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जयहिंद, बुढ़वा के बाद अब किसकी बारी
Updated Sat, 19 Aug 2017 12:51 AM IST
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आजमगढ़। पंद्रह दिन के भीतर मेंहनगर और मुबारकपुर थाना क्षेत्र में हुई दो अलग-अलग मुठभेड़ में डी- 9 गिरोह के सरगना और शार्प शूटर को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। इन दोनों के मारे जाने के बाद लोगों में यह चर्चा है कि अब किसकी बारी है। क्योंकि डी-9 गिरोह के सदस्य पूरे पूर्वांचल में फैले हुए हैं। यह लोग अपने सरगमा को छुड़ाने के लिए रुपये इकट्ठा कर रहे हैं, ताकि उसके जरिए अत्याधुनिक हथियार खरीदकर गिरोह को मजबूत बना सके। डी-9 गिरोह का मुख्य सरगमा तरवां थाना क्षेत्र का रहने वाला 50 हजार रुपये का ईनामी धर्मेंद्र सिंह रहा। उसने बहुत ही कम समय और कम उम्र में अपनी बड़ी गिरोह तैयार कर लिया। इस गिरोह के भय से पूर्वांचल के कई मंत्री, विधायक और व्यापारी जहां कांपते थे। वहीं जरायम की दुनिया के पुराने चेहरे भी भयभीत रहते थे। उन्हें अपनी बादशाहत खत्म होते दिख रही थी। सपा के शासनकाल में इस गिरोह ने आजमगढ़ के अलावा मऊ, वाराणसी, गाजीपुर आदि जिलों में ताबड़तोड़ कई बड़ी लूट और हत्या की घटनाओं को अंजाम देकर लोगों में भय पैदा कर दिया था। पुलिस विभाग के जानकारों की मानें तो इस गिरोह में ज्यादातर नए उम्र के लड़के शामिल हैं। वर्ष 2014 में इस गिरोह के सदस्यों ने मुबारकपुर थाने में कई बड़ी लूट की वारदात को अंजाम दिया। रानी की सराय थाने केे तात्कालीन एसओ राजेश यादव ने मुठभेड़ के दौरान मऊ जिले के कोपागंज थाना क्षेत्र के रहने वाले गिरोह के सक्रिय सदस्य लालू यादव और उसके तीन साथियों को गिरफ्तार किया। लालू यादव वर्तमान समय में लखीमपुर खिरी जेल में है। बताया जाता है कि धर्मेंद्र के बाद सुजीत बूढ़वा, लालू यादव और जयहिंद यादव मुख्य रुप से गिरोह को चला रहे थे। लालू यादव जेल में आने वाले नए लड़कों से संपर्क कर उन्हें अपने गिरोह से जोडने का काम करता है। धर्मेंद्र के मारे जाने और बूढ़वा, लालू के गिरफ्तार होने के बाद जयहिंद यादव के कंधे पर गिरोह की कमान और साथियों को जेल से बाहर निकालने की जिम्मेदारी थी। इसीलिए वह रुपये इकट्ठा करने के लिए सराफा कारोबारियों को फोन कर उनसे रंगदारी मांग रहा था। लेकिन तीन अगस्त के मेंहनगर थाना क्षेत्र के रामदास कुटी के पास हुए मुठभेड़ में जयहिंद के मारे जाने के बाद सदस्यों के जहां हौसले पस्त हो गए हैं। वहीं लोगों में अब इस बात की चर्चा है कि अब किसकी बारी है।
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