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पूजा कर सुख समृद्धि मांगी
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14एयूआरपी53- भगवान गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों के समक्ष दीप प्रज्वलित करती एक बच्ची
- फोटो : AURAIYA
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औरैया/दिबियापुर। दीपावली का त्योहार शनिवार को हर्षोल्लास और उमंग के साथ मनाया गया। लोगों ने घरों और प्रतिष्ठानों को दीपों और झालरों से सजाया। लक्ष्मी पूजन के बाद पटाखे फोड़े। गली-मोहल्ले और रिश्तेदारों के यहां मिठाई बांटकर दीपावली की शुभकामनाएं दीं। फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर पर भी दिवाली के शुभकामना संदेश सुबह से ही लोगों ने खूब भेजे।
शनिवार को दीपावली पर्व पर सुबह से ही लोग खरीदारी के साथ पूजा की तैयारी में लगे रहे। मिठाई की दुकानों पर लोग बच्चों के साथ पहुंचे। घरों में भगवान गणेश व मां लक्ष्मी के साथ कुबेर की विधिविधान से पूजा की गई।
मान्यता है कि भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास काटने के बाद अयोध्या लौटे तो लोगों ने खुशी में दीये जलाए। इसके अलावा दिवाली मनाने को लेकर और भी मान्यताएं हैं। कहा जाता है कि कृष्ण ने कार्तिक अमावस्या के दिन नरकासुर का वध किया था।
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लक्ष्मी जी इसी दिन समुद्र से प्रकट हुई थीं। छोटे-बड़े व्यापारियों ने भी अपने प्रतिष्ठानों पर लक्ष्मी का पूजन किया। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्व की धूम रही। इस बार अधिकांश लोगों ने घरों में मिट्टी के दीये और मोमबत्ती जलाकर अंधेरे को मिटाया।
घरों और प्रतिष्ठानों पर झालर और बल्ब की भी सजावट खूब हुई। पूजन के बाद लोगों ने गली-मोहल्लों में उपहार देकर लोगों को दीपावली की शुभकामनाएं दी। बच्चे युवा और बड़ों ने आतिशबाजी की। हालांकि इस बार लोग पर्यावरण प्रदूषण के प्रति सजग रहे और कम ही आतिशबाजी जलाई। बच्चे और युवा रंग-बिरंगी पोशाक पहनकर त्योहार को मनाते नजर आए। मंदिरों में पूजा अर्चना करने के लिए तांता लगा रहा। देर रात तक खरीदारी के लिए बाजारों में भारी भीड़ रही।
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शनिवार को दीपावली पर्व पर सुबह से ही लोग खरीदारी के साथ पूजा की तैयारी में लगे रहे। मिठाई की दुकानों पर लोग बच्चों के साथ पहुंचे। घरों में भगवान गणेश व मां लक्ष्मी के साथ कुबेर की विधिविधान से पूजा की गई।
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मान्यता है कि भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास काटने के बाद अयोध्या लौटे तो लोगों ने खुशी में दीये जलाए। इसके अलावा दिवाली मनाने को लेकर और भी मान्यताएं हैं। कहा जाता है कि कृष्ण ने कार्तिक अमावस्या के दिन नरकासुर का वध किया था।
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लक्ष्मी जी इसी दिन समुद्र से प्रकट हुई थीं। छोटे-बड़े व्यापारियों ने भी अपने प्रतिष्ठानों पर लक्ष्मी का पूजन किया। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्व की धूम रही। इस बार अधिकांश लोगों ने घरों में मिट्टी के दीये और मोमबत्ती जलाकर अंधेरे को मिटाया।
घरों और प्रतिष्ठानों पर झालर और बल्ब की भी सजावट खूब हुई। पूजन के बाद लोगों ने गली-मोहल्लों में उपहार देकर लोगों को दीपावली की शुभकामनाएं दी। बच्चे युवा और बड़ों ने आतिशबाजी की। हालांकि इस बार लोग पर्यावरण प्रदूषण के प्रति सजग रहे और कम ही आतिशबाजी जलाई। बच्चे और युवा रंग-बिरंगी पोशाक पहनकर त्योहार को मनाते नजर आए। मंदिरों में पूजा अर्चना करने के लिए तांता लगा रहा। देर रात तक खरीदारी के लिए बाजारों में भारी भीड़ रही।

14एयूआरपी52- रंगोली बनाने के बाद दीप जलाती एक महिला- फोटो : AURAIYA