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ब्लास्ट मामले में दो युवक हो चुके दोषी करार
Updated Wed, 29 Aug 2018 12:24 AM IST
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आजमगढ़। देश के विरोध में षड्यंत्र रचने वाले संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन से सक्रिय सदस्य के रूप में जिले के कई युवक जुड़े हुए थे। इनमें से कइयों का चेहरा बेनकाब हो चुका है, जबकि कई अभी भी गुप्त तरीके से सक्रिय हैं। जिनके नामों का खुलासा हो चुकी है उन पर एनआईए सहित तमाम एजेंसियों की तरफ से लाखों रुपये का इनाम घोषित कर दिया गया है। जिनकी पहचान नहीं हो सकी है, उनका डाटा जुटाया जा रहा है। विभिन्न शहरों में हुए बम धमाकों के मामले में अब तक दो युवकों को अदालत की तरफ से दोषी करार दिया जा चुका है। हैदराबाद में हुए ब्लास्ट के मामले में वहां की अदालत ने असदुल्लाह उर्फ हड्डी, उर्फ डैनियल को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई है। दूसरे दोषी तारिक कासमी को आजीवन कारावास की सजा सुना दी गई। इससे पुन: जिले का नाम सुर्खियों में है।
खुफिया विभाग की मानें तो प्रतिबंधित संगठन सिमी, इंडियन मुजाहिद्दीन सहित अन्य संगठन काफी दिनों से सक्रिय होकर काम कर रहे थे। गहन जांच पड़ताल के दौरान वर्ष 2007 में लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, फैजाबाद आदि के कचहरी में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में रानी की सराय थाने के सम्मोपुर आईमा गांव निवासी तारिक कासमी की गिरफ्तारी हुई। वर्ष 2008 में दिल्ली के बाटला एनकाउंटर में जिले के युवकों के मारे जाने और उनका नाम प्रकाश में आने पर पूरा खेल ही उजागर हो गया। यहां के ज्यादातर युवकों को यासिन भटकल ने ट्रेनिंग दी थी। इसी मामले में मूल रूप से देवगांव कोतवाली क्षेत्र के बैरीडीह गांव निवासी असदुल्ला उर्फ हड्डी को एनआईए ने नेपाल बार्डर से गिरफ्तार किया था। वर्ष 2016 में हैदराबाद में हुए एक बम धमाके के मामले में दोषी करार देते हुए अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी। असदुल्ला के फांसी की सजा वाली बात धीरे-धीरे लोगों के जेहन से उतर रही थी, कि लखनऊ कचहरी ब्लास्ट के मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सम्मोपुर आईमा गांव निवासी तारिक कासमी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा दी है।
खुफिया विभाग की मानें तो प्रतिबंधित संगठन सिमी, इंडियन मुजाहिद्दीन सहित अन्य संगठन काफी दिनों से सक्रिय होकर काम कर रहे थे। गहन जांच पड़ताल के दौरान वर्ष 2007 में लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, फैजाबाद आदि के कचहरी में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में रानी की सराय थाने के सम्मोपुर आईमा गांव निवासी तारिक कासमी की गिरफ्तारी हुई। वर्ष 2008 में दिल्ली के बाटला एनकाउंटर में जिले के युवकों के मारे जाने और उनका नाम प्रकाश में आने पर पूरा खेल ही उजागर हो गया। यहां के ज्यादातर युवकों को यासिन भटकल ने ट्रेनिंग दी थी। इसी मामले में मूल रूप से देवगांव कोतवाली क्षेत्र के बैरीडीह गांव निवासी असदुल्ला उर्फ हड्डी को एनआईए ने नेपाल बार्डर से गिरफ्तार किया था। वर्ष 2016 में हैदराबाद में हुए एक बम धमाके के मामले में दोषी करार देते हुए अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी। असदुल्ला के फांसी की सजा वाली बात धीरे-धीरे लोगों के जेहन से उतर रही थी, कि लखनऊ कचहरी ब्लास्ट के मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सम्मोपुर आईमा गांव निवासी तारिक कासमी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा दी है।
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