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गोशाला में आश्रय पाने वाली एक गाय ने दम तोड़ा
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फोटो01एयूआरपी 45- गोशाला में छाया की व्यवस्था न होने से खुले में खड़े गोवंश
- फोटो : AURAIYA
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मुरादगंज (औरैया)। क्षेत्र के ग्राम जसंतपुर स्थित निजी गोशाला में अव्यवस्थाओं के चलते रविवार को फिर से एक गाय ने दम तोड़ दिया। गोशाला प्रबंधक ने बताया कि पिछले दो माह में अब तक चार गायों की मौत हो चुकी है। प्रशासन से कोई मदद न मिलने के कारण वह व्यवस्था को चाक-चौबंद नहीं रख पा रहे हैं।
ग्राम जसंतपुर स्थित श्रीरामकृष्ण जाने गोशाला समिति की ओर से निजी तौर पर गोशाला का संचालन किया जाता है। जिसका संचालन रेणु सेंगर व उनके पति रविंद्र दास द्वारा किया जा रहा है। उक्त गोशाला में करीब 50 गोवंश शरण पाए हुए हैं। जिन्हें रविंद्र दास द्वारा प्रतिदिन आसपास के क्षेत्र में चराकर खाने के इंतजाम पूरा किया जाता है। इस संबंध में गोशाला संचालक रविंद्र दास ने बताया कि उनकी गोशाला में मौजूद गोवंशों के लिए न तो भूसा और न ही छाया की कोई व्यवस्था है। जिससे रात में गोवंश सर्दी में ठिठुरते रहते हैं। साथ ही चारे पानी का इंतजाम न होने के कारण गोवंश भूखे प्यासे ही रहने को मजबूर हैं। जिसके चलते गोशाला में आए दिन कुपोषण के चलते गोवंश की मौत हो रही है। बताया कि रविवार को भी गोशाला में कुपोषण का शिकार एक गर्भवती गाय की मौत हो गई। जिसके बाद सूचना दिए जाने पर गोशाला पहुंचे पशु चिकित्सक कमल किशोर ने मृत गाय का परीक्षण किया।
उधर, गोवंश की मौत पर संचालक रेणु सेंगर ने बताया कि गोशाला के संचालन में धन की कमी आड़े आ रही है। धन न होने के चलते गोशाला में आश्रय पाए गोवंश को चारे पानी व छाया का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। कई बार सरकार व क्षेत्रीय जनता से मदद कि गुहार लगाने पर भी कहीं से कोई मदद नहीं मिल सकी है। इस संबंध में पशु चिकित्साधिकारी डॉ.कमल किशोर ने बताया कि गाय का पोस्टमार्टम किया गया। जिसमें उसकी मौत शनिवार शाम को होना पाया गया है। जिसमें मौत का कारण कुपोषण पाया गया।
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ग्राम जसंतपुर स्थित श्रीरामकृष्ण जाने गोशाला समिति की ओर से निजी तौर पर गोशाला का संचालन किया जाता है। जिसका संचालन रेणु सेंगर व उनके पति रविंद्र दास द्वारा किया जा रहा है। उक्त गोशाला में करीब 50 गोवंश शरण पाए हुए हैं। जिन्हें रविंद्र दास द्वारा प्रतिदिन आसपास के क्षेत्र में चराकर खाने के इंतजाम पूरा किया जाता है। इस संबंध में गोशाला संचालक रविंद्र दास ने बताया कि उनकी गोशाला में मौजूद गोवंशों के लिए न तो भूसा और न ही छाया की कोई व्यवस्था है। जिससे रात में गोवंश सर्दी में ठिठुरते रहते हैं। साथ ही चारे पानी का इंतजाम न होने के कारण गोवंश भूखे प्यासे ही रहने को मजबूर हैं। जिसके चलते गोशाला में आए दिन कुपोषण के चलते गोवंश की मौत हो रही है। बताया कि रविवार को भी गोशाला में कुपोषण का शिकार एक गर्भवती गाय की मौत हो गई। जिसके बाद सूचना दिए जाने पर गोशाला पहुंचे पशु चिकित्सक कमल किशोर ने मृत गाय का परीक्षण किया।
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उधर, गोवंश की मौत पर संचालक रेणु सेंगर ने बताया कि गोशाला के संचालन में धन की कमी आड़े आ रही है। धन न होने के चलते गोशाला में आश्रय पाए गोवंश को चारे पानी व छाया का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। कई बार सरकार व क्षेत्रीय जनता से मदद कि गुहार लगाने पर भी कहीं से कोई मदद नहीं मिल सकी है। इस संबंध में पशु चिकित्साधिकारी डॉ.कमल किशोर ने बताया कि गाय का पोस्टमार्टम किया गया। जिसमें उसकी मौत शनिवार शाम को होना पाया गया है। जिसमें मौत का कारण कुपोषण पाया गया।
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