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भू-अभिलेखों में गड़बड़ी कर ताल की जमीन कराई अपने नाम
Updated Mon, 25 Sep 2017 11:39 PM IST
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आजमगढ़। मेंहनगर तहसील के मंगरावां में ताल की जमीन कुछ लोगों ने भू राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी कर अपना नाम दर्ज करा ली गई थी। प्रशासन ने जमीन से अतिक्रमण को हटाने के साथ ही ताल की जमीन पर दर्ज कब्जेदारों के नाम को खारिज कर पुन: ताल के नाम से दर्ज कराया और अब प्रशासन अभिलेखों में हेराफेरी करने वालों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
मंगरावां गांव में ताल की 7.786 एकड़ जमीन पर गांव के रज्जाक पुत्र सुलेमान ने अभिलेखों में हेराफेरी कर अपने नाम से दर्ज करा लिया। उनके बाद यह जमीन उनके पुत्रों अब्दुल खालिक, अब्दुल वारी, जउवार अहमद और शमसाद अहमद के नाम से दर्ज हो गई। अब्दुल खालिक की मौत के बाद यह जमीन उनके पुत्रों एहतेशाम खालिक, एहसान खालिक, सुल्तान खालिक, रिजवान खालिक, सोफियान खालिक, कामरान खालिक, इरफान खालिक और अबू फरान के नाम दर्ज हो गई। वहीं जब अब्दुल वारी की मौत हुई तो जमीन के अभिलेखों में उनके पुत्रों फैजान अहमद, जीशान अहमद, नोमान अहमद् और फुरकान अहमद के नाम से दर्ज हो गई। एंटी टास्क फोर्स द्वारा जब जमीनों पर हुए अवैध कब्जे को हटाने का कार्य किया जाने लगा तब इस बात का खुलासा हुआ। जांच के दौरान मामला सही पाए जाने पर चकबंदी अधिकारी फूलपुर ने कब्जेधारियों के नामों को खारिज कर ताल के नाम से दोबारा दर्ज कर दिया। वहीं जिलाधिकारी ने एसओसी को अभिलेखों में गड़बड़ी कर करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
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मंगरावां गांव में ताल की 7.786 एकड़ जमीन पर गांव के रज्जाक पुत्र सुलेमान ने अभिलेखों में हेराफेरी कर अपने नाम से दर्ज करा लिया। उनके बाद यह जमीन उनके पुत्रों अब्दुल खालिक, अब्दुल वारी, जउवार अहमद और शमसाद अहमद के नाम से दर्ज हो गई। अब्दुल खालिक की मौत के बाद यह जमीन उनके पुत्रों एहतेशाम खालिक, एहसान खालिक, सुल्तान खालिक, रिजवान खालिक, सोफियान खालिक, कामरान खालिक, इरफान खालिक और अबू फरान के नाम दर्ज हो गई। वहीं जब अब्दुल वारी की मौत हुई तो जमीन के अभिलेखों में उनके पुत्रों फैजान अहमद, जीशान अहमद, नोमान अहमद् और फुरकान अहमद के नाम से दर्ज हो गई। एंटी टास्क फोर्स द्वारा जब जमीनों पर हुए अवैध कब्जे को हटाने का कार्य किया जाने लगा तब इस बात का खुलासा हुआ। जांच के दौरान मामला सही पाए जाने पर चकबंदी अधिकारी फूलपुर ने कब्जेधारियों के नामों को खारिज कर ताल के नाम से दोबारा दर्ज कर दिया। वहीं जिलाधिकारी ने एसओसी को अभिलेखों में गड़बड़ी कर करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
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