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Auraiya News: लेखपालों ने फर्जीवाड़ा कर रिश्तेदारों के नाम कर दी देवकली मंदिर की जमीन

Sat, 26 Apr 2025 12:18 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Sat, 26 Apr 2025 12:18 AM IST
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Lekhpals fraudulently transferred the land of Devkali temple to their relatives
- मामला कोर्ट में पहुंचने पर लेखपाल ने दूसरे नायब तहसीलदार से रिपोर्ट लगा पोर्टल पर कर दिया निस्तारण
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- जांच में दोषी मिलने पर तीन लेखपाल व उनके करीबियों के खिलाफ कानूनगो ने दर्ज कराई रिपोर्ट



संवाद न्यूज एजेंसी

औरैया। महाकालेश्वर मंदिर (देवकली धाम) की बेशकीमती जमीन पर लेखपालों की नीयत डोल गई। लेखपाल ने फर्जीवाड़ा कर साथी लेखपालों के रिश्तेदारों के नाम जमीन दर्ज कर अवैध प्लॉटिंग की। वहीं, प्लॉट खरीदने वाले ग्राहकों से भी हेराफेरी की। इस मामले में पीड़ित ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो आरोपियों ने दूसरे नायब तहसीलदार से रिपोर्ट लगवाकर जनसुनवाई पोर्टल पर फर्जी निस्तारण करवा दिया। जांच के बाद डीएम के आदेश पर कानूनगो ने लेखपालों व उनके परिजनों पर सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है।

मामला सदर तहसील का है। सदर तहसील के कानूनगो लालाराम ने कोतवाली में तहरीर दी। बताया कि कस्बा खानपुर में जालौन रोड पर गाटा संख्या 1283 व 1040 आपस में सटे हुए हैं। दोनों गाटा में महाकालेश्वर मंदिर की जमीन पड़ती है। 11 जनवरी 2013 को सीतू तिवारी ने यहां दो प्लॉट खरीदे थे। 17 जनवरी 2013 को उनके परिवार की प्रभा देवी ने भी एक प्लॉट खरीदा था। इस मामले में सीतू ने एक जनवरी 2025 को तहसील दिवस में शिकायत की।
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शिकायत में आरोप लगाया कि तत्कालीन लेखपाल अवनीश कुमार, सुमन शुक्ला, जितेंद्र, लेखपाल शशांक दुबे, अंकित तिवारी गलत पैमाइश कर उनके प्लॉट में नींव खोद दी। इस मामले में 04 जनवरी को दोबारा शिकायती पत्र मिलने पर नायब तहसीलदार औरैया की मौजूदगी में मिशन समाधान में दोबारा पैमाइश की गई। जांच में उन्हें मौके पर एक नींव पहले से ही खुदी मिली। साथ ही दोनों गाटा संख्या की सीमा मेल भी नहीं खाती मिली।
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मामले में दोनों पक्षों में सहमति न बनने पर मामला सिविल कोर्ट में पहुंच गया। जिस पर तत्कालीन लेखपाल ने तथ्यों को छिपाकर भ्रामक आख्या नायब तहसीलदार औरैया की जगह नायब तहसीलदार फफूंद से अग्रसारित कर जन सुनवाई पोर्टल पर अपलोड कर दी। बताया गया कि मामले में 12 जुलाई 2024 को सीतू के पति अरुण शुक्ला ने अपनी जमीन महिला सुमन पत्नी रामेंद्र को बेच दी। जोकि विधि विरुद्ध माना गया।
इसके बाद 20 जुलाई 2024 को अरुण शुक्ला ने सुमन देवी पत्नी रामेंद्र प्रसाद व मयंक तिवारी के नाम जमीन का इकरारनामा कर दिया। जांच में पता चला कि सुमन देवी लेखपाल शशांक दुबे की मां हैं। जबकि मयंक तिवारी लेखपाल अंकित तिवारी का साला है। इन आरोपियों ने गाटा संख्या में पड़ने वाली महाकालेश्वर मंदिर की जमीन अपने नाम दर्ज करवा ली। जबकि मंदिर की जमीन किसी व्यक्ति के नाम हस्तांतरित नहीं हो सकती है।

प्रारंभिक जानकारी में पता चला कि दोनों गाटा संख्या की कुछ फसली वर्षों की खतौनियां जिला राजस्व अखिलेखागार से गायब हैं। तहसीलदार सदर रणवीर सिंह ने बताया कि मंदिर की जमीन में फर्जीवाड़ा कर अवैध प्लॉटिंग करने का मामला सामने आया है। मामले में जिलाधिकारी के निर्देश पर सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
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