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Auraiya News: धनुष टूटते ही श्रीराम के जयकारों से गूंजा पंडाल
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अजीतमल। क्षेत्र के जगन्नाथपुर में कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित 11 दिवसीय मेला का शुक्रवार को विशाल धनुष भंग के साथ समापन हो गया। धनुष भंग में उत्तर प्रदेश के महान कलाकारों के द्वारा पूरी रात अपनी कला से लोगों को पंडाल में बैठने को मजबूर कर दिया।
शुक्रवार रात में जगन्नाथपुर में जगन्नाथ मन्दिर प्रांगण में विशाल धनुष भंग का आयोजन किया गया। लीला के मंचन में जनकपुरी के राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के विवाह के लिए स्वयंवर रच दिया। जिसमें भगवान शंकर के पिनाक के खंडन के लिए शर्त रखी गई। किसी के भी धनुष को नहीं तोड़ पाने पर जनक बहुत ही दुखी हुए। तब ऋषि विस्वामित्र ने धनुष टूटने का शुभ समय जान कर भगवान राम को संकेत किया। जिसके बाद भगवान राम ने धनुष को तोड़ दिया।
धनुष टूटते ही फूलों की वर्षा हुई तथा पूरा पंडाल सियाराम के जयकारों से गूंज उठा। धनुष टूटने के जानकारी जब भगवान परशुराम को हुई तो वह पतंगे के समान शीघ्रता से जनकपुरी पहुंचे। परशुराम के पहुंचते ही वहां उपस्थित राजाओं में खलबली मच गई। सभी राजा उठ-उठकर उन्हें अपना व पिता का नाम बताते हुए। प्रणाम करने लगे। तब विश्वामित्र ने भी भगवान राम और लक्ष्मण के साथ उनको प्रणाम किया। इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजक प्रधान प्रतिनिधि बजरंगी पाल सहित ग्रामीण मौजूद रहे।
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शुक्रवार रात में जगन्नाथपुर में जगन्नाथ मन्दिर प्रांगण में विशाल धनुष भंग का आयोजन किया गया। लीला के मंचन में जनकपुरी के राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के विवाह के लिए स्वयंवर रच दिया। जिसमें भगवान शंकर के पिनाक के खंडन के लिए शर्त रखी गई। किसी के भी धनुष को नहीं तोड़ पाने पर जनक बहुत ही दुखी हुए। तब ऋषि विस्वामित्र ने धनुष टूटने का शुभ समय जान कर भगवान राम को संकेत किया। जिसके बाद भगवान राम ने धनुष को तोड़ दिया।
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धनुष टूटते ही फूलों की वर्षा हुई तथा पूरा पंडाल सियाराम के जयकारों से गूंज उठा। धनुष टूटने के जानकारी जब भगवान परशुराम को हुई तो वह पतंगे के समान शीघ्रता से जनकपुरी पहुंचे। परशुराम के पहुंचते ही वहां उपस्थित राजाओं में खलबली मच गई। सभी राजा उठ-उठकर उन्हें अपना व पिता का नाम बताते हुए। प्रणाम करने लगे। तब विश्वामित्र ने भी भगवान राम और लक्ष्मण के साथ उनको प्रणाम किया। इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजक प्रधान प्रतिनिधि बजरंगी पाल सहित ग्रामीण मौजूद रहे।
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