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2015 स्थानों पर आज जलेगी होलिका

Thu, 01 Mar 2018 12:28 AM IST
Updated Thu, 01 Mar 2018 12:28 AM IST
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2015 स्थानों पर आज जलेगी होलिका
आजमगढ़। प्रत्येक गांव में होलिका दहन समारोह समिति का गठन किया गया है जो गुरुवार को जिले के 2015 स्थानों पर होलिका दहन पर नजर रखेगी। क्षेत्र के प्रत्येक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पुलिस मित्र और एसपीओ बनाए गए लोगों को भी सतर्क कर दिया गया है।
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एसपी अजय कुमार साहनी ने बताया कि दो वर्ष पूर्व होली के दिन हुए निजामाबाद थाना क्षेत्र के खुदादादपुर गांव में सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। इससे सबक लेते हुए देखते शांति पूर्वक त्यौहार संपन्न कराना चुनौती पूर्ण है। बनाई गईं होलिका दहन समारोह समिति में गांव के दस लोग शामिल हैं। गांव के प्रत्येक गतिविधियों पर नजर रखते हुए सूचना देने की इनकी जवाबदेही तय की गई है। चयनित पुलिस मित्र, एसपीओ, पुलिस के चौकीदार आदि भी को भी क्षेत्र के गतिविधियों पर नजर रखने को लगा दिया गया है। इन लोगों की सूचना पर पुलिस शरारतीतत्वों के विरुद्ध पहले ही प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। एसपी ने बताया कि जिले के 2015 स्थानों पर गुरुवार को होलिका जलाई जाएगी। इसमें शहर कोतवाल के 66, सिधारी के 62, रानी की सराय के 23, कंधरापुर के 83, मुबारकपुर के 121, जहानागंज के 83, निजामाबाद के 47, गंभीरपुर के 27, देवगांव के 128, मेहनाजपुर के 71, बरदह के 30, मेंहनगर के 115, तरवां के 60, जीयनपुर के 151, महराजगंज के 82, बिलरियागंज के 48, अतरौलिया के 40, अहरौला के 61, कप्तानगंज के 78, फूलपुर के 134, पवई के 132, सरायमीर के 65 और दीदारगंज के 116 गांव शामिल हैं।
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छह बजकर 58 मिनट बाद है होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
आजमगढ़। पूरा जनपद होली का पर्व धूमधाम से मनाने की तैयारी में जुटा हुआ है। बाजारों में होली के सामानों की खरीदारी तेज हो गई। दुकानें तरह-तरह के रंगों और डिजाइनदार पिचकरियों से पट चुकी हैं। सामानों की खरीदारी के लिए लोगों का रेला भी उमड़ने लगा है।
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ज्योतिषाचार्य गिरिजाशंकर पाठक की मानें तो इस बार एक मार्च की सुबह और बजे से पूर्णिमा लग रही है। इसी दिन भद्रा भी लग रही है। भद्रा काल में होलिका का दहन नहीं हो सकता। लेकिन भद्राकाल शाम छह बजकर 58 मिनट पर समाप्त हो रहा है। इसके बाद किसी भी समय होलिका दहन हो सकता है। होलिका दहन फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को भद्रा समय समाप्त होने के बाद किया जाएगा। भद्रा में होलिका दहन करने से जनसमूह का नाश होता है। प्रतिपदा चतुर्दशी भद्रा और दिन में होलिका जलाना सर्वथा त्याग योग्य है। संयोगवश यदि होलिका जला दी जाए तो वहां के राजा, राज नगर और मनुष्य एक ही वर्ष में हीन हो जाते हैं।

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इस तरह से करें होलिका पूजन
आजमगढ़। ज्योतिषाचार्य गिरिजाशंकर पाठक की मानें तो होली की पूजा के लिए रोली, कच्चा सूत, चावल, पुष्प, साबुत हल्दी, बतासे, श्रीफल और बुल्ले आदि इकट्ठा कर लें। इसके बाद होली पूजन के स्थान पर पहुंच कर पूजन करें। अक्षत हाथ में उठाएं भगवान गणेश, अंबिका का ध्यान करें और होलिका पर अक्षत अर्पित कर दें। इकसे बाद भक्त प्रहलाद का नाम लें और पुष्प चढ़ाएं। अब भगवान नरसिंह का ध्यान करते हुए पंचोपचार पूजन करें। कच्चा सूत हाथ में लेकर होलिका पर लपेटते हुए हाथ जोड़कर परिक्रमा करें। अंत में लोटे में भरा जल रही होलिका पर चढ़ा दें।
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