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मनुष्य को जीवन में कभी अहंकार नहीं करना चाहिए
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कथा सुनाते आचार्य। संवाद
- फोटो : AURAIYA
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अछल्दा। ब्लाक क्षेत्र के वघईपुर खुमानपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन मंगलवार को आचार्य ने गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार ही पतन का कारण है।
आचार्य सुबोध ने मंगलवार को गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए कहा कि देवराज इंद्र के अहंकार को तोड़ने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुल वासियों को इंद्र की पूजा बंद कराकर गोवर्धन पर्वत की पूजा कराई। इससे नाराज होकर इंद्र ने गोकुल पर मूसलाधार बारिश कर अपना प्रकोप बरसाना शुरू किया तो भगवान श्रीकृष्ण ने
गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठाकर गोकुल वासियों की रक्षा की व इंद्र का अहंकार चकनाचूर कर दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में कभी भी अहंकार नहीं पालना चाहिए क्योंकि यही अहंकार उसके पतन का कारण बनता है। इस दौरान कानपुर से आए कलाकारों ने सुंदर झांकियां पेश कर श्रद्धालुओं का मन मोहा।
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आचार्य सुबोध ने मंगलवार को गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए कहा कि देवराज इंद्र के अहंकार को तोड़ने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुल वासियों को इंद्र की पूजा बंद कराकर गोवर्धन पर्वत की पूजा कराई। इससे नाराज होकर इंद्र ने गोकुल पर मूसलाधार बारिश कर अपना प्रकोप बरसाना शुरू किया तो भगवान श्रीकृष्ण ने
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गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठाकर गोकुल वासियों की रक्षा की व इंद्र का अहंकार चकनाचूर कर दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में कभी भी अहंकार नहीं पालना चाहिए क्योंकि यही अहंकार उसके पतन का कारण बनता है। इस दौरान कानपुर से आए कलाकारों ने सुंदर झांकियां पेश कर श्रद्धालुओं का मन मोहा।

भागवत कथा सुनते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : AURAIYA
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