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मानव जीवन में सतगुरु का विशेष महत्व
Guru poornima mahotsav
Updated Sun, 02 Aug 2015 10:45 PM IST
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गुरुपूजा के उद्देश्य से दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वावधान में रविवार को सिधारी स्थित राहुल प्रेक्षागृह में गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें आशुतोष महाराज की साध्वी शिष्याओं और साधु समाज ने अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी ब्रह्मेशानंद ने कहा कि मानव जीवन में सतगुरु का होना आवश्यक है। मानव संत के सानिध्य से ही सुसंस्कार को प्राप्त करता है। दीक्षा की प्राप्ति भी एक पूर्ण संत ही करवाता है। स्वामी अर्जुनानंद ने कहा कि आज समाज में विभिन्न प्रकार के संत भगवा धारण किए घूम रहे हैं। लेकिन संत की परिभाषा भेष नहीं ज्ञान हुआ करता है। संत सतगुरु हमारे जीवन में आकर केवल परमात्मा की बातें नहीं करते बल्कि वह घट के भीतर परमात्मा का दर्शन भी करवाते हैं। वह हमारे दिव्य नेत्रों को खोल देते हैं। कार्यक्रम का संचालन स्वामी प्रबुद्घानंद ने किया। इस मौके पर जोखू साहू, कैलाश प्रसाद, गोपाल जी, लकी, प्रह्लाद सिंह, कन्हैयालाल, उमेश, पवन, गौरीशंकर, शिवकुमार, हरेंद्र सिंह, मंशी बाबा, अंशू, डा. हवलदार सिंह, नंदलाल आदि मौजूद रहे।
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इस अवसर पर आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी ब्रह्मेशानंद ने कहा कि मानव जीवन में सतगुरु का होना आवश्यक है। मानव संत के सानिध्य से ही सुसंस्कार को प्राप्त करता है। दीक्षा की प्राप्ति भी एक पूर्ण संत ही करवाता है। स्वामी अर्जुनानंद ने कहा कि आज समाज में विभिन्न प्रकार के संत भगवा धारण किए घूम रहे हैं। लेकिन संत की परिभाषा भेष नहीं ज्ञान हुआ करता है। संत सतगुरु हमारे जीवन में आकर केवल परमात्मा की बातें नहीं करते बल्कि वह घट के भीतर परमात्मा का दर्शन भी करवाते हैं। वह हमारे दिव्य नेत्रों को खोल देते हैं। कार्यक्रम का संचालन स्वामी प्रबुद्घानंद ने किया। इस मौके पर जोखू साहू, कैलाश प्रसाद, गोपाल जी, लकी, प्रह्लाद सिंह, कन्हैयालाल, उमेश, पवन, गौरीशंकर, शिवकुमार, हरेंद्र सिंह, मंशी बाबा, अंशू, डा. हवलदार सिंह, नंदलाल आदि मौजूद रहे।
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