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बंजर, पोखरी आदि पर अभिलेखों में हेराफेरी कर जमाया कब्जा
Updated Mon, 27 Nov 2017 11:50 PM IST
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आजमगढ़। भू-माफियाओं के खिलाफ चल रहे अभियान में रोज नए मामले सामने आ रहे हैं। अब सदर तहसील के बरसड़ा खालसा और नवली के साथ ही लालगंज तहसील के भरथीपुर गांव में भी ग्राम समाज की जमीन पर भी अभिलेखों में हेराफेरी कर कब्जा करने के मामले का खुलासा हुआ है। एसओसी एसपी राय ने अपनी जांच आख्या जिलाधिकारी को सौंपते हुए कार्रवाई की संस्तुति की है।
शासन के निर्देश पर एंटी टास्क फोर्स का गठन किया गया। टीमें जब गांवों में पहुुंचकर ऐसी जमीनों की तलाश करने लगी तो एक और मामला सामने आया। जांच टीम ने जब अभिलेखों की जांच से जमीन की पुष्टि करने पहुंची वहां अभिलेखों में बड़े पैमाने पर धांधली का मामला प्रकाश में आने लगा। किसी गांव के अभिलेख गायब मिले तो किसी गांव में ग्राम समाज की जमीन के अभिलेख में हेराफेरी कर उसमें किसी ने अपना नाम दर्ज करा लिया है। तब जिलाधिकारी ने इसके लिए एक तीन सदस्यीय टीम का गठन कर दिया जो अभिलेखों की जांच कर रही है। इसी क्रम में सदर तहसील के दो गांवों और लालगंज तहसील के एक गांव में अभिलेखों में हेराफेरी कर जमीन कब्जा करने का मामला प्रकाश में आया। इस पर एसओसी ने अपनी जांच आख्या के साथ जिलाधिकारी से दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की संस्तुति की।
तीनों गांवों के अभिलेखों में हेराफेरी कर कुछ लोगों ने ऊसर, पोखरी, तालाब, पशुचर, भीटा आदि की जमीन पर अपना नाम दर्ज करा लिया गया था। जांच के दौरान मामला संज्ञान में आने पर उक्त भूमि से सभी का नाम निरस्त कर उक्त भूमि को ग्राम समाज के खाते में दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की संस्तुति ल्रे द्वारा जिलाधिकारी से कर दी गई है।
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श्रीप्रकाश राय, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी।
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केस- एक
सदर तहसील के बड़सरा खालसा गांव के तालाब, पोखरी, पशुचर, बंजर, खलिहान, भीटा, ऊसर आदि ग्राम समाज के जमीनों की जांच में एसओसी श्रीप्रकाश राय ने पाया कि संदिग्ध फर्जी और अनाधिकृत प्रविष्टियों के चलते पशुचर भूमि के खाते में पूर्व में कुल 36 गाटे जिसका क्षेत्रफल 30.856 एकड़ दर्ज था। जबकि वर्तमान में इस मद में केवल दो गाटे जिसका क्षेत्रफल .114 कड़ी अवशेष है। इसी प्रकार बंज में पूर्व गाटा संख्या 75 का कुल रकबा 71.236 एकड़ था। वर्तमान में 11 गाटों की .625 कड़ी भूमि अवशेष है। खलिहान के नाम से पहले 2.114 एकड़ जमीन दर्ज थी जो वर्तमान में केवल र.256 कड़ी अवशेष है। खाद गड्ढ़े के नाम पर 1.065 एकड़ जमीन दर्ज थी जो वर्तमान में .494 ही अवशेष है। इसी तरह से ताल के खाते में पहले 3.913 एकड़ जमीन थी जो वर्तमान में 2.728 अवशेष है। पोखरी के खाने में पहले 16 गाटों में 4.025 एकड़ जमीन थी जो वर्तमान में सात गाटों में 3.605 अवशेष है।ऊसर के खाते में पहले 56 गाटे की 25.650 एकड़ भूमि थी जो अब वर्तमान में 11 गाटों में 1.977 एकड़ ही अवशेष है। इसी तरह से भीटा के खाते में पूर्व में 24 गाटों में कुल 4.404 एकड़ भूमि जो वर्तमान में सात गाटे में 2.35 एकड़ में अवशेष है।
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केस- दो
सदर तहसील के नवली गांव में अभिलेखों की जांच में एसओसी ने पाया कि बंदोबस्त में ताल के खाते में कुल 28.531 एकड़ जमीन दर्ज थी। लेकिन संदिग्ध, फर्जी और अनाधिकृत प्रविष्टियों के चलते अब ताल के मद में 6.404 एकड़ जमीन अवशेष है। ग्राम सभा के गाटा संख्या 328 में 1.660 एकड़ जमीन पोखरी के खाते में दर्ज थी लेकिन अब इस खाते में कोई जमीन अवशेष नहीं है।
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केस तीन
लालगंज तहसील के भरथीपुर गांव में ग्रामसमाज के गाटा संख्या 584 के पांच गाटों का कुल रकबा 12.735 एकड़ दर्ज है। लेकिन इसमें संदिग्ध अमल दरामद के आधार पर अब पोखरी के खाते में केवल 8.680 एकड़ जमीन अवशेष है। इसी प्रकार खाता संख्या 586 तालाब के कुल तीन गोटों में 85.321 एकड़ जमीन दर्ज है। लेकिन बिना किसी आदेश और अमल दरामद के अभिलेखों में हेराफेरी की गई। जिसके कारण दर्ज फर्जी प्रविष्टी से तालाब की जमीन अब मात्र 72.351 एकड़ ही अवशेष है।
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शासन के निर्देश पर एंटी टास्क फोर्स का गठन किया गया। टीमें जब गांवों में पहुुंचकर ऐसी जमीनों की तलाश करने लगी तो एक और मामला सामने आया। जांच टीम ने जब अभिलेखों की जांच से जमीन की पुष्टि करने पहुंची वहां अभिलेखों में बड़े पैमाने पर धांधली का मामला प्रकाश में आने लगा। किसी गांव के अभिलेख गायब मिले तो किसी गांव में ग्राम समाज की जमीन के अभिलेख में हेराफेरी कर उसमें किसी ने अपना नाम दर्ज करा लिया है। तब जिलाधिकारी ने इसके लिए एक तीन सदस्यीय टीम का गठन कर दिया जो अभिलेखों की जांच कर रही है। इसी क्रम में सदर तहसील के दो गांवों और लालगंज तहसील के एक गांव में अभिलेखों में हेराफेरी कर जमीन कब्जा करने का मामला प्रकाश में आया। इस पर एसओसी ने अपनी जांच आख्या के साथ जिलाधिकारी से दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की संस्तुति की।
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तीनों गांवों के अभिलेखों में हेराफेरी कर कुछ लोगों ने ऊसर, पोखरी, तालाब, पशुचर, भीटा आदि की जमीन पर अपना नाम दर्ज करा लिया गया था। जांच के दौरान मामला संज्ञान में आने पर उक्त भूमि से सभी का नाम निरस्त कर उक्त भूमि को ग्राम समाज के खाते में दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की संस्तुति ल्रे द्वारा जिलाधिकारी से कर दी गई है।
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श्रीप्रकाश राय, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी।
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केस- एक
सदर तहसील के बड़सरा खालसा गांव के तालाब, पोखरी, पशुचर, बंजर, खलिहान, भीटा, ऊसर आदि ग्राम समाज के जमीनों की जांच में एसओसी श्रीप्रकाश राय ने पाया कि संदिग्ध फर्जी और अनाधिकृत प्रविष्टियों के चलते पशुचर भूमि के खाते में पूर्व में कुल 36 गाटे जिसका क्षेत्रफल 30.856 एकड़ दर्ज था। जबकि वर्तमान में इस मद में केवल दो गाटे जिसका क्षेत्रफल .114 कड़ी अवशेष है। इसी प्रकार बंज में पूर्व गाटा संख्या 75 का कुल रकबा 71.236 एकड़ था। वर्तमान में 11 गाटों की .625 कड़ी भूमि अवशेष है। खलिहान के नाम से पहले 2.114 एकड़ जमीन दर्ज थी जो वर्तमान में केवल र.256 कड़ी अवशेष है। खाद गड्ढ़े के नाम पर 1.065 एकड़ जमीन दर्ज थी जो वर्तमान में .494 ही अवशेष है। इसी तरह से ताल के खाते में पहले 3.913 एकड़ जमीन थी जो वर्तमान में 2.728 अवशेष है। पोखरी के खाने में पहले 16 गाटों में 4.025 एकड़ जमीन थी जो वर्तमान में सात गाटों में 3.605 अवशेष है।ऊसर के खाते में पहले 56 गाटे की 25.650 एकड़ भूमि थी जो अब वर्तमान में 11 गाटों में 1.977 एकड़ ही अवशेष है। इसी तरह से भीटा के खाते में पूर्व में 24 गाटों में कुल 4.404 एकड़ भूमि जो वर्तमान में सात गाटे में 2.35 एकड़ में अवशेष है।
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केस- दो
सदर तहसील के नवली गांव में अभिलेखों की जांच में एसओसी ने पाया कि बंदोबस्त में ताल के खाते में कुल 28.531 एकड़ जमीन दर्ज थी। लेकिन संदिग्ध, फर्जी और अनाधिकृत प्रविष्टियों के चलते अब ताल के मद में 6.404 एकड़ जमीन अवशेष है। ग्राम सभा के गाटा संख्या 328 में 1.660 एकड़ जमीन पोखरी के खाते में दर्ज थी लेकिन अब इस खाते में कोई जमीन अवशेष नहीं है।
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केस तीन
लालगंज तहसील के भरथीपुर गांव में ग्रामसमाज के गाटा संख्या 584 के पांच गाटों का कुल रकबा 12.735 एकड़ दर्ज है। लेकिन इसमें संदिग्ध अमल दरामद के आधार पर अब पोखरी के खाते में केवल 8.680 एकड़ जमीन अवशेष है। इसी प्रकार खाता संख्या 586 तालाब के कुल तीन गोटों में 85.321 एकड़ जमीन दर्ज है। लेकिन बिना किसी आदेश और अमल दरामद के अभिलेखों में हेराफेरी की गई। जिसके कारण दर्ज फर्जी प्रविष्टी से तालाब की जमीन अब मात्र 72.351 एकड़ ही अवशेष है।