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कौन पोंछेगा इन दुखी लोगों के आंसू
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया
Updated Wed, 15 Apr 2015 12:23 AM IST
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बेमौसम बारिश से फसली नुकसान के दायरे में आने वाले किसानों तक पहुंचने वाली मदद से लघु सीमांत किसानों का तबका पूरी तरह अछूता है। इनमें कुछ ऐसे किसान शामिल हैं, जिनका न तो बैंक में खाता है, न ही किसी सहकारी समितियों से संबद्ध हैं और न ही केसीसी धारक हैं।
अपनी खुद की पूंजी से कृषि कार्य करने वाले ग्राम दयालपुर के किसानों की दशा को बयां करती अमर उजाला की टीम
अब हम क्या करें- औरैया। धक्के खाकर भी केसीसी और सरकारी फसली ऋण लेने में नाकाम रहे ग्राम दयालपुर के किसान मनोज कुमार ने 10 विस्वा जमीन पर अरहर की फसल बोई थी। लहलहाती फसल देख मनोज ने कई सपने देख रखे थे, लेकिन बेमौसम बारिश ने उसके सपनों पर पानी फेर दिया।
मनोज की अरहर फसल पूरी तरह खत्म हो गई। गेहूं की फसल 80 फीसदी प्रभावित हुई है। दु:खती रग पर हाथ रखने पर मनोज का कहना था कि अब हम क्या करें।
क्या हम तक पहुंचेगी राहत राशि - औरैया। तय मानकों से अधिक बैंकें ब्याज वसूलती हैं। ऐसा गांव के किसानों से सुन रखा था। इसलिए न तो हमने केसीसी लिया और न ही किसी बैंक से फसली ऋण लेने का प्रयास किया। जमा पूंजी और रिश्तेदारों से मांग कर दो एकड़ भूमि गेहूं तथा 10 विस्वा में लाही बोई थी।
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बेमौसम बारिश व तेज हवा से सरसोें की फसल पूरी नष्ट हो गई। मुआवजे की आस भी नहीं है। चिंता तो यह है कि गेहूं की फसल भी खाने लायक तक नहीं हुई है। ऐसे में क्या हमारे जैसे किसानों तक मुख्यमंत्री की राहत राशि पहुंचेगी।
टेढ़ी खीर बनी फसल कटाई- बेमौसम बारिश से खराब हुई फसलों की कटाई कराना किसानों के लिए आफत है। बारिश से आई गेहूं फसल में आई नमी ने किसानों के फसल कटाई की धार को मुथरी कर दिया है। थ्रेसर संचालकों ने भी कम उत्पादन देख गेहूं फसल की मड़ाई करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
बता दें कि गेहूं की मड़ाई को थ्रेसर संचालकों पारिश्रमिक के रूप में किसानों को प्रति कुंतल आठ से 10 किलो गेहूं देना पड़ता है। बेमौसम बारिश से बर्बाद हुई फसल के चलते पिछली बार तक एक बीघे में 10 से 12 कुंतल निकलने वाला अनाज इस बार अधिकतम दो से तीन कुंतल तक ही निकल रहा है।
कटाई खर्च निकलता न देख थ्रेसर संचालक भी गेहूं की मढ़ाई करने से इनकार कर रहे हैं।
बेमौसम बारिश से वाकई में किसानों का बहुत नुकसान हुआ है। शासन के निर्देश पर नुकसान की जद में आए किसानों की फसल को सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन रिपोर्ट से ही किसानों को क्षति पूर्ति दिया जाएगा। जितेंद्र श्रीवास्तव, एसडीएम सदर
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अपनी खुद की पूंजी से कृषि कार्य करने वाले ग्राम दयालपुर के किसानों की दशा को बयां करती अमर उजाला की टीम
अब हम क्या करें- औरैया। धक्के खाकर भी केसीसी और सरकारी फसली ऋण लेने में नाकाम रहे ग्राम दयालपुर के किसान मनोज कुमार ने 10 विस्वा जमीन पर अरहर की फसल बोई थी। लहलहाती फसल देख मनोज ने कई सपने देख रखे थे, लेकिन बेमौसम बारिश ने उसके सपनों पर पानी फेर दिया।
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मनोज की अरहर फसल पूरी तरह खत्म हो गई। गेहूं की फसल 80 फीसदी प्रभावित हुई है। दु:खती रग पर हाथ रखने पर मनोज का कहना था कि अब हम क्या करें।
क्या हम तक पहुंचेगी राहत राशि - औरैया। तय मानकों से अधिक बैंकें ब्याज वसूलती हैं। ऐसा गांव के किसानों से सुन रखा था। इसलिए न तो हमने केसीसी लिया और न ही किसी बैंक से फसली ऋण लेने का प्रयास किया। जमा पूंजी और रिश्तेदारों से मांग कर दो एकड़ भूमि गेहूं तथा 10 विस्वा में लाही बोई थी।
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बेमौसम बारिश व तेज हवा से सरसोें की फसल पूरी नष्ट हो गई। मुआवजे की आस भी नहीं है। चिंता तो यह है कि गेहूं की फसल भी खाने लायक तक नहीं हुई है। ऐसे में क्या हमारे जैसे किसानों तक मुख्यमंत्री की राहत राशि पहुंचेगी।
टेढ़ी खीर बनी फसल कटाई- बेमौसम बारिश से खराब हुई फसलों की कटाई कराना किसानों के लिए आफत है। बारिश से आई गेहूं फसल में आई नमी ने किसानों के फसल कटाई की धार को मुथरी कर दिया है। थ्रेसर संचालकों ने भी कम उत्पादन देख गेहूं फसल की मड़ाई करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
बता दें कि गेहूं की मड़ाई को थ्रेसर संचालकों पारिश्रमिक के रूप में किसानों को प्रति कुंतल आठ से 10 किलो गेहूं देना पड़ता है। बेमौसम बारिश से बर्बाद हुई फसल के चलते पिछली बार तक एक बीघे में 10 से 12 कुंतल निकलने वाला अनाज इस बार अधिकतम दो से तीन कुंतल तक ही निकल रहा है।
कटाई खर्च निकलता न देख थ्रेसर संचालक भी गेहूं की मढ़ाई करने से इनकार कर रहे हैं।
बेमौसम बारिश से वाकई में किसानों का बहुत नुकसान हुआ है। शासन के निर्देश पर नुकसान की जद में आए किसानों की फसल को सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन रिपोर्ट से ही किसानों को क्षति पूर्ति दिया जाएगा। जितेंद्र श्रीवास्तव, एसडीएम सदर