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एक यूनिट ब्लड बचाएगा तीन का जीवन, आ गई ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन मशीन

Wed, 13 Jul 2022 12:09 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 13 Jul 2022 12:09 AM IST
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One unit of blood will save the lives of three, the blood component separation machine has arrived
50 शैया अस्पताल के स्टोर रूम में रखी ब्लड कंपोनेट सेपरेटर मशीन। संवाद - फोटो : AURAIYA
औरैया। जिले में नौ साल बाद जल्द ही ब्लड बैंक का संचालन फिर से शुरू होने की उम्मीद जगी है। दिल्ली से कुछ दिनों पहले ही 50 शैया संयुक्त जिला चिकित्सालय में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन मशीन भेजी गई है। इस मशीन की मदद से एक यूनिट ब्लड से तीन मरीजों की जिंदगी बचाई जा सकेगी। जिले की करीब 15 लाख से अधिक आबादी को राहत मिलेगी।
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मानव के खून में प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और पैक्ड रेड ब्लड सेल्स जैसे कंपोनेंट होते हैं। जिले में ब्लड बैंक का संचालन न होने की वजह से लोगों को इन तीनों के लिए इटावा, कानपुर, सैफई, आगरा व लखनऊ आदि जगहों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसके अलावा निजी लैब से इन तीनों सेल्स को लेने के लिए मरीजों के तीमारदारों को मोटी रकम चुकानी पड़ती है।
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ऐसे में जिले के 15 लाख लोगों के लिए राहत भरी खबर है कि 50 शैया संयुक्त जिला चिकित्सालय में स्थापित ब्लड बैंक जल्द ही शुरू होगा। दिल्ली से आई इस मशीन की मदद से एक यूनिट ब्लड से तीन लोगों की जान बचाई जा सकेगी।
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सीएमएस डॉ. राजेश मोहन गुप्ता ने बताया कि ब्लड बैंक का संचालन जल्द शुरू होने की उम्मीद है। इसके शुरू होने पर जिले के लोगों को काफी लाभ मिलेगा। दिल्ली से भेजी गई कंपोनेंट सेपरेशन मशीन भी अस्पताल में आ चुकी है। ब्लड बैंक व इस मशीन का संचालन होने पर प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और पैक्ड रेड ब्लड सेल्स के लिए मरीजों व उनके तीमारदारों को अन्य जिलों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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ब्लड कंपोनेंट मशीन खून में शामिल तत्वों को करेगी अलग-अलग
पैथोलॉजिस्ट श्वेता ददेरिया ने बताया कि ब्लड कंपोनेंट मशीन खून में शामिल तत्वों को अलग-अलग कर देती है। यह मशीन लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी), श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी), प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (एफएफपी) को अलग-अलग कर देता है। थैलीसीमिया के मरीजों को आरबीसी, डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स, जले मरीजों को प्लाज्मा, एफएफपी और एड्स के मरीजों को डब्ल्यूबीसी की जरूरत पड़ती है। ऐसी स्थिति में मरीज को पूरी बोतल खून चढ़ाने की जगह आवश्यक तत्व ही चढ़ाए जाते हैं। एक बोतल खून से तीन अलग-अलग मरीजों की जरूरत को पूरा किया जा सकता है।

 ब्लड बैंक में लगे ताले की खुलने की जागी उम्मीद। संवाद

ब्लड बैंक में लगे ताले की खुलने की जागी उम्मीद। संवाद- फोटो : AURAIYA

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