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हादसों को दावत दे रहे हाईवे के ब्लैक स्पॉट
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फोटो 30एयूआरपी10- मंडी समिति के ठीक सामने हाईवे पार करने के लिए जान जोखिम में डालते बाइक सवार
- फोटो : AURAIYA
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औरैया। हाईवे के ब्लैक स्पॉट हादसों को दावत दे रहे हैं। जिले में इटावा-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग का लगभग 35 किलोमीटर का हिस्सा आता है। इस 35 किलोमीटर में 12 ऐसे स्थान हैं। जिन्हें ब्लैक स्पॉट के नाम से जाना जाता है। कारण अक्सर वहां दुर्घटनाएं होती हैं। सर्दियों के दिनों में कोहरा छाने पर इन स्थानों पर दुर्घटनाएं बढ़ जाती हैं। सर्दी शुरू हो चुकी है। कोहरे छाने की संभावना दिखाई देने लगी है। ऐसे में प्रशासन को ब्लैक स्पॉट वाले स्थानों पर सोडियम पट्टी लगाने आदि जैसे इंतजाम किए जाने की आवश्यकता है। यदि शीघ्र इंतजाम न किए गए तो हादसे बढ़ने से इंकार नहीं किया जा सका।
शहर के समीप इंडियन ऑयल, कृषि उत्पादन मंडी समिति के सामने, जनेतपुर के सामने, करमपुर के समीप के अलावा अजीतमल तक 12 ऐसे स्थान हैं जहां सर्दियों के दौरान दुर्घटनाएं बढ़तीं हैं। इंडियन ऑयल चौकी के समीप हाईवे पर ट्रक, बसों व अन्य वाहनों का बाजार सजता है। हाईवे की आधी सड़क पर कब्जा होने के चलते दुर्घटनाएं यहां सबसे अधिक होतीं हैं।
सीन - एक
कृषि उत्पादन मंडी समिति के सामने राष्ट्रीय राजमार्ग पर जान जोखिम में डालकर हाईवे पार करने वालों को किसी भी समय देखा जा सकता है। यहां पैदल ही नहीं बल्कि साइकिल, बाइक सवार भारी-भारी सामान लेकर आते-जाते नजर आते हैं। मंडी समिति होने के चलते यहां किसान भी अक्सर जान जोखिम में डालकर हाईवे पार करते हैं। सर्दियों के समय कोहरा छाने पर सबसे अधिक घटनाएं यहीं पर देखने को मिलतीं हैं।
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सीन - दो
कानपुर रोड पर शहर में प्रवेश करने के लिए मोहल्ला दयालपुर, भीखमपुर, के अलावा नई बस्ती और आस-पास के लगभग 12 गांव के ग्रामीण जान जोखिम में डालकर हाईवे पार करते हैं। जिसके चलते कभी-कभी तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर घायल हो जाते हैं। या फिर उनकी मौत हो जाती है। पास में इंडियन ऑयल चौकी भी है। सिपाही तैनात रहते हैं, लेकिन सिपाही लोगों के आवागमन को देखकर नजर अंदाज कर देते हैं। बता दें कि सड़क हादसों के चलते यहां डिवाइडर बनाए गए थे। यहां पर ओवरब्रिज की जरूरत है।
सीन - तीन
राष्ट्रीय राजमार्ग पर इंडियन ऑयल चौकी के समीप वाहनों को दुरुस्त करने का बाजार सजता है। हाईवे पर सड़क के किनारे दोनों ओर वाहनों के खड़े होने से हाईवे संकरा हो जाता है। जिसके चलते अक्सर दुर्घटनाएं होतीं हैं। कानपुर से इटावा की ओर जाने वाली साइड पर सर्विस रोड न होने से बसें व ट्रक आधी सड़क तक अपना कब्जा जमा रहे हैं।
यहां हुई दुर्घटना
लगभग एक माह पहले इंडियन ऑयल के समीप ही हाईवे पर खच्चर के आने से कानपुर जेल में तैनात सिपाही की सड़क दुर्घटना में मौत हुई थी। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया था कि यदि सड़क किनारे वाहन न खड़े होते, तो सिपाही अपने-आप को बचा सकता था। अचानक खच्चर के सामने आने और सड़क किनारे वाहनों के खड़े होने से कम जगह के चलते सिपाही की बाइक खच्चर से टकराई थी।
राहगीर बोले
राष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संस्थान (भारत) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवम विश्नोई ने बताया कि मंडी समिति और इंडियन ऑयल के समीप ओवरब्रिज की बहुत ही आवश्यकता है। दुर्घटनाओं को रोकने का यही एक रास्ता है।
बनारसीदास मंडी समिति के पीछे निवास करने वाले अजय ने बताया कि आनंद मंडी समिति के सामने अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। सर्दियों के समय में यहां दुर्घटनाएं बढ़तीं हैं। समरथपुर, आनेपुर आदि गांवों के लोग जान जोखिम में डालकर हाईवे पार करते हैं। सर्दियों में कोहरा छाने के दौरान अक्सर तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आकर राहगीरों की मौत होती है।
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शहर के समीप इंडियन ऑयल, कृषि उत्पादन मंडी समिति के सामने, जनेतपुर के सामने, करमपुर के समीप के अलावा अजीतमल तक 12 ऐसे स्थान हैं जहां सर्दियों के दौरान दुर्घटनाएं बढ़तीं हैं। इंडियन ऑयल चौकी के समीप हाईवे पर ट्रक, बसों व अन्य वाहनों का बाजार सजता है। हाईवे की आधी सड़क पर कब्जा होने के चलते दुर्घटनाएं यहां सबसे अधिक होतीं हैं।
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सीन - एक
कृषि उत्पादन मंडी समिति के सामने राष्ट्रीय राजमार्ग पर जान जोखिम में डालकर हाईवे पार करने वालों को किसी भी समय देखा जा सकता है। यहां पैदल ही नहीं बल्कि साइकिल, बाइक सवार भारी-भारी सामान लेकर आते-जाते नजर आते हैं। मंडी समिति होने के चलते यहां किसान भी अक्सर जान जोखिम में डालकर हाईवे पार करते हैं। सर्दियों के समय कोहरा छाने पर सबसे अधिक घटनाएं यहीं पर देखने को मिलतीं हैं।
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सीन - दो
कानपुर रोड पर शहर में प्रवेश करने के लिए मोहल्ला दयालपुर, भीखमपुर, के अलावा नई बस्ती और आस-पास के लगभग 12 गांव के ग्रामीण जान जोखिम में डालकर हाईवे पार करते हैं। जिसके चलते कभी-कभी तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर घायल हो जाते हैं। या फिर उनकी मौत हो जाती है। पास में इंडियन ऑयल चौकी भी है। सिपाही तैनात रहते हैं, लेकिन सिपाही लोगों के आवागमन को देखकर नजर अंदाज कर देते हैं। बता दें कि सड़क हादसों के चलते यहां डिवाइडर बनाए गए थे। यहां पर ओवरब्रिज की जरूरत है।
सीन - तीन
राष्ट्रीय राजमार्ग पर इंडियन ऑयल चौकी के समीप वाहनों को दुरुस्त करने का बाजार सजता है। हाईवे पर सड़क के किनारे दोनों ओर वाहनों के खड़े होने से हाईवे संकरा हो जाता है। जिसके चलते अक्सर दुर्घटनाएं होतीं हैं। कानपुर से इटावा की ओर जाने वाली साइड पर सर्विस रोड न होने से बसें व ट्रक आधी सड़क तक अपना कब्जा जमा रहे हैं।
यहां हुई दुर्घटना
लगभग एक माह पहले इंडियन ऑयल के समीप ही हाईवे पर खच्चर के आने से कानपुर जेल में तैनात सिपाही की सड़क दुर्घटना में मौत हुई थी। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया था कि यदि सड़क किनारे वाहन न खड़े होते, तो सिपाही अपने-आप को बचा सकता था। अचानक खच्चर के सामने आने और सड़क किनारे वाहनों के खड़े होने से कम जगह के चलते सिपाही की बाइक खच्चर से टकराई थी।
राहगीर बोले
राष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संस्थान (भारत) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवम विश्नोई ने बताया कि मंडी समिति और इंडियन ऑयल के समीप ओवरब्रिज की बहुत ही आवश्यकता है। दुर्घटनाओं को रोकने का यही एक रास्ता है।
बनारसीदास मंडी समिति के पीछे निवास करने वाले अजय ने बताया कि आनंद मंडी समिति के सामने अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। सर्दियों के समय में यहां दुर्घटनाएं बढ़तीं हैं। समरथपुर, आनेपुर आदि गांवों के लोग जान जोखिम में डालकर हाईवे पार करते हैं। सर्दियों में कोहरा छाने के दौरान अक्सर तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आकर राहगीरों की मौत होती है।