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Auraiya News: कहीं फसलें डुबो रहा नदी का पानी... तो कहीं सिंचाई के लिए तरस रहे किसान
Sat, 19 Sep 2026 12:16 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sat, 19 Sep 2026 12:16 AM IST
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सूखा पड़ा रतनपुर चिरूकुआ सराय प्रथम रजवाह। संवाद
बिधूना। एक ओर सेंगर और पांडु नदी का पानी कई गांवों में किसानों की फसलों को डुबा रहा है, वहीं एरवाकटरा क्षेत्र के 20 से ज्यादा गांवों के किसान सिंचाई के पानी के लिए तरस रहे हैं। रतनपुर चिरुकॅुआ सराय प्रथम रजबहे में करीब 10 साल से पानी न आने से किसान धान की फसल की सिंचाई के लिए निजी सबमर्सिबल और दूसरे साधनों पर निर्भर हैं। इससे खेती की लागत बढ़ने के साथ छोटे किसानों के लिए फसल घाटे का सौदा बनती जा रही है।
एरवाकटरा ब्लॉक के गांव समायन के पास से निकले रजबहे में पानी न आने से किसानों को निजी साधनों से सिंचाई करनी पड़ रही है। कई किसान करीब 100 रुपये प्रति घंटे की दर से पानी खरीदकर फसल बचा रहे हैं, जबकि कुछ ने लाखों रुपये खर्च कर अपने सबमर्सिबल लगवा लिए हैं। इन दिनों बिजली कटौती ने किसानों की मुश्किल और बढ़ा दी हैं।
किसान लगातार रजबहे में पानी छोड़े जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग एक-दूसरे के क्षेत्र का बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। दूसरी ओर जलभराव वाले क्षेत्रों में प्रशासन मुआवजे की तैयारी कर रहा है।
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इन गांवों के किसान रजबहे से सिंचाई की लगाए हैं आस
एरवाकटरा ब्लॉक के समायन के पास गांव रतनपुर के पास से निकलने वाले इस रजबहे से रतनपुर, शामपुर, चिरुकॅुआ, सराय प्रथम, लघुपुरा, कमलसिंह पूर्व, बिकूपुर मढ़ैया, मुर्चा, बिकूपुर, पूर्व पट्टी, पूर्वा मुले, रामनगर समेत 20 गांवों के किसानों को सिंचाई का पानी मिलता था। वहीं, रजबहे से निकलने वाले बिकूपुर माइनर के जरिए सरैया, भदसिया, भिखरा, सराय, रूपपुर और दलापूर्वा क्षेत्र तक पानी पहुंचता था। किसान धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि करीब 50 बीघा में धान की फसल खेतों में खड़ी है। पूरी फसल की सिंचाई सबमर्सिबल से करनी पड़ रही है। करीब 100 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से सिंचाई का अतिरिक्त खर्च आ रहा है। साल 2015 में रजबहे में पानी आया था। इसके बाद करीब 10 साल बीत गए, लेकिन दोबारा पानी नहीं आया।
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सिंचाई के लिए सबमर्सिबल ही सहारा
फोटो-22- मनोज कुमार
रजबहे में पानी न मिलने से खेतों की सिंचाई के लिए सबमर्सिबल का सहारा लेना पड़ रहा है। इसे लगाने में दो लाख से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। खेती की लागत पहले ही बढ़ी हुई है, ऊपर से सिंचाई का अतिरिक्त खर्च किसानी को घाटेदार बना रहा है।
-मनोज कुमार
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फोटो-23- आसाराम। संवाद
रजबहे में पानी न आने से धान की फसल में पहले के मुकाबले पैदावार घटी है। 100 रुपये प्रति घंटे के भाव से सिंचाई की लागत आ रही है। इन दिनों बिजली कटौती के चलते सिंचाई के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
-आसाराम
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रबी की फसल में पानी गया था। कुछ तकनीकी समस्या आने की वजह से खरीफ की फसल में पानी नहीं पहुंच पाया है। 72 किमी लंबे रजबहा तीन जिलों से होकर गुजरता है। टेल तक पानी पहुंचने में समस्या होती है, जल्द सफाई करके पानी छोड़ा जाएगा।
-राकेश कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग, इटावा
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एरवाकटरा ब्लॉक के गांव समायन के पास से निकले रजबहे में पानी न आने से किसानों को निजी साधनों से सिंचाई करनी पड़ रही है। कई किसान करीब 100 रुपये प्रति घंटे की दर से पानी खरीदकर फसल बचा रहे हैं, जबकि कुछ ने लाखों रुपये खर्च कर अपने सबमर्सिबल लगवा लिए हैं। इन दिनों बिजली कटौती ने किसानों की मुश्किल और बढ़ा दी हैं।
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किसान लगातार रजबहे में पानी छोड़े जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग एक-दूसरे के क्षेत्र का बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। दूसरी ओर जलभराव वाले क्षेत्रों में प्रशासन मुआवजे की तैयारी कर रहा है।
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इन गांवों के किसान रजबहे से सिंचाई की लगाए हैं आस
एरवाकटरा ब्लॉक के समायन के पास गांव रतनपुर के पास से निकलने वाले इस रजबहे से रतनपुर, शामपुर, चिरुकॅुआ, सराय प्रथम, लघुपुरा, कमलसिंह पूर्व, बिकूपुर मढ़ैया, मुर्चा, बिकूपुर, पूर्व पट्टी, पूर्वा मुले, रामनगर समेत 20 गांवों के किसानों को सिंचाई का पानी मिलता था। वहीं, रजबहे से निकलने वाले बिकूपुर माइनर के जरिए सरैया, भदसिया, भिखरा, सराय, रूपपुर और दलापूर्वा क्षेत्र तक पानी पहुंचता था। किसान धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि करीब 50 बीघा में धान की फसल खेतों में खड़ी है। पूरी फसल की सिंचाई सबमर्सिबल से करनी पड़ रही है। करीब 100 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से सिंचाई का अतिरिक्त खर्च आ रहा है। साल 2015 में रजबहे में पानी आया था। इसके बाद करीब 10 साल बीत गए, लेकिन दोबारा पानी नहीं आया।
सिंचाई के लिए सबमर्सिबल ही सहारा
फोटो-22- मनोज कुमार
रजबहे में पानी न मिलने से खेतों की सिंचाई के लिए सबमर्सिबल का सहारा लेना पड़ रहा है। इसे लगाने में दो लाख से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। खेती की लागत पहले ही बढ़ी हुई है, ऊपर से सिंचाई का अतिरिक्त खर्च किसानी को घाटेदार बना रहा है।
-मनोज कुमार
फोटो-23- आसाराम। संवाद
रजबहे में पानी न आने से धान की फसल में पहले के मुकाबले पैदावार घटी है। 100 रुपये प्रति घंटे के भाव से सिंचाई की लागत आ रही है। इन दिनों बिजली कटौती के चलते सिंचाई के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
-आसाराम
रबी की फसल में पानी गया था। कुछ तकनीकी समस्या आने की वजह से खरीफ की फसल में पानी नहीं पहुंच पाया है। 72 किमी लंबे रजबहा तीन जिलों से होकर गुजरता है। टेल तक पानी पहुंचने में समस्या होती है, जल्द सफाई करके पानी छोड़ा जाएगा।
-राकेश कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग, इटावा

सूखा पड़ा रतनपुर चिरूकुआ सराय प्रथम रजवाह। संवाद

सूखा पड़ा रतनपुर चिरूकुआ सराय प्रथम रजवाह। संवाद