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Auraiya News: मोबाइल की लत से बच्चे हो रहे चिड़चिड़े, आंखों की रोशनी भी हो रही कम

Sun, 30 Aug 2026 12:21 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Sun, 30 Aug 2026 12:21 AM IST
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Children are becoming irritable due to mobile addiction, and their eyesight is also deteriorating.
मरीज की काउंसलिंग करतीं मनोवैज्ञानिक डॉ. शिवांगी तिवारी। स्रोत:स्वयं
औरैया। आधुनिकता के इस दौर में मोबाइल बच्चों के लिए एक अहम जरूरत बन गया है। हालांकि, बेवजह मनोरंजन के लिए घंटों स्क्रीन टाइम बच्चों के स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो रहा है। यह लत बच्चों को चिड़चिड़ा बना रही है और उनकी आंखों की रोशनी व याददाश्त पर भी बुरा असर डाल रही है।
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चिचौली मेडिकल कॉलेज के मनो रोग विभाग की ओपीडी में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं। मनोवैज्ञानिक डॉ. शिवांगी तिवारी ने बताया कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम से छोटे बच्चों की आंखें समय से पहले कमजोर हो रही हैं। इसका बुरा प्रभाव उनके मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार पर भी पड़ रहा है।
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लगातार स्क्रीन देखने से बच्चों में चिड़चिड़ापन, एकाग्रता की कमी, नींद न आना और गुस्सा बढ़ने जैसी मानसिक समस्याएं तेजी से आम हो रही हैं। अभिभावकों को बच्चों पर नजर रखनी चाहिए ताकि उन्हें मोबाइल की लत न लगे। घंटों मोबाइल चलाने से शरीर निष्क्रिय रहता है, जिससे शारीरिक गतिविधि न होने से अन्य दिक्कतें भी होती हैं। मनोरंजन के लिए मोबाइल के बजाय मैदान या पार्क में खेलकूद को अपनाना चाहिए।
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इन बातों का रखें ख्याल:
- स्क्रीन टाइम करें सीमित
- मैदानी खेल और आउटडोर गतिविधियां
- अभिभावक खुद बनें रोल मॉडल
- पारिवारिक संवाद बढ़ाएं
- रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रखें
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वर्जन---
यदि बच्चा मोबाइल न मिलने पर बहुत अधिक जिद, गुस्सा या आक्रामक व्यवहार करे, तो इसे नजरअंदाज न करें। तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें। बच्चों को डिजिटल लत से बचाकर ही उनके बेहतर स्वास्थ्य की नींव रखी जा सकती है। मेडिकल कॉलेज में काउंसलिंग से लेकर उपचार के अन्य संसाधन उपलब्ध हैं।-डॉ. पवन कुमार शर्मा, सीएमएस मेडिकल कॉलेज
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