। हमें सावधान रहने की आवश्यकता है। इस्लाम पूरी तरह मानवता के लिए गठित है। यह वह धर्म है, जहां भेदभाव, छुआछूत, ऊंचनीच तथा आतंकवाद का कोई स्थान नहीं है। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब ने कभी यह नहीं देखा कि वह कौन हैं, अपितु हर जरूरतमंद की मदद करना उनकी आदत थी। जामिया के प्रबंधक हबीबुर्रहमान कासमी ने कहा कि अगर पड़ोस में कोई गैर मुस्लिम परेशान है तो उसकी हर संभव सहायता करना ही सही मायने में इस्लाम है।
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यदि हमारे दिल में दूसरों के प्रति हमदर्दी का जज्बा पैदा न हो तो हमें अपने ईमान का आंकलन करना चाहिए। अरबी के विद्वान जामेअतुर्रशाद के उस्ताद मौलाना अबूजर मदनी तथा गुरैनी के मौलाना अब्दुर्रहीम ने भी मानवता तथा इंसानियत के विषय में अपने-अपने विचार व्यक्त किए। वार्षिक जलसे की शुरुआत बांदा से आए कारी मजहर अली फारूकी के तिलावते कुरआन पाक से हुआ। संचालन तौसीफ खां ने किया। अंत में प्रबंधक हबीबुर्रहमान कासमी ने सभी का आभार प्रकट किया। इस मौके पर मौलाना राशिद कासमी, शादाब, मौलाना साबिर, कारी शमीम आदि मौजूद रहे।
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