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Auraiya News: कोरोना काल में बंद ट्रेनों का ठहराव अब तक नहीं
Sat, 19 Sep 2026 12:21 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sat, 19 Sep 2026 12:21 AM IST
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मनोज पोरवाल
अछल्दा। दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग पर स्थित जिले का प्रमुख रेलवे स्टेशन इन दिनों बदहाली और रेलवे की उपेक्षा का शिकार है। कभी क्षेत्र के यात्रियों के लिए सहूलियत का केंद्र रहने वाला यह स्टेशन अब महज मेमू ट्रेनों के भरोसे रह गया है। कोरोना काल के दौरान बंद की गईं एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव वर्षों बीत जाने के बाद भी दोबारा शुरू नहीं हो सका है, इससे यहां के लोगों और व्यापारियों में असंतोष है।
दिल्ली-हावड़ा रूट पर जिले में कंचौसी, फफूंद और अछल्दा स्टेशन आते हैं। कंचौसी और फफूंद में पैसेंजर से लेकर एक्सप्रेस व शताब्दी तक का ठहराव है, जहां से लोग दिल्ली, हावड़ा, लखनऊ और जम्मू तक की यात्रा आसानी से कर लेते हैं। वहीं अछल्दा स्टेशन पर एक भी एक्सप्रेस ट्रेन नहीं रुकती। करीब एक दशक पहले तक यहां जनता एक्सप्रेस, उद्यान आभा तूफान एक्सप्रेस और महानंदा एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों का ठहराव हुआ करता था।
कोरोना काल में ट्रेनों का संचालन प्रभावित होने के साथ ही रेलवे प्रशासन ने अछल्दा में महानंदा एक्सप्रेस का ठहराव भी समाप्त कर दिया। वर्तमान में यहां केवल पांच मेमू ट्रेनें ही रुकती हैं, जो अक्सर देरी से चलती हैं। लंबे सफर पर जाने के लिए लोगों को मजबूरन फफूंद या इटावा स्टेशन का रुख करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों द्वारा सही पैरवी न किए जाने और रेलवे अधिकारियों को बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
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ठहराव बंद होने से प्रभावित हो रहा व्यापार
फोटो -08- मनोज पोरवाल
कोरोना काल से पहले अछल्दा में कई एक्सप्रेस ट्रेनें रुकती थीं, इससे व्यापार और आवागमन आसान था। ठहराव बंद होने से क्षेत्र का व्यापार ठप पड़ रहा है। कई बार ज्ञापन दिए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
- मनोज पोरवाल
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फोटो -09- कुलदीप गुप्ता
मेमू ट्रेनें कभी समय पर नहीं आतीं। इमरजेंसी या लंबे सफर के लिए हमें इटावा या फफूंद जाना पड़ता है, इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। जन प्रतिनिधियों को इस पर ध्यान देना चाहिए।
- कुलदीप गुप्ता
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ट्रेनों का किसी स्टेशन पर ठहराव कई तकनीकी और प्रशासनिक बिंदुओं पर निर्भर करता है, जिसमें स्टेशन की श्रेणी और टिकटों की बिक्री मुख्य है। अछल्दा स्टेशन की वर्तमान स्थिति और यात्रियों की मांग के संबंध में जानकारी जुटाई जाएगी। यदि आवश्यकता महसूस होती है तो मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाकर उचित कदम उठाया जाएगा।
-अमित सिंह, जन संपर्क अधिकारी, प्रयागराज मंडल
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दिल्ली-हावड़ा रूट पर जिले में कंचौसी, फफूंद और अछल्दा स्टेशन आते हैं। कंचौसी और फफूंद में पैसेंजर से लेकर एक्सप्रेस व शताब्दी तक का ठहराव है, जहां से लोग दिल्ली, हावड़ा, लखनऊ और जम्मू तक की यात्रा आसानी से कर लेते हैं। वहीं अछल्दा स्टेशन पर एक भी एक्सप्रेस ट्रेन नहीं रुकती। करीब एक दशक पहले तक यहां जनता एक्सप्रेस, उद्यान आभा तूफान एक्सप्रेस और महानंदा एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों का ठहराव हुआ करता था।
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कोरोना काल में ट्रेनों का संचालन प्रभावित होने के साथ ही रेलवे प्रशासन ने अछल्दा में महानंदा एक्सप्रेस का ठहराव भी समाप्त कर दिया। वर्तमान में यहां केवल पांच मेमू ट्रेनें ही रुकती हैं, जो अक्सर देरी से चलती हैं। लंबे सफर पर जाने के लिए लोगों को मजबूरन फफूंद या इटावा स्टेशन का रुख करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों द्वारा सही पैरवी न किए जाने और रेलवे अधिकारियों को बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
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ठहराव बंद होने से प्रभावित हो रहा व्यापार
फोटो -08- मनोज पोरवाल
कोरोना काल से पहले अछल्दा में कई एक्सप्रेस ट्रेनें रुकती थीं, इससे व्यापार और आवागमन आसान था। ठहराव बंद होने से क्षेत्र का व्यापार ठप पड़ रहा है। कई बार ज्ञापन दिए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
- मनोज पोरवाल
फोटो -09- कुलदीप गुप्ता
मेमू ट्रेनें कभी समय पर नहीं आतीं। इमरजेंसी या लंबे सफर के लिए हमें इटावा या फफूंद जाना पड़ता है, इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। जन प्रतिनिधियों को इस पर ध्यान देना चाहिए।
- कुलदीप गुप्ता
ट्रेनों का किसी स्टेशन पर ठहराव कई तकनीकी और प्रशासनिक बिंदुओं पर निर्भर करता है, जिसमें स्टेशन की श्रेणी और टिकटों की बिक्री मुख्य है। अछल्दा स्टेशन की वर्तमान स्थिति और यात्रियों की मांग के संबंध में जानकारी जुटाई जाएगी। यदि आवश्यकता महसूस होती है तो मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाकर उचित कदम उठाया जाएगा।
-अमित सिंह, जन संपर्क अधिकारी, प्रयागराज मंडल

मनोज पोरवाल