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रोक दिया था पार्क का निर्माण, बेबस साबित हुआ प्रशासन
Updated Mon, 02 Jul 2018 12:24 AM IST
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आजमगढ़। अंग्रेजों के जमाने के सरकारी बंगलों पर कब्जा तो जमाया ही गया, अवैध रूप से इसमें से जमीन का बैनामा भी कर दिया गया। इसने तीन-चार बिस्वे जमीन का जिसने बैनामा लिया उसने कई एकड़ के बंगले पर ही कब्जा जमा लिया। एक बंगले के पास स्थित जमीन को तत्कालीन स़ीडीओ ने पार्क बनवाने की ठानी तो उन्हें भी कार्य कराने से रोक दिया गया। प्रशासन भी बंगलों को खाली कराने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। अब एक बार फिर एसडीएम की ओर से बंगलों की खाली कराने की संस्तुति करने से कुछ उम्मीद जगी है।
शहर के रैदोपुर क्षेत्र में प्रशासन की ओर से एक्वायर जमीन को निर्माण, बागवानी आदि के लिए 1927 में लीज पर दिया गया था। लीज लेने वालों में श्रीपत नारायण सिंह, रामधीन राम और एक अन्य शामिल थे। ये जमीन उन्हें इस शर्त के साथ दी गई थी कि इसमें एसडीएम रहेंगे। उनके न रहने और खाली होने पर वो इसमें रह सकते थे। अधिकतम 99 वर्ष की लीज की सीमा काफी पहले समाप्त हो चुकी है। बंगलों को 30-30 साल पर रिन्यू किया जाता था। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, बंगले फ्री होल्ड भी नहीं हुए हैं। इसके बाद भी श्रीपत नारायण मिश्र के बंगले में पूर्वमंत्री दल सिंगार यादव, पूर्व एसडीएम रामधीन राम के बंगले में उनका परिवार और अन्य बंगले में कुछ जमीन पर बैनामा लेने का दावा करने वाले भाजपा नेता जनार्दन सिंह गौतम काबिज हैं। जमीन का बैनामा कैसे कर दिया गया और तीन-चार बिस्वे जमीन का बैनाम लेने वाले कई एकड़ में बने बंगले के मालिक कैसे बन बैठे, इस बारे में अधिकारी मौन हैं। और तो और एक तत्कालीन सीडीओ ने जनार्दन सिंह के बंगले के पास स्थिति जमीन को पार्क बनवाने की ठानी तो उन्होंने काम भी नहीं होने दिया। इसी जमीन पर सरकारी ट्यूबवेल और टंकी भी लगनी थी। उसे भी नहीं लगने दिया गया। बाद में उसे कहीं और स्थापित कर दिया गया। प्रशासन भी उनके सामने बेबस हो गया।
बंगलों की जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी गई है। शासन और डीएम से निर्देश मिलने के बाद बंगले को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी। - प्रकाश चंद्र, एसडीएम सदर
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कुछ बंगलों से संबंधित फाइलों पर विधिक राय मांगी गई है। फिलहाल आवंटन सही नहीं लग रहा है। फाइलों को अध्ययन कर शीघ्र ही रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी जाएगी। कार्रवाई के बारे में फैसला उन्हीं को लेना है। - सीपी राय, डीजीसी सिविल
बंगला मुझे नियमानुसार आवंटित किया गया है। मेरे पास सभी कागजात मौजूद हैं। कहने पर इसे प्रशासन को दिखा दिया जाएगा। - दल सिंगार यादव, पूर्व मंत्री
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शहर के रैदोपुर क्षेत्र में प्रशासन की ओर से एक्वायर जमीन को निर्माण, बागवानी आदि के लिए 1927 में लीज पर दिया गया था। लीज लेने वालों में श्रीपत नारायण सिंह, रामधीन राम और एक अन्य शामिल थे। ये जमीन उन्हें इस शर्त के साथ दी गई थी कि इसमें एसडीएम रहेंगे। उनके न रहने और खाली होने पर वो इसमें रह सकते थे। अधिकतम 99 वर्ष की लीज की सीमा काफी पहले समाप्त हो चुकी है। बंगलों को 30-30 साल पर रिन्यू किया जाता था। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, बंगले फ्री होल्ड भी नहीं हुए हैं। इसके बाद भी श्रीपत नारायण मिश्र के बंगले में पूर्वमंत्री दल सिंगार यादव, पूर्व एसडीएम रामधीन राम के बंगले में उनका परिवार और अन्य बंगले में कुछ जमीन पर बैनामा लेने का दावा करने वाले भाजपा नेता जनार्दन सिंह गौतम काबिज हैं। जमीन का बैनामा कैसे कर दिया गया और तीन-चार बिस्वे जमीन का बैनाम लेने वाले कई एकड़ में बने बंगले के मालिक कैसे बन बैठे, इस बारे में अधिकारी मौन हैं। और तो और एक तत्कालीन सीडीओ ने जनार्दन सिंह के बंगले के पास स्थिति जमीन को पार्क बनवाने की ठानी तो उन्होंने काम भी नहीं होने दिया। इसी जमीन पर सरकारी ट्यूबवेल और टंकी भी लगनी थी। उसे भी नहीं लगने दिया गया। बाद में उसे कहीं और स्थापित कर दिया गया। प्रशासन भी उनके सामने बेबस हो गया।
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बंगलों की जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी गई है। शासन और डीएम से निर्देश मिलने के बाद बंगले को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी। - प्रकाश चंद्र, एसडीएम सदर
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कुछ बंगलों से संबंधित फाइलों पर विधिक राय मांगी गई है। फिलहाल आवंटन सही नहीं लग रहा है। फाइलों को अध्ययन कर शीघ्र ही रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी जाएगी। कार्रवाई के बारे में फैसला उन्हीं को लेना है। - सीपी राय, डीजीसी सिविल
बंगला मुझे नियमानुसार आवंटित किया गया है। मेरे पास सभी कागजात मौजूद हैं। कहने पर इसे प्रशासन को दिखा दिया जाएगा। - दल सिंगार यादव, पूर्व मंत्री